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सामान्य अध्ययन-2: विकसित और विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का भारत के हितों और भारतीय प्रवासियों पर प्रभाव।

संदर्भ: ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्यूशन’ के माध्यम से वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी, लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभुत्व के डोनरो सिद्धांत का सबसे प्रत्यक्ष उदाहरण बन गई है।

वेनेजुएला पर स्ट्राइक के संभावित कारण

  • वेनेजुएला के संसाधनों को सुरक्षित करना: वेनेजुएला केपास 303 बिलियन बैरल कच्चा तेल है, जो सभी वैश्विक भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा है।
  • “नार्कोटेररिज्म” के आरोप: अमेरिका ने मादुरो शासन पर कार्टेल डे लॉस सोल्स जैसे नार्को-आतंकवादी संगठन का नेतृत्व करने का आरोप लगाया, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल हैं।
  • पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभाव की फिर से स्थाना: यह ऑपरेशन विशेष रूप से इस क्षेत्र में बढ़ते चीनी और रूसी प्रभाव की आशंकाओं के बीच लैटिन अमेरिका में अमेरिकी रणनीतिक प्रभुत्व की पुष्टि करता है।
    • वर्ष 2014 के बाद से, वेनेजुएला द्वारा किए जाने वाले सभी हथियारों के आयात में चीन का हिस्सा 46% है।

‘डोनरो सिद्धांत’ के संभावित परिणाम

  • चिलिंग रिपल प्रभाव: यह दृष्टिकोण इस विचार को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य बनाता है कि महाशक्तियाँ विशिष्ट क्षेत्रों पर अपना विशेष नियंत्रण रख सकती हैं। प्रभाव क्षेत्र (Spheres of Influence) की इस राजनीति का विस्तार अन्य वैश्विक शक्तियों के लिए एक मिसाल बन जाता है। इसके परिणामस्वरूप, चीन और रूस जैसे देशों को अपने पड़ोस में इसी तरह के प्रभुत्व और हस्तक्षेपकारी सिद्धांतों को तर्कसंगत ठहराने का प्रोत्साहन मिलता है।
  • साम्राज्यवाद: अमेरिका ने खुले तौर पर कोलंबिया और क्यूबा को पतन के लिए तैयार रहने” की धमकी दी है। इसके साथ ही, उसने कनाडा को अमेरिका के “51वें राज्य” के रूप में समाहित करने, ग्रीनलैंड को हमारी भूमि” के रूप में पुनर्नामित करने और मेक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर अमेरिका की खाड़ी” करने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, पनामा नहर को पुनः पूरी तरह से अमेरिकी नियंत्रण में घोषित कर दिया गया है। ये सभी कदम नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था‘ (Rules-Based International Order) को पूरी तरह से ध्वस्त कर रहे हैं।
    • संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4): सभी सदस्य देश अपने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग करने या बल प्रयोग की धमकी देने से परहेज करेंगे।
  • पश्चिमी गोलार्ध में राजनीतिक अस्थिरता: शासन-परिवर्तन के संचालन और सैन्य हस्तक्षेप में वृद्धि संवेदनशील राज्यों को अस्थिर कर सकती है।
  • शीत युद्ध के युग का पुनरुद्धार: यह अमेरिका-चीन और अमेरिका-रूस प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकता है तथा छद्म संघर्षों और राजनयिक टकराव के जोखिम को बढ़ा सकता है।

भारत पर ‘डोनरो सिद्धांत’ का प्रभाव:

  • सकारात्मक प्रभाव
    • चीन का मुकाबला: यह सिद्धांत पश्चिमी गोलार्ध  में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने का लक्ष्य रखता है। यह भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक अभिसरण को और मजबूत करता है, क्योंकि दोनों देश वैश्विक स्तर पर चीनी प्रभुत्व को संतुलित करना चाहते हैं।
    • ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला में स्थिरता आने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नया जीवन मिल सकता है। ONGC Videsh, IOC, और ऑयल इंडिया जैसे सार्वजनिक उपक्रम अपने रुके हुए अपस्ट्रीम प्रोजेक्ट्स को पुनर्जीवित कर सकते हैं। साथ ही, रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी निजी कंपनियों के लिए कच्चे तेल का आयात फिर से सुलभ हो सकता है।
    • निर्यात बाजार का विस्तार: अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए अवसर बन रहे हैं। भारत लैटिन अमेरिकी देशों को अपने फार्मा (दवा) निर्यात, आईटी सेवाओं और ऊर्जा सहयोग (विशेषकर लिथियम, तेल और गैस) के क्षेत्र में विस्तार कर सकता है।
  • नकारात्मक प्रभाव
    • एकपक्षवाद: यह सिद्धांत ‘नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था’ को कमजोर करता है। यह राष्ट्रों की संप्रभुता और गैर-हस्तक्षेप जैसे बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, जिससे वैश्विक स्तर पर “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाली स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है।
    • रणनीतिक स्वायत्तता पर दबाव: यह स्थिति भारत के लिए कूटनीतिक संकट पैदा करती है। अमेरिका और उसके विरोधियों के बीच पक्ष चुनने का दबाव भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को सीमित कर सकता है, जो दशकों से भारतीय विदेश नीति का मुख्य आधार रही है।
    • वैश्विक व्यापार में व्यवधान: इस तरह के सैन्य संघर्ष और एकपक्षीय दावे वैश्विक व्यापार को बाधित करते हैं। इससे कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आता है, जो अंततः वि-वैश्वीकरण (De-globalization) की प्रक्रिया को तेज करता है।

Source:
moneycontrol

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