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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति,विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ:  हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भारत के फैबलेससेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को सुदृढ़ करने और आयात पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव योजना‘ (DLI) के तहत 24 चिप डिज़ाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह पहल इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन‘ (ISM) के माध्यम से कार्यान्वित किए जा रहे महत्त्वाकांक्षी सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है।
  • उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2021 में एक स्थायी सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले इकोसिस्टम के विकास हेतु ₹76,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ महत्त्वाकांक्षी सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रमको मंजूरी दी थी।
  • ये परियोजनाएं वीडियो सर्विलांस, ड्रोन डिटेक्शन (ड्रोन का पता लगाने), एनर्जी मीटर, माइक्रोप्रोसेसर, सैटेलाइट कम्युनिकेशंस (उपग्रह संचार) और ब्रॉडबैंड तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) ‘सिस्टम-ऑन-चिप’ (SoC) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को कवर करती हैं।
  • इन मंजूरियों का उद्देश्य भारत की घरेलू सेमीकंडक्टर डिज़ाइन क्षमता को बढ़ाना और कंपनियों को सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में अग्रणी स्थान दिलाना है।
  • DLI-समर्थित परियोजनाओं का तेज़ी से विस्तार हो रहा है। उल्लेखनीय है कि अब तक 16 ‘टेप-आउट’ हो चुके हैं, 6 ASIC चिप्स विकसित की गई हैं, 10 पेटेंट दर्ज किए गए हैं, 1,000 से अधिक इंजीनियर इनमें कार्यरत हैं और इनमें होने वाले निजी निवेश में 3 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।
  • DLI योजना के समानांतर चिप्स टू स्टार्टअप‘ (C2S) कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट स्तर पर 85,000 युवाओं को चिप डिज़ाइन में प्रशिक्षित कर ‘उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप’ एक कुशल कार्यबल तैयार करना है।

सेमीकंडक्टर डिज़ाइन का महत्त्व 

  • सेमीकंडक्टर चिप्स, मूल्यवर्धन में 50% तक का योगदान देती हैं, बिल ऑफ मैटेरियल्स (BOM) की लागत में इनका हिस्सा 20-50% होता है, और वैश्विक सेमीकंडक्टर बिक्री का 30-35% हिस्सा उन कंपनियों से आता है जो फैबलेसमॉडल पर काम करती हैं।
  • सक्षम ‘फैबलेस’ क्षमता के अभाव में, स्थानीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स का विनिर्माण होने के बावजूद देशों को ‘कोर टेक्नोलॉजी’ के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • सशक्त ‘फैबलेस’ ईकोसिस्टम के माध्यम से ‘बौद्धिक संपदा’ पर स्वामित्व प्राप्त होता है और यह भविष्य में तकनीकी श्रेष्ठता सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिव(DLI)योजना के बारे में  

  • नोडल मंत्रालय: यह योजना दिसंबर 2021 में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा शुरू की गई थी।
  • उद्देश्य:
  • इस योजना का उद्देश्य भारत के घरेलू सेमीकंडक्टर डिज़ाइन उद्योग के सामने आने वाली संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना है।
  • यह स्वदेशी चिप डिज़ाइन को बढ़ावा देने और आयातित सेमीकंडक्टर ‘बौद्धिक संपदा’ (IP) पर निर्भरता कम करने का प्रयास करती है।
  • यह योजना वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ‘फैबलेस ईकोसिस्टम’ के निर्माण हेतु स्टार्टअप्स और MSMEs को प्रोत्साहित करने एवं सशक्त बनाने पर केंद्रित है।
  • पात्रता: निवासी भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाले स्टार्टअप, MSME और घरेलू कंपनियाँ इस योजना की पात्र लाभार्थी हैं।
  • कवरेज: यह योजना सेमीकंडक्टर डिज़ाइन के विकास से लेकर परिनियोजन तक के संपूर्ण जीवनचक्र जिसमें इंटीग्रेटेड सर्किट (IC), चिपसेट, सिस्टम-ऑन-चिप (SoC), सिस्टम और ‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी’ (IP) कोर शामिल हैं, में सहायता करती है।
  • प्रोत्साहन: यह योजना निर्धारित सीमा के अंतर्गत पात्र डिज़ाइन व्यय की 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति करती है। इसके अतिरिक्त, यह एक निश्चित अवधि के लिए शुद्ध बिक्री (Net Sales) पर आधारित परिनियोजन-आधारित प्रोत्साहन (DLI) भी प्रदान करती है।
  • अवसंरचना सहायता : ChipIN केंद्र के माध्यम से स्टार्टअप्स को उन्नत ‘इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन ऑटोमेशन’ उपकरण, IP कोर रिपॉजिटरी और प्रोटोटाइप निर्माण की सुविधा मिलती है। इसके साथ ही, यह योजना निर्मित चिप्स के ‘पोस्ट-सिलिकॉन वैलिडेशन’ और परीक्षण में भी सहायता करती है।

डिज़ाइन लिंक्ड इंसेंटिवयोजना के तहत हासिल की गईं उपलब्धियाँ

  • इस योजना से कई चिप डिज़ाइन ‘टेप-आउट’ और स्वदेशी चिप्स का सफलतापूर्वक निर्माण हुआ है।
  • इस योजना ने पेटेंट फाइलिंग में तेजी लाने और पुन: प्रयोज्य) सेमीकंडक्टर ‘IP कोर’ विकसित करने में सहायता प्रदान की है।
  • इसने स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों में कुशल सेमीकंडक्टर इंजीनियरों के एक बड़े समूह को तैयार करने और उन्हें नियुक्त करने में सफलता प्राप्त की है।
  • इसने सरकारी सहायता के साथ-साथ बड़े पैमाने पर निजी निवेश को भी आकर्षित किया है।

Source:
Pib
Msn

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