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सामान्य अध्ययन-1: विश्वभर (दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप सहित) में प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों का वितरण।

सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रारूप टार-बॉल्स प्रबंधन नियम, 2026 जारी किए हैं, जो टार-बॉल्स प्रदूषण के प्रबंधन हेतु भारत का पहला समर्पित नियामक ढांचा है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह कदम विशेष रूप से भारत के पश्चिमी तट पर टार-बॉल्स निक्षेपण की आवर्ती घटनाओं के प्रत्युत्तर में उठाया गया है। समुद्री धाराओं और पवन परिसंचरण के कारण मानसून के दौरान यह समस्या अक्सर तीव्र हो जाती है।
  • राष्ट्रीय तेल रिसाव आपदा आकस्मिक योजना (NOSDCP) जैसे वर्तमान तंत्र मुख्य रूप से बड़े तेल रिसाव पर केंद्रित थे, जिससे टार-बॉल्स जैसे छोटे और बिखरे हुए प्रदूषण का नियामक स्तर पर पर्याप्त समाधान नहीं हो पा रहा था।
  • यह मसौदा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के व्यापक अधिदेश के अंतर्गत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य टार-बॉल्स प्रदूषण से निपटने के लिए एक व्यापक और जवाबदेह नियामक दृष्टिकोण स्थापित करना है।

टार-बॉल्स क्या है?

  • टार-बॉल्स अपक्षयित कच्चे तेल के छोटे, चिपचिपे और गहरे रंग के पिंड होते हैं, जिनका निर्माण समुद्री वातावरण में तेल के भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों के पश्चात होता है।
  • इनका उद्भव तेल रिसाव, टैंकर दुर्घटनाओं, अपतटीय उत्खनन, पाइपलाइन रिसाव, प्राकृतिक रिसाव और तैलीय अपशिष्ट के अवैध उत्सर्जन से होता है।
  • इनका निर्माण ‘अपक्षयण’  नामक प्रक्रिया के माध्यम से होता है, जिसमें हल्के घटकों का वाष्पीकरण और विलेयकरण, गाढ़े अवशेषों में पायसीकरण, तरंगों द्वारा विखंडन और अंततः सघन द्रव्यमान के रूप में ठोसकरण सम्मिलित है।
  • ये टार-बॉल्स समुद्री धाराओं और पवन परिसंचरण द्वारा लंबी दूरी तक ले जाए जाते हैं, जो अक्सर अपने मूल स्रोत से बहुत दूर तटों पर जमा हो जाते हैं, जिससे इनके स्रोत का पता लगाना कठिन हो जाता है।

प्रभाव:

  • पर्यावरणीय प्रभाव: टार-बॉल्स मछली, समुद्री पक्षी और कछुओं जैसे समुद्री जीवों को ढक देते हैं जिससे उनका दम घुटने लगता है। यह उनकी गतिशीलता, आहार और प्रजनन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।
  • स्वास्थ्य प्रभाव: टार-बॉल्स में हाइड्रोकार्बन, भारी धातु और अनवरत कार्बनिक प्रदूषक  जैसे विषाक्त पदार्थ होते हैं, जो त्वचा के संपर्क या अनावरण के माध्यम से स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न करते हैं।
  • आर्थिक प्रभाव: ये पर्यटन और मत्स्य पालन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे तटीय समुदायों की आय और आजीविका को नुकसान पहुँचता है।

मसौदा नियमों के प्रमुख प्रावधान

  • व्यापक जीवनचक्र प्रबंधन: ये नियम टार-बॉल के संपूर्ण जीवनचक्र को कवर करने वाला एक समग्र ढांचा स्थापित करते हैं, जिसमें उनका उत्पादन, संग्रहण, भंडारण, परिवहन, उपचार और अंतिम निपटान सम्मिलित है।
  • विस्तारित नियामक दायरा: ये “तेल सुविधाओं” की एक व्यापक परिभाषा प्रस्तुत करते हैं, जिसमें जहाजों, अपतटीय प्लेटफॉर्म और पाइपलाइन संचालकों को शामिल किया गया है, जिससे प्रदूषण के सभी संभावित स्रोतों को विनियमन के दायरे में लाया जा सके।
  • प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत: यह ढांचा “प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत” पर आधारित है, जो अनिवार्य करता है कि उत्तरदायी संस्थाएं पर्यावरणीय क्षति, स्वच्छता और उपचार की लागत वहन करेंगी।
  • संस्थागत तंत्र: एक बहु-एजेंसी ढांचे का प्रस्ताव किया गया है, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों जैसे प्रमुख हितधारकों को उत्तरदायित्व सौंपता है।
  • आपदा प्रबंधन एकीकरण: तटीय राज्य सरकारों के लिए टार-बॉल प्रदूषण को “राज्य आपदा” के रूप में वर्गीकृत करना और स्थापित आपदा प्रबंधन प्रणालियों के माध्यम से कार्रवाई करना आवश्यक है।
  • विकेंद्रीकृत कार्यान्वयन: जिला प्रशासनों को टार-बॉल्स के संग्रहण, परिवहन और स्थानीय प्रबंधन सहित परिचालन संबंधी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
  • प्रौद्योगिकी-संचालित निगरानी: ये नियम तेल रिसाव का पता लगाने और उनकी ट्रैकिंग के लिए हवाई निगरानी, उपग्रह निगरानी और समुद्र के भीतर की प्रणालियों  जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग पर बल देते हैं।
  • संसाधन प्राप्ति और निपटान: पर्याप्त ऊष्मीय मान वाले टार-बॉल का उपयोग पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और नियामक अनुमोदनों के अधीन, सीमेंट उद्योगों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है।

नियमों का महत्व

  • नियामक अंतराल को पाटना: ये नियम टार-बॉल प्रबंधन हेतु भारत का पहला समर्पित ढांचा प्रदान करते हैं, जो समुद्री प्रदूषण विनियमन में उस दीर्घकालिक कमी को दूर करते हैं जिसे मौजूदा कानूनों के तहत पूर्णतः कवर नहीं किया गया था।
  • तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण: ये नियम समुद्री जैव विविधता, मैंग्रोव, प्रवाल (कोरल) पारिस्थितिकी तंत्र और तटों को तेल अवशेषों के हानिकारक प्रभावों से सुरक्षित रखने में योगदान देते हैं।
  • नीली अर्थव्यवस्था को समर्थन: प्रदूषण के जोखिमों को कम करके, यह ढांचा पर्यटन, मत्स्य पालन और तटीय आजीविका की रक्षा करने में सहायता करता है, जो स्वच्छ समुद्री वातावरण पर अत्यधिक निर्भर हैं।
  • बेहतर आपदा तैयारी: आपदा प्रबंधन प्रणालियों के साथ एकीकरण टार-बॉल की घटनाओं और तेल से संबंधित प्रदूषण के प्रति तीव्र और अधिक समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र सुनिश्चित करता है।
  • प्रौद्योगिकी-संचालित शासन को प्रोत्साहन: उपग्रह निगरानी, हवाई सर्वेक्षण और अन्य उन्नत उपकरणों पर बल देने से शीघ्र पता लगाने, ट्रैकिंग और शमन की दक्षता बढ़ती है।
  • जवाबदेही सुनिश्चित करना: “प्रदूषणकर्ता भुगतान सिद्धांत” का अनुप्रयोग पर्यावरणीय जवाबदेही को सुदृढ़ करता है और प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं द्वारा की जाने वाली लापरवाही को रोकता है।
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