संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
संदर्भ: हाल ही में, पर्यावरण मंत्रालय ने ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य नियम, 2025 में संशोधन किया। संशोधन का लक्ष्य भारत की ‘नेट-जीरो’ महत्वाकांक्षाओं की प्राप्ति के लिए चार अतिरिक्त क्षेत्रों को इन नियमों के दायरे में लाना है।
अन्य संबंधित जानकारी
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य नियम, 2025 को 8 अक्टूबर, 2025 को अधिसूचित किया गया था, जिसके तहत एल्युमीनियम, सीमेंट, लुगदी एवं कागज और क्लोर-क्षार (chlor-alkali) क्षेत्रों की औद्योगिक इकाइयों के लिए 2023-24 के आधार स्तर से प्रति इकाई उत्पादन (उत्सर्जन तीव्रता) पर अपनी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना आवश्यक था।
- चार नए जोड़े गए क्षेत्र पेट्रोलियम रिफाइनरीज, पेट्रोकेमिकल्स, टेक्सटाइल्स (वस्त्र) और द्वितीयक एल्युमीनियम हैं। पहले से ही अधिसूचित क्षेत्रों में एल्युमीनियम, सीमेंट, क्लोर-क्षार और लुगदी एवं कागज शामिल हैं। इस प्रकार अब कुल आठ अत्यधिक कार्बन-गहन उद्योग एक अनिवार्य उत्सर्जन कटौती व्यवस्था के अंतर्गत आ गए हैं।
- इन नियमों को कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना, 2023 के अनुपालन तंत्र के तहत अधिसूचित किया गया है।
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य (संशोधन) नियम, 2025 के बारे में

- कवरेज का विस्तार: देश की GHG उत्सर्जन तीव्रता कटौती व्यवस्था में शामिल होने के बाद अब पेट्रोलियम रिफाइनरीज, पेट्रोकेमिकल्स, टेक्सटाइल्स और द्वितीयक एल्युमीनियम को एक निर्धारित मात्रा में अपना उत्सर्जन कम करना होगा है।
- प्रभावित औद्योगिक इकाइयों की सूची: नए मानदंडों के अनुसार, देशभर में फैली 208 औद्योगिक इकाइयों के लिए 2025-26 से प्रति इकाई उत्पाद (उत्सर्जन तीव्रता) पर GHG उत्सर्जन को कम करना अनिवार्य है। 4 क्षेत्रों में शामिल 208 औद्योगिक इकाइयां इस प्रकार हैं:
- कताई, प्रसंस्करण, फाइबर और कंपोजिट जैसे क्षेत्रों की 173 टेक्सटाइल इकाइयां।
- 21 पेट्रो रिफाइनरीज।
- 11 पेट्रोकेमिकल इकाइयां।
- 3 द्वितीयक एल्युमीनियम इकाइयां।
- पेट्रोलियम रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल्स क्षेत्रों के तहत भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और नुमालीगढ़ रिफाइनरीज तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े निजी क्षेत्र के समूहों को कवर किया गया है।
- उत्सर्जन कटौती लक्ष्य और समयसीमा: इन क्षेत्रों से 2023-24 के आधार स्तर की तुलना में 2026-27 तक 3-7% की सीमा में विशिष्ट कटौती लक्ष्य पूरा करने की अपेक्षा की गई है।
- गैर-अनुपालन के लिए मौद्रिक दंड: यदि कोई औद्योगिक इकाई लक्ष्यों का अनुपालन करने में विफल रहती है या अनुपालन में कमी के बराबर कार्बन क्रेडिट प्रमाण पत्र जमा करने में विफल रहती है, तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) उस कमी के लिए उस पर ‘पर्यावरणीय मुआवजा’ लगाएगा।
- यह दंड उस अनुपालन वर्ष के व्यापार चक्र के दौरान कार्बन क्रेडिट प्रमाण पत्र के औसत व्यापार मूल्य का दोगुना होगा।
- इसका भुगतान आधिकारिक आदेश की तिथि के 90 दिनों के भीतर करना होगा।
नियमों का महत्व
- भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं का समर्थन: ये नियम 2015 के पेरिस समझौते के तहत भारत की उस प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जिसमें देशों को 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की उत्सर्जन तीव्रता को 45% तक कम करना है।
- बाध्यकारी ढांचा: ये नियम कार्बन-गहन उद्योगों के लिए भारत के पहले कानूनी रूप से बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती लक्ष्य निर्धारित करते हैं।
- कार्बन बाजारों को बढ़ावा: निर्धारित उत्सर्जन सीमाओं से अधिक उत्सर्जन करने वाले उद्योगों को उन सत्यापित परियोजनाओं से कार्बन क्रेडिट खरीदना आवश्यक है जो उत्सर्जन में कटौती करती हैं, उससे बचती हैं या उसे हटाती हैं।
- यह स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और स्वैच्छिक कार्बन बाजार में निवेश को बढ़ावा देता है।
