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सामान्य अध्ययन 3: संरक्षण, पर्यावरणीय प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन।

संदर्भ: हाल ही में, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने सतत विकास लक्ष्य (SDG) निगरानी, पर्यावरण खातों और लिंग सांख्यिकी पर एक क्षमता निर्माण कार्यशाला के दौरान ‘ग्रह’ (Planet) और ‘समृद्धि’ (Prosperity) पर दो विषयगत SDG बुलेटिन जारी किए। 

अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

  • ये बुलेटिन— “प्लैनेट इन फोकस: SDGs के अंतर्गत पर्यावरणीय स्थिरता को आगे बढ़ाना” और “डिलीवरिंग प्रॉस्पेरिटी एट स्केल: SDGs के माध्यम से भारत का आर्थिक रूपांतरण”— 2030 सतत विकास एजेंडा के पाँच स्तंभों: लोग (People), ग्रह (Planet), समृद्धि (Prosperity), शांति (Peace) और साझेदारी (Partnerships) के अनुरूप एक नई विषयगत SDG बुलेटिन श्रृंखला का भाग हैं।
  • ये प्रमुख संकेतकों, नीतिगत पहलों और राष्ट्रीय उपलब्धियों को एकीकृत करके भारत की SDG प्रगति का एक संक्षिप्त, डेटा-संचालित अवलोकन प्रदान करते हैं।
  • ये रिपोर्ट ‘SDG राष्ट्रीय संकेतक ढांचा प्रगति रिपोर्ट 2025’ के नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित हैं, जो SDG की निगरानी के लिए भारत के प्राथमिक सांख्यिकीय ढांचे के रूप में कार्य करती है।
    • प्लैनेट (Planet) बुलेटिन: SDG 6, 12, 13, 14 और 15 पर केंद्रित है, जिसमें जल, जलवायु, जैव विविधता और संधारणीय उपभोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
    • प्रोस्पेरिटी (Prosperity) बुलेटिन: SDG 7, 8, 9, 10 और 11 पर केंद्रित है, जो समावेशी विकास, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और असमानता में कमी पर जोर देता है। 
  • इन बुलेटिनों का उद्देश्य भारत के SDG प्रदर्शन पर सुलभ और साक्ष्य-आधारित अंतर्दृष्टि के माध्यम से जागरूकता और नीतिगत समझ को बढ़ाना है।

मुख्य विशेषताएँ

ग्रह आयाम (पर्यावरणीय स्थिरता):
  • स्वच्छता और सामाजिक परिवर्तन: भारत के सभी जिलों में 100% खुले में शौच मुक्त (ODF) का दर्जा प्राप्त करना सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
    • इस परिवर्तन को 97.2% स्कूलों (2023-24) में लिंग-पृथक शौचालयों की उपलब्धता से पूरक किया गया है, जिसने विशेष रूप से लड़कियों के लिए गरिमा, सुरक्षा और शैक्षिक भागीदारी में सुधार किया है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन और चक्रीय अर्थव्यवस्था संक्रमण: भारत ने अपने अपशिष्ट प्रबंधन पारिस्थितिकी तंत्र को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया है, जिसमें पुनर्चक्रण (recycling) बुनियादी ढांचा 2019-20 के 829 केंद्रों से बढ़कर 2024-25 में 3,036 केंद्रों तक पहुँच गया है।
    • घर-घर कचरा संग्रहण का कवरेज बढ़कर 97.7% हो गया है, जो वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण, चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं और लैंडफिल पर निर्भरता में कमी की ओर एक प्रणालीगत बदलाव का संकेत देता है।
  • जलवायु कार्रवाई और आपदा लचीलापन: भारत ने सेंडाई फ्रेमवर्क (2015-2030) के अनुरूप आपदा तैयारी में उल्लेखनीय प्रगति की है।
    • बड़ी संख्या में स्थानीय सरकारों ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों को अपनाया है, जिन्हें उन्नत प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, जलवायु पूर्वानुमान उपकरणों और सामुदायिक स्तर की तैयारी पहलों का समर्थन प्राप्त है।
  • पर्यावरण शासन और नीतिगत ढांचा: एक मजबूत विधायी और संस्थागत ढांचा—जिसमें पर्यावरण संरक्षण अधिनियम जैसे कानून और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) जैसे राष्ट्रीय मिशन शामिल हैं—ने भारत के पर्यावरण शासन को मजबूत किया है।
    • यह एकीकृत दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि स्थिरता (sustainability) सभी क्षेत्रों और नीतियों में अंतर्निहित हो।
  • वैश्विक नेतृत्व और स्थिरता प्रतिबद्धताएँ: पेरिस समझौते, UNCCD और जैव विविधता सम्मेलनों के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के माध्यम से भारत पर्यावरणीय शासन में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी के रूप में उभरा है।
    • LiFE (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरमेंट) जैसी पहल राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर संधारणीय जीवन शैली को बढ़ावा देने के भारत के प्रयासों को प्रदर्शित करती है।

समृद्धि आयाम (आर्थिक परिवर्तन):

  • ऊर्जा संक्रमण और निम्न-कार्बन विकास: भारत का स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण तेज हुआ है, और देश वैश्विक स्तर पर चौथा सबसे बड़ा पवन ऊर्जा उत्पादक बन गया है।
    • अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी 16.02% (2015-16) से बढ़कर 22.13% (2024-25) हो गई है, जबकि बिजली क्षेत्र की कार्बन तीव्रता में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। 100% घरेलू विद्युतीकरण की उपलब्धि समावेशी ऊर्जा पहुंच के तेजी से विस्तार को दर्शाती है।
  • रोजगार, कौशल और समावेशी विकास: आर्थिक विकास को रोजगार सृजन, कौशल विकास और उद्यमिता पर मजबूत ध्यान देकर समर्थन दिया गया है। स्किल इंडिया, मुद्रा (MUDRA) और स्टार्ट-अप इंडिया जैसी पहलों ने आजीविका को मजबूत किया है, जबकि मनरेगा (MGNREGA) जैसे कार्यक्रमों ने आय सुरक्षा सुनिश्चित की है और ग्रामीण संवेदनशीलता को कम किया है।
  • बुनियादी ढांचा, डिजिटल कनेक्टिविटी और नवाचार: भारत ने बुनियादी ढांचे के विकास, विशेष रूप से डिजिटल कनेक्टिविटी में पर्याप्त प्रगति की है, जिसमें मोबाइल नेटवर्क के तहत 99% से अधिक जनसंख्या कवर है।
    • भारतनेट और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने डिजिटल सेवाओं तक व्यापक पहुंच को सक्षम बनाया है, जिससे नवाचार, वित्तीय समावेशन और बेहतर सेवा वितरण को बढ़ावा मिला है।
  • शहरी विकास और क्षेत्रीय विकास चालक:स्मार्ट सिटी मिशन और अमृत (AMRUT) जैसी शहरी परिवर्तन पहलों ने शहरों में रहने की सुगमता, बुनियादी ढांचे और शासन को बढ़ाया है।
    • इसके अतिरिक्त, पर्यटन जैसे क्षेत्र आर्थिक विकास के प्रमुख चालकों के रूप में उभरे हैं, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP), रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
  • डिजिटल समावेशन और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव: डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार ने सभी क्षेत्रों में परिवर्तनकारी बदलावों को सक्षम किया है, जिसमें UPI के माध्यम से वित्तीय समावेशन, आधार-आधारित प्रणालियों के माध्यम से कुशल शासन, टेलीमेडिसिन के माध्यम से बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंच और ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से विस्तारित शैक्षिक अवसर शामिल हैं।
  • असमानता में कमी और सामाजिक संरक्षण: भारत ने 2011-12 और 2023-24 के बीच घरेलू उपभोग असमानता में गिरावट दर्ज की है, जो लक्षित सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, वित्तीय समावेशन पहलों और समावेशी विकास नीतियों के प्रभाव को दर्शाता है।
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