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सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए एवं हस्तक्षेप तथा उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खेल सामग्री क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए वित्त वर्ष 2026–27 से 2033–34 तक ₹1,856.67 करोड़ के परिव्यय वाली खेलो इंडिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना को मंजूरी दी।

खेलो इंडिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना के बारे में

  • उद्देश्य: निवेश, प्रौद्योगिकी अपनाने, अनुसंधान, कौशल विकास और निर्यात को बढ़ावा देकर भारत को उच्च गुणवत्ता वाली खेल सामग्री के डिजाइन, विकास और विनिर्माण के लिए विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में विकसित करना।
  • वित्तीय परिव्यय: इस योजना का वित्त वर्ष 2026–27 से 2033–34 तक कुल परिव्यय ₹1,856.67 करोड़ है। इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026–27 में की गई थी।
  • खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्र (SGMZs): इन विशेष विनिर्माण क्षेत्रों में विनिर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण सुविधाओं, डिजाइन एवं प्रोटोटाइप केंद्रों तथा सहायक उद्यमों को एक साथ लाया जाएगा।
    • इन क्षेत्रों का विकास भव्य योजना (BHAVYA Scheme) और राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के औद्योगिक पार्कों के साथ समन्वय के माध्यम से किया जाएगा।
    • विस्तृत प्रस्ताव में चार एकीकृत विनिर्माण क्षेत्रों की परिकल्पना की गई है, जिनमें से प्रत्येक का क्षेत्रफल 300 एकड़ से अधिक होगा।
  • निवेश और उत्पादन सहायता: दो घटकों के लिए कुल ₹1,130 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है:

1. प्रमुख निवेशक सहायता: निर्धारित विनिर्माण क्षेत्रों में कम-से-कम ₹100 करोड़ का निवेश करने वाले प्रमुख निवेशकों को पूंजीगत व्यय पर 20% सहायता प्रदान की जाएगी।

2. कारोबार-आधारित सहायता: ₹10 करोड़ या उससे अधिक का निवेश करने वाले पात्र विनिर्माताओं को 15% तक प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे उत्पादन में वृद्धि और विनिर्माण क्षमता के विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) तथा क्लस्टर विकास: मौजूदा खेल सामग्री विनिर्माण क्लस्टरों को साझा सुविधाओं और सामान्य अवसंरचना के उन्नयन के लिए सहायता दी जाएगी। इसके लिए राज्यों के साथ लागत साझा की जाएगी, जिससे छोटे उद्यम अपनी विनिर्माण क्षमताओं में सुधार कर सकेंगे।
  • अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन: अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन प्राप्त करने और उसका नवीनीकरण कराने में विनिर्माताओं की सहायता के लिए ₹105 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
    • पहली बार प्रमाणन प्राप्त करने की लागत का 70% और नवीनीकरण की लागत का 50% वहन करने के लिए सहायता दी जाएगी।
  • अनुसंधान एवं नवाचार: प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जो खेल उपकरणों, पदार्थ विज्ञान, सुरक्षात्मक उपकरणों और उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देंगे।
    • अनुसंधान गतिविधियों को अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के साथ समन्वय के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा।
  • स्टार्टअप सहायता: उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) में पंजीकृत खेल स्टार्टअप नई प्रौद्योगिकियों, उत्पादों और विनिर्माण प्रक्रियाओं के विकास, परीक्षण, सत्यापन तथा व्यावसायीकरण में सहायता के लिए ₹20 लाख तक के अनुदान प्राप्त करने के पात्र होंगे।
  • कौशल विकास: क्षेत्र की बदलती कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय और उद्योग जगत के हितधारकों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।
  • निर्यात संवर्धन: निर्यात संवर्धन मिशन का लाभ उठाते हुए इंडिया स्पोर्ट्स एक्सपो, ब्रांड इंडिया अभियान और अन्य बाजार-विकास पहलों के माध्यम से भारतीय खेल सामग्री को बढ़ावा दिया जाएगा तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच का विस्तार किया जाएगा।

योजना की आवश्यकता एवं महत्त्व

  • घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना: खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्रों और उत्पादन प्रोत्साहनों से विनिर्माण क्षमता का विस्तार होगा, आपूर्तिकर्ता नेटवर्क मजबूत होंगे और घरेलू मूल्य संवर्धन में सुधार होगा।
  • आयात पर निर्भरता कम करना: घरेलू उत्पादन में वृद्धि से आयातित खेल सामग्री पर निर्भरता कम होगी और भारत की आपूर्ति शृंखला की आघात-सहनीयता मजबूत होगी।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) तथा रोजगार को बढ़ावा देना: खेल सामग्री का लगभग 90% उत्पादन छोटे और सूक्ष्म उद्यमों द्वारा किया जाता है। विनिर्माण क्लस्टरों और साझा सुविधाओं के उन्नयन से उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा तथा रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
  • गुणवत्ता एवं नवाचार में सुधार: अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन, उत्कृष्टता केंद्र, अनुसंधान सहयोग और ₹20 लाख तक के स्टार्टअप अनुदान से गुणवत्ता मानकों, उन्नत प्रौद्योगिकियों और नवोन्मेषी खेल उपकरणों को बढ़ावा मिलेगा।
  • निर्यात एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का विस्तार: ब्रांडिंग, इंडिया स्पोर्ट्स एक्सपो और निर्यात संवर्धन पहलों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच मजबूत होगी तथा भारत को खेल सामग्री के वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने में सहायता मिलेगी।
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