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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र / सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; कार्यपालिका और न्यायपालिका के कार्य।
संदर्भ: हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को कोविड-19 वैक्सीन से संबंधित समस्याओं और होने वाली मौतों के मुद्दे से निपटने के लिए एक “नो-फॉल्ट” मुआवजा नीति तैयार करने का निर्देश दिया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- यह निर्देश स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को ‘टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभावों’ (AEFI) के कारण होने वाली मौतों के लिए मुआवजा माँगने वाली याचिकाओं के जवाब में जारी किया गया था।
- न्यायालय ने पाया कि भारत में वर्तमान में उन व्यक्तियों को मुआवजा देने के लिए कोई एकसमान और व्यवस्थित तंत्र मौजूद नहीं है, जो टीकाकरण के बाद के गंभीर प्रतिकूल प्रभावों से निपट सके।
- न्यायालय ने उल्लेख किया कि टीकाकरण कार्यक्रम राज्य द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के रूप में चलाए जाते हैं; इसलिए, निवारण और मुआवजे के तंत्र होने आवश्यक हैं।
सर्वोच्च न्यायालय का अवलोकन
- न्यायालय ने कहा कि ‘नो-फॉल्ट’ वैक्सीन मुआवजा योजनाएँ कई देशों में कल्याणकारी राज्य की अनुक्रियाओं की एक मान्य विशेषता हैं।
- न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘नो-फॉल्ट’ उत्तरदायित्व का सिद्धांत पीड़ितों को जिम्मेदारी या लापरवाही की लंबी जाँच के बिना त्वरित मुआवजा प्रदान करने की अनुमति देता है।
- यह निर्णय अनुच्छेद 21 पर आधारित था, जो यह पुष्टि करता है कि जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य का अधिकार भी सम्मिलित है; न्यायालय ने यह भी माना कि राज्य-नागरिक संबंध केवल दोष-आधारित उत्तरदायित्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संवैधानिक सिद्धांतों के तहत राज्य को कल्याण, गरिमा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के सक्रिय संरक्षक के रूप में कार्य करने की भी आवश्यकता है।
टीकाकरण के बाद हुई घटनाओं पर आँकड़ें
- सरकारी आँकड़े दर्शाते हैं कि नवंबर 2022 तक भारत में COVID-19 टीकों की लगभग 219.86 करोड़ खुराक दी गई थीं।
- दर्ज किए गए प्रतिकूल प्रभावों (AEFI) के मामलों की कुल संख्या 92,114 थी, जो कुल टीकाकरण का लगभग 0.0042% है।
- दर्ज किए गए अधिकांश मामले, लगभग 89,332 (0.0041%), ‘गौण प्रतिकूल प्रभाव’ की श्रेणी में थे।
- गंभीर और अति-गंभीर प्रतिकूल प्रभावों की संख्या 2,782 थी, जो कुल टीकाकरण का लगभग 0.00013% है।
- टीकाकरण के पश्चात प्रतिकूल प्रभावों (AEFI) से होने वाली मौतों की कुल संख्या 1,171 दर्ज की गई थी।
निर्णय का महत्व
- स्वास्थ्य के अधिकार को महत्व देना: यह निर्णय इस बात की पुष्टि करते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 की व्याख्या को बल प्रदान करता है कि जीवन के अधिकार में स्वास्थ्य का अधिकार और वैक्सीन से संबंधित नुकसान से सुरक्षा का अधिकार सम्मिलित है।
- कल्याणकारी राज्य के उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना: यह इस बात पर जोर देता है कि जब राज्य टीकाकरण जैसे बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाता है, तो उसे दुर्लभ प्रतिकूल परिणामों के लिए उचित मुआवजा तंत्र भी सुनिश्चित करना चाहिए।
- संस्थागत सुधारों को प्रोत्साहन: ‘नो-फॉल्ट’ मुआवजा नीति बनाने का निर्देश वैक्सीन से होने वाली क्षति के लिए एक व्यवस्थित राष्ट्रीय ढांचे की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर सकता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य शासन में सुधार होगा।
- टीकाकरण पर जनता का विश्वास बनाए रखना: एक पारदर्शी और पूर्वानुमेय मुआवजा तंत्र टीकाकरण कार्यक्रमों और भविष्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों में जनता के विश्वास को बढ़ा सकता है।
भारत कीकोविड-19 टीकाकरण ड्राइव
- 4 मार्च 2023 तक के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के आँकड़े दर्शाते हैं कि भारत की कुल जनसंख्या के लगभग 74% हिस्से को COVID-19 वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी थी और लगभग 69% पूर्ण रूप से टीकाकरण प्राप्त कर चुके थे, जिसमें 12 वर्ष से अधिक आयु की पात्र जनसंख्या के बीच कवरेज काफी अधिक थी।
- भारत ने स्थानीय रूप से विकसित टीकों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाइसेंस प्राप्त विकल्पों तक विभिन्न प्रकार के टीकों को अधिकृत किया है:
- कोविशील्ड (ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका): भारत में सर्वाधिक उपयोग किए जाने वाले इस टीके का विनिर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किया गया है। इसमें गैर-प्रतिकृति वायरल वेक्टर’ तकनीक का उपयोग होता है और यह आमतौर पर दो खुराकों में दिया जाता है।
- कोवैक्सिन: भारत का पहला स्वदेशी टीका, जिसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के सहयोग से भारत बायोटेक द्वारा विकसित किया गया है। यह एक ‘इनएक्टिवेटेड वायरस’ टीका है, जो 28 दिनों के अंतराल पर दो खुराकों में दिया जाता है।
- स्पुतनिक V: रूस द्वारा विकसित एक ‘वायरल वेक्टर’ टीका, जिसका भारत में लाइसेंस के तहत विनिर्माण किया गया है। यह अपनी दो खुराकों के लिए दो अलग-अलग ‘एडेनोवायरस वेक्टर’ का उपयोग करता है।
- कोर्बेवैक्स: बायोलॉजिकल ई. लिमिटेड द्वारा विकसित एक ‘प्रोटीन सबयूनिट’ टीका। इसका मुख्य रूप से 12-14 वर्ष के बच्चों के लिए उपयोग किया गया और बाद में कुछ मामलों में बूस्टर खुराक के रूप में अनुमोदित किया गया।
- iNCOVACC: भारत बायोटेक द्वारा विकसित विश्व का पहला इंट्रानेजल (नाक से दिया जाने वाला) कोविड-19 टीका। इसे सुई-मुक्त बूस्टर के रूप में दिया किया जाता है।
Source :
The Hindu
Times of India
