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सामान्य अध्ययन-1: विश्व भर के मुख्य प्राकृतिक संसाधनों का वितरण (दक्षिण एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप को शामिल करते हुए); विश्व (भारत सहित) के विभिन्न भागों में प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र के उद्योगों को स्थापित करने के लिए ज़िम्मेदार कारक।
संदर्भ: हाल ही में, भारत सरकार ने आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू इस्पात आपूर्ति श्रृंखला के सुदृढ़ीकरण के उद्देश्य से खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कोकिंग कोल को महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया।
अन्य संबंधित जानकारी

• यह निर्णय ‘विकसित भारत’ लक्ष्यों के कार्यान्वयन पर गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों और नीति आयोग के नीतिगत सुझावों के आधार पर लिया गया था क्योंकि समिति ने खनिज सुरक्षा और इस्पात क्षेत्र के लिए कोकिंग कोल के रणनीतिक महत्व को स्वीकार किया।
• MMDR अधिनियम की प्रथम अनुसूची में संशोधन किया गया है:
- भाग A में, “कोयला” (Coal) शब्द को अब “कोयला, कोकिंग कोल सहित” पढ़ा जाएगा।
- कोकिंग कोल को भाग D में शामिल किया गया है, जिसमें महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज सूचीबद्ध हैं।
इस कदम का महत्व
- भारत के पास लगभग 37.37 बिलियन टन कोकिंग कोल संसाधन हैं, फिर भी इस्पात क्षेत्र की लगभग 95% आवश्यकताओं की पूर्ति आयात के माध्यम से की जाती है।
- आयात 2020-21 में 51.20 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 57.58 मिलियन टन हो गया, जिससे विदेशी मुद्रा का बहिर्गमन हुआ।
- नए वर्गीकरण से गहराई में मौजूद निक्षेपों सहित अन्वेषण और खनन की शीघ्र स्वीकृति मिलने और व्यापार सुगमता में सुधार होने की अपेक्षा है।
- महत्वपूर्ण खनिजों के खनन को सार्वजनिक परामर्श की शर्तों से छूट दी गई है और प्रतिपूरक वनीकरण के लिए क्षरित वन भूमि के उपयोग की अनुमति दी गई है, जो निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
- इस सुधार से अन्वेषण, सज्जीकरण (Beneficiation) और उन्नत खनन प्रौद्योगिकियों में निजी निवेश के आकर्षित होने की प्रबल संभावना है, साथ ही यह इस्पात क्षेत्र के लिए आपूर्ति श्रृंखला के लचीलेपन को मजबूत करेगा और राष्ट्रीय इस्पात नीति के उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता करेगा।
- MMDR अधिनियम की धारा 11D(3) के अनुसार, खनन पट्टों से प्राप्त रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम और अन्य वैधानिक भुगतान संबंधित राज्य सरकारों को प्राप्त होते रहेंगे।
महत्वपूर्ण खनिजों के बारे में
- महत्वपूर्ण खनिज वे खनिज हैं जो किसी राष्ट्र के आर्थिक विकास, तकनीकी उन्नति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान आने की संभावना बनी रहती हैं।
- महत्वपूर्णता (Criticality) शब्द का तात्पर्य किसी खनिज के उच्च आर्थिक मूल्य और उसकी आपूर्ति में संभावित बाधाओं के दोहरे जोखिम से है। यह जोखिम मुख्य रूप से आयात पर अत्यधिक निर्भरता, भू-राजनीतिक अस्थिरता और सीमित घरेलू संसाधनों जैसे कारकों से उत्पन्न होता है।
- भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की सूची (2023): 2023 में, खान मंत्रालय ने रणनीतिक प्रासंगिकता और आपूर्ति जोखिम के आधार पर चिन्हित 30 महत्वपूर्ण खनिजों की भारत की पहली आधिकारिक सूची जारी की।
भारत के अधिसूचित महत्वपूर्ण खनिज (2023)
- एंटीमनी, बेरिलियम, बिस्मथ, कैडमियम, कोबाल्ट, तांबा (कॉपर), गैलियम, जर्मेनियम, ग्रेफाइट, हाफनियम, इंडियम, लिथियम, मॉंलिब्डेनम, नियोबियम, निकेल, फास्फोरस, पोटाश, रेनियम, सेलेनियम, सिलिकॉन, स्ट्रोंटियम, टैंटलम, टेल्यूरियम, टिन, टाइटेनियम, टंगस्टन, वैनेडियम, जिरकोनियम, प्लैटिनम समूह तत्व (PGE) और दुर्लभ मृदा तत्व (REE)।
- प्लैटिनम समूह तत्व (PGE): प्लैटिनम (Pt), पैलेडियम (Pd), रोडियम (Rh), रूथेनियम (Ru), ऑस्मियम (Os) और इरिडियम (Ir)।
- दुर्लभ मृदा तत्व (REE): 17 तत्वों का एक समूह—लैंथेनम, सेरियम, प्रेजोडायमियम, नियोडायमियम, प्रोमेथियम, समेरियम, यूरोपियम, गडोलीनियम, टर्बियम, डिस्प्रोसियम, होल्मियम, एर्बियम, थुलियम, येटर्बियम, ल्यूटिटियम, स्कैंडियम और येट्रियम।
- अनुप्रयोग: महत्वपूर्ण खनिज उन्नत और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए अपरिहार्य हैं, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली (सौर पैनल और पवन टरबाइन), इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल फोन, सेमीकंडक्टर, फाइबर-ऑप्टिक केबल) के साथ ही रक्षा, एयरोस्पेस और चिकित्सा प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
रणनीतिक खनिज
- रणनीतिक खनिज उन अनिवार्य कच्चे मालों को संदर्भित करते हैं जो राष्ट्र की सुरक्षा, आर्थिक सुदृढ़ता और तकनीकी संप्रभुता के आधार स्तंभ हैं। इनकी महत्ता उस स्थिति में और बढ़ जाती है जहाँ आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी प्रकार का व्यवधान गंभीर राष्ट्रीय और सामरिक संकट का कारण बन सकता है।
- कानूनी मान्यता (2023): खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2023 ने औपचारिक रूप से प्रथम अनुसूची के भाग D का प्रावधान किया, जिसका शीर्षक “महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज” है, जो प्राथमिकता वाले अन्वेषण, विनियमन और नीतिगत समर्थन के लिए एक वैधानिक आधार प्रदान करता है।
- ‘महत्वपूर्ण’ खनिजों के साथ संबंध: हालांकि इन्हें अक्सर एक-दूसरे के स्थान पर उपयोग किया जाता है, रणनीतिक खनिज रक्षा और सुरक्षा के महत्व पर बल देते हैं, जबकि महत्वपूर्ण खनिज आर्थिक और तकनीकी सुभेद्यता पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं और दोनों में आपस में काफी समानता होती है।
Source
PIB
Economictimes
