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सामान्य अध्ययन–3: विभिन्न सुरक्षा बल एवं एजेंसियाँ तथा उनके अधिदेश; सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन।
संदर्भ: हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अग्निपथ योजना के अंतर्गत एक संशोधित रूपरेखा को मंजूरी दी है। इसके तहत प्रारंभिक चार वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने के बाद नियमित भर्ती के लिए चयनित नहीं होने वाले अग्निवीरों को अतिरिक्त दो वर्ष तक सेवा करने तथा नियमित सेवा में शामिल होने का एक और अवसर प्रदान किया जाएगा।
अन्य संबंधित जानकारी
- पहले बैच की सेवा अवधि पूर्ण होने के करीब: यह निर्णय पहले बैच की चार वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने से पहले लिया गया है। लगभग 18,300 अग्निवीर दिसंबर 2026 में अपनी प्रारंभिक सेवा अवधि पूरी करने की उम्मीद है।
- प्रदर्शन का आकलन: यह निर्णय रक्षा सेवाओं द्वारा किए गए चार वर्षीय आकलन के बाद लिया गया है। इस आकलन में अग्निवीरों के कौशल, शारीरिक फिटनेस, प्रेरणा, मनोबल और तकनीकी अनुकूलन क्षमता के संबंध में सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई।
- तीनों सेनाओं की सिफारिशें: आकलन और संगठनात्मक आवश्यकताओं के आधार पर तीनों सेनाओं ने सेवा अवधि में अतिरिक्त विस्तार की सिफारिश की।
अग्निपथ योजना के बारे में
- शुभारंभ: इस योजना की शुरुआत 14 जून 2022 को की गई थी। इसके अंतर्गत भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में अधिकारी रैंक से नीचे के पदों पर अग्निवीरों के रूप में कार्मिकों की भर्ती का प्रावधान है।
- उद्देश्य: युवा, अधिक फिट और तकनीकी रूप से अधिक सक्षम सशस्त्र बलों का निर्माण करना तथा युवाओं को सैन्य कौशल एवं अनुशासन प्रदान करना।
- पात्रता: निर्धारित शैक्षणिक, शारीरिक और चिकित्सा मानकों के अधीन मूल आयु सीमा 17.5–21 वर्ष निर्धारित की गई है। वर्ष 2022 के भर्ती चक्र के लिए अधिकतम आयु सीमा में छूट देकर इसे 23 वर्ष कर दिया गया था।
- सेवा अवधि: अग्निवीरों को संबंधित सेवा अधिनियमों के अंतर्गत प्रशिक्षण सहित चार वर्ष की अवधि के लिए नामांकित किया जाता है तथा उन्हें सशस्त्र बलों में एक अलग रैंक प्रदान की जाती है।
- नियमित भर्ती: प्रत्येक बैच के अधिकतम 25% अग्निवीरों का चयन योग्यता, प्रदर्शन और संगठनात्मक आवश्यकताओं के आधार पर नियमित भर्ती के लिए किया जा सकता है। चयनित अग्निवीर लागू नियमित सेवा शर्तों के अंतर्गत न्यूनतम 15 वर्ष की अतिरिक्त सेवा करते हैं।
- वेतन एवं सेवा निधि: मासिक वेतन पैकेज पहले वर्ष में ₹30,000 से लेकर चौथे वर्ष में ₹40,000 तक होता है। अग्निवीर अपने मासिक वेतन पैकेज का 30% हिस्सा सेवा निधि कोष में योगदान करते हैं, जिसमें सरकार भी इतनी ही राशि का योगदान करती है।
- सेवा समाप्ति पर मिलने वाले लाभ: चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को अर्जित ब्याज सहित लगभग ₹11.71 लाख का सेवा निधि पैकेज प्रदान किया जाता है। उन्हें सेवा अवधि के दौरान ₹48 लाख का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर भी दिया जाता है। चार वर्ष बाद सेवा से मुक्त होने वाले अग्निवीर पेंशन या ग्रेच्युटी के पात्र नहीं होते हैं।
संशोधित फ्रेमवर्क के अंतर्गत प्रमुख बदलाव
- चार वर्ष बाद 25% अग्निवीरों को बनाए रखना: प्रत्येक बैच के अधिकतम 25% अग्निवीरों का योग्यता के आधार पर नियमित भर्ती के लिए चयन करने का मौजूदा प्रावधान बिना किसी बदलाव के जारी रहेगा।
- शेष 75% अग्निवीरों के लिए दूसरी सेवा अवधि: पहले चरण में चयनित नहीं होने वाले अग्निवीरों को उनकी इच्छा और रक्षा सेवाओं की सिफारिशों के अधीन अतिरिक्त दो वर्ष की सेवा अवधि प्रदान की जाएगी।
- नियमित भर्ती का एक और अवसर: कुल छह वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद शेष अग्निवीरों को उनकी इच्छा और निर्धारित चयन मानदंडों को पूरा करने की शर्त पर नियमित सैनिकों के रूप में भर्ती होने का अवसर दिया जाएगा।
- दूसरी सेवा अवधि के दौरान बढ़े हुए लाभ:
- अधिक पारिश्रमिक: मासिक पारिश्रमिक पाँचवें वर्ष में बढ़कर ₹43,500 और छठे वर्ष में ₹47,500 हो जाएगा।
- बढ़ी हुई सेवा निधि: अतिरिक्त सेवा अवधि पूरी करने और सेवा से बाहर होने का विकल्प चुनने वाले अग्निवीरों के लिए सरकार का योगदान उनके अंशदान के 70% तक बढ़ जाएगा।
- वरिष्ठता संबंधी लाभ: अतिरिक्त सेवा अवधि के साथ संचयी वरिष्ठता संबंधी लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। वरिष्ठता और करियर में प्रगति को नियंत्रित करने वाले सेवा-वार विस्तृत नियम इस व्यवस्था के कार्यान्वयन में महत्त्वपूर्ण होंगे।
- अग्निपथ योजना की निरंतरता: मूल चार वर्षीय भर्ती व्यवस्था जारी रहेगी। इस सुधार के अंतर्गत योजना को प्रतिस्थापित करने के बजाय दूसरी सेवा अवधि और नियमित भर्ती का एक अतिरिक्त अवसर जोड़ा गया है।
रक्षा जनशक्ति एवं सैन्य बल प्रबंधन के लिए निहितार्थ
- सेवा अवधि से सेनाओं को प्रशिक्षित कार्मिकों को बनाए रखने तथा उनके अर्जित कौशल और अनुभव का लाभ उठाने में मदद मिल सकती है। यह विशेष रूप से तकनीकी रूप से विशिष्ट भूमिकाओं में महत्त्वपूर्ण होगा।
- युवाओं और अनुभवी कार्मिकों के बीच संतुलन: यह सुधार युवा भर्ती की व्यवस्था को बनाए रखते हुए सेनाओं को अनुभवी कार्मिकों को अधिक समय तक सेवा में बनाए रखने की अनुमति देता है। इससे अपेक्षाकृत कम सेवा अवधि के बाद प्रशिक्षित जनशक्ति को खोने संबंधी चिंताओं का समाधान करने में मदद मिलेगी।
- अधिक लचीली चयन प्रक्रिया: दो-चरणीय व्यवस्था नियमित भर्ती से पहले अग्निवीर के प्रदर्शन और उपयुक्तता का आकलन करने का एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करती है। इससे चार वर्ष की अवधि को चयन का एकमात्र चरण बनाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
- सैन्य इकाइयों में निरंतरता: लंबी सेवा अवधि से संस्थागत ज्ञान, तकनीकी दक्षता और टीम के बीच समन्वय बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यह विशेष रूप से उन भूमिकाओं में महत्त्वपूर्ण है, जिनमें निरंतर प्रशिक्षण और परिचालन अनुभव की आवश्यकता होती है।
