संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने राज्यों से किसान पहचान पत्र बनाने के कार्य में तीव्रता लाने के लिए कहा है।
अन्य संबंधित जानकारी
किसान आईडी आधार से जुड़ी अद्वितीय डिजिटल पहचान है जो राज्य के भूमि अभिलेख से जुड़ी हुई है।
- आधार एक 12 अंकों की व्यक्तिगत पहचान संख्या है जो भारत के नागरिकों के लिए पहचान तथा निवास के प्रमाण के रूप में कार्य करती है।
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने राज्यों को तेजी से किसान पंजीकरण हेतु शिविर-प्रणाली दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है।
किसान आईडी ‘किसान पंजीकरण’ का मूल आधार होगा, जो ‘एग्री स्टैक’ पहल के तहत तीन पंजीकरणों में से एक है और केंद्र सरकार के डिजिटल कृषि मिशन का भाग है।
- डिजिटल कृषि मिशन को विभिन्न डिजिटल कृषि पहलों की सहायता करने हेतु एक मुख्य योजना के रूप में तैयार किया गया है।
- एग्रीस्टैक एक किसान केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) है जो किसानों को कुशल, आसान, तीव्र सेवाओं और योजना वितरण को सक्षम करेगा।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति ने 2817 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ डिजिटल कृषि मिशन को मंजूरी दे दी है, जिसमें 1940 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा भी शामिल है।
सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 तक 11 करोड़ किसानों के लिए डिजिटल पहचान बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
केंद्र सरकार क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित प्रत्येक शिविर के लिए 15,000 रुपये तक की धनराशि उपलब्ध कराएगी, साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के माध्यम से तैयार प्रत्येक किसान आईडी पर 10 रुपये की अतिरिक्त धनराशि भी उपलब्ध करायी जाएगी।
यह डिजिटल आईडी सरकार को उनके बारे में विभिन्न प्रकार की जानकारी प्रदान करेगी, जैसे:
- किसान के स्वामित्व वाली भूमि की मात्रा।
- पशुधन की संख्या।
- फसलों के प्रकार
वित्त मंत्रालय ने पूंजीगत निवेश 2024-25 हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत किसानों का पंजीकरण करने हेतु राज्यों को प्रोत्साहन के रूप में 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।
किसान आईडी के प्रमुख लाभ यह किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, जैसे- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और किसान क्रेडिट कार्ड कार्यक्रम आदि तक पहुंचने में मदद करेगा।
यह किसान के लिए बाधा मुक्त, समय बचाने वाली और लागत प्रभावी सेवा प्रणाली तैयार करेगा।