संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: मुख्य फसलें, देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न, सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली; कृषि उत्पादन का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, इससे संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी।
संदर्भ: हाल ही में सरकार ने अपनी प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत देश भर में 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के गठन और संवर्धन के लिए इनका पंजीकरण करने के साथ ही महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
अन्य संबंधित जानकारी
• आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1,175 FPO शत-प्रतिशत महिला सदस्यता के साथ गठित किए गए हैं, जो लैंगिक समावेशिता के प्रति सुदृढ़ प्रयास को रेखांकित करते हैं।
• इसके अतिरिक्त, देश भर में लगभग 23.55 लाख महिला किसानों को इस योजना के दायरे में लाया गया है।
10,000 FPO के गठन और संवर्धन हेतु केंद्रीय क्षेत्र योजना के विषय में
• इसे प्रधानमंत्री द्वारा 29 फरवरी 2020 को वर्ष 2027-28 तक ₹6,865 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ प्रारंभ किया गया था।
• योजना के लक्ष्य एवं उद्देश्य:
- 10,000 नए FPO के गठन हेतु एक समग्र और व्यापक सहायक इकोसिस्टम प्रदान करना, ताकि जीवंत एवं संधारणीय आय-उन्मुख कृषि के विकास को सुगम बनाया जा सके और कृषि समुदायों का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास एवं कल्याण सुनिश्चित हो सके।
- संसाधनों के कुशल, लागत प्रभावी और संधारणीय उपयोग के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना और सामूहिक कार्यवाही के माध्यम से अपने उत्पादों के लिए बेहतर तरलता एवं विपणन संपर्कों (मार्केट लिंकेज) द्वारा उच्च प्रतिफल प्राप्त करना तथा आत्मनिर्भर बनना।
- नए FPO को उनके गठन के वर्ष से 5 वर्षों तक FPO प्रबंधन, आगत, उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन, विपणन संपर्क, ऋण संपर्क और प्रौद्योगिकी के उपयोग आदि के सभी पहलुओं में निरंतर सहायता (हैंडहोल्डिंग) प्रदान करना।
- FPO को प्रभावी क्षमता निर्माण प्रदान करना ताकि कृषि-उद्यमिता कौशल विकसित हो सके और वे सरकारी सहायता की अवधि के पश्चात भी आर्थिक रूप से व्यवहार्य और स्वावलंबी बन सकें।
• वित्तीय सहायता और समर्थन:
- इस योजना के अंतर्गत, प्रत्येक नए FPO को पाँच वर्षों तक निरंतर सहायता दी जाती है, साथ ही 3 वर्षों के लिए प्रबंधन लागत हेतु ₹18 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- इसके अतिरिक्त, प्रत्येक किसान सदस्य को ₹2,000 तक का इक्विटी अनुदान (प्रति FPO अधिकतम ₹15 लाख) और पात्र ऋण संस्थानों से ₹2 करोड़ तक के परियोजना ऋण हेतु क्रेडिट गारंटी सुविधा प्रदान की जाती है ताकि संस्थागत ऋण की सुलभता सुनिश्चित हो सके।
योजना के अंतर्गत प्रमुख पहलें
• ऋण गारंटी निधि (CGF): किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के लिए संस्थागत ऋण तक पहुँच को सुगम बनाने हेतु एक समर्पित निधि स्थापित की गई है। यह वित्तीय संस्थानों को ऋण गारंटी कवर प्रदान करती है, जिससे उन्हें इनपुट एकत्रीकरण, कार्यशील पूँजी, विपणन और सेवा वितरण हेतु ऋण प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इससे FPO के वित्तीय आधार को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिलती है।
• ONDC प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण: कृषि उत्पादों की देशव्यापी ऑनलाइन बिक्री को सक्षम करने के लिए लगभग 5,000 FPO को ‘ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स’ (ONDC) से जोड़ा गया है। यह पहल बाजार तक पहुँच, डिजिटल विपणन क्षमता, ऑनलाइन भुगतान और B2B/B2C लेनदेन को बढ़ाती है, जिससे किसान सीधे पूरे भारत के खरीदारों से जुड़कर सशक्त बनते हैं।
• FPO का CSC में रूपांतरण: CSC SPV और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (MoU) का उद्देश्य 10,000 FPO को ‘सामान्य सेवा केंद्रों’ (CSCs) में परिवर्तित करना है। इससे FPO ‘डिजिटल सेवा पोर्टल’ के माध्यम से नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम होंगे, साथ ही इससे ग्रामीण रोजगार के अवसरों का भी सृजन होगा।
• समावेशी सदस्यता को प्रोत्साहन: यह योजना छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs), अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) समुदायों और अन्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करके समावेशिता पर बल देती है। यह FPO को अधिक न्यायसंगत, प्रतिनिधिपरक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली बनाती है।
किसान उत्पादक संगठन (FPO) के विषय में
• यह किसानों का एक सामूहिक संगठन है, जो या तो कंपनी अधिनियम के भाग IXA के तहत या संबंधित राज्यों के सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत होता है। इसका गठन उत्पादन और विपणन में ‘मितव्ययिता’ (Economies of Scale) का लाभ प्राप्त करने के लिए किया गया है।

• यह अवधारणा सामूहिकीकरण (Collectivization) पर आधारित है, जहाँ किसान आगत (कृषि निवेश), प्रौद्योगिकी, वित्त और बाजारों तक बेहतर पहुँच प्राप्त करने के लिए अपने संसाधनों और प्रयासों को एकजुट करते हैं।
• इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए, कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा लघु कृषक कृषि व्यवसाय संघ (SFAC) को राज्य सरकारों को FPO के गठन और संवर्धन में सहायता करने हेतु अधिदेशित किया गया था।
• यह योजना कुशल, लागत प्रभावी और संधारणीय संसाधन उपयोग के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और खेती की लागत में कमी आती है।
