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सामान्य अध्ययन-3: मुख्य फसलें देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न-सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएं; किसानों की सहायता के लिए ई-प्रौद्योगिकी।

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के कपास क्षेत्र में आ रही बाधाओं, घटती विकास दर और गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए कपास उत्पादकता मिशन (2026-27 से 2030-31) हेतु ₹5,659.22 करोड़ के परिव्यय को मंजूरी दी है।

कपास उत्पादकता मिशन के बारे में

  • इस मिशन का उद्देश्य कपास की उत्पादकता को बढ़ाना, कपास की गुणवत्ता में सुधार करना, कपास मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर कपास उत्पादक के रूप में स्थापित करना है।
  • यह भारत सरकार के 5F विजन के अनुरूप है: फार्म  → फाइबर → फैक्ट्री → फैशन → फॉरेन।
  • यह मिशन वित्त वर्ष 2026–27 से 2030–31 तक लागू किया जाएगा।
  • इस मिशन के लिए कुल स्वीकृत वित्तीय परिव्यय ₹5,659.22 करोड़ है।
  • संस्थागत ढाँचा: इस मिशन को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जाएगा।
    • इसमें 10 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) संस्थान, 1 वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) संस्थान, कपास पर 10 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) केंद्र और राज्य कृषि विश्वविद्यालय (SAUs) शामिल होंगे।
  • मिशन के प्रारंभिक चरण में 14 राज्यों के 140 जिले शामिल होंगे और इसमें 2,000 जिनिंग और प्रसंस्करण कारखाने कवर किए जाएंगे।
  • मिशन का लक्ष्य 2031 तक कपास के उत्पादन को 498 लाख गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) तक पहुँचाना है।
    • इसका उद्देश्य लिंट उत्पादकता को 440 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना है।
    • इस मिशन से लगभग 32 लाख किसानों के लाभान्वित होने की उम्मीद है।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

  • कपास के उन्नत बीजों का विकास: यह मिशन अधिक उपज देने वाली किस्मों (HYV), जलवायु-अनुकूल बीजों, और कीट एवं रोग-प्रतिरोधी कपास की किस्मों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है।
    • यह कपास की उत्पादकता और लचीलेपन में सुधार के लिए उन्नत उत्पादन और फसल सुरक्षा प्रौद्योगिकियों को भी बढ़ावा देता है।
  • आधुनिक कपास खेती प्रौद्योगिकियों का प्रचार: मिशन आधुनिक कृषि पद्धतियों के बड़े पैमाने पर अपनाए जाने को प्रोत्साहित करता है, जैसे कि सघन वृक्षारोपण प्रणाली (HDPS), क्लोजर स्पेसिंग (CS), एकीकृत कपास प्रबंधन और एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास की खेती।
    • प्रौद्योगिकी का प्रसार राज्य सरकारों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों (SAUs) के माध्यम से किया जाएगा।
  • गुणवत्ता में सुधार और प्रसंस्करण का आधुनिकीकरण: यह मिशन जिनिंग मिलों और कपास प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण का समर्थन करता है।
    • यह न्यूनतम संदूषण वाली कपास की आपूर्ति और बेहतर फाइबर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सर्वोत्तम प्रसंस्करण पद्धतियों को भी बढ़ावा देता है।
  • कपास परीक्षण बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण: मिशन का उद्देश्य आधुनिक, मानकीकृत और मान्यता प्राप्त कपास परीक्षण सुविधाएं स्थापित करना है।
    • ये सुविधाएं विश्वसनीय गुणवत्ता मूल्यांकन सुनिश्चित करेंगी और भारत को वैश्विक बेंचमार्किंग मानकों को पूरा करने में मदद करेंगी।
  • ब्रांडिंग और ट्रैसेबिलिटी: मिशन भारतीय कपास को एक प्रीमियम और संधारणीय वैश्विक उत्पाद के रूप में स्थापित करने के लिए ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ की ट्रैसेबिलिटी, प्रमाणीकरण और ब्रैंडिंग को बढ़ावा देता है।
    • इसका लक्ष्य कपास में कचरे की मात्रा को 2% से कम करना भी है।
  • मंडियों का डिजिटल एकीकरण: मिशन का लक्ष्य पारदर्शी मूल्य निर्धारण, प्रत्यक्ष बाजार पहुंच और किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति के लिए बाजार मंडियों को ई-प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत करना है।
  • चक्रीय अर्थव्यवस्था और संधारणीयता: मिशन कपास अपशिष्ट पुनर्चक्रण और चक्रीय अर्थव्यवस्था की प्रथाओं को बढ़ावा देता है।
    • इसका उद्देश्य संसाधन दक्षता में सुधार करना, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना और अतिरिक्त मूल्य उत्पन्न करना है।
  • प्राकृतिक रेशों का विविधीकरण: मिशन सन (flax), रैमी (ramie), सिसल (sisal), मिल्कवीड, बांस और केले जैसे वैकल्पिक प्राकृतिक रेशों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
    • यह पर्यावरण की दृष्टि से संधारणीय वस्त्र उत्पादन का समर्थन करता है और बदलती वैश्विक मांग के अनुरूप है।

मिशन का महत्व

  • भारत की कपास अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार: यह मिशन घटती उत्पादकता, कीटों के कारण फसल का नुकसान, फाइबर (रेशे) की गुणवत्ता संबंधी चिंताओं और कपास क्षेत्र को प्रभावित करने वाली संरचनात्मक बाधाओं को दूर करता है।
  • किसान आय और ग्रामीण आजीविका में वृद्धि: उच्च उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता वाली कपास और बेहतर बाजार पहुंच से किसानों की आय में वृद्धि होने और लगभग 32 लाख कपास किसानों को लाभ होने की उम्मीद है।
  • भारत की वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूती: उच्च गुणवत्ता वाली और संदूषण मुक्त कपास की उपलब्धता घरेलू कपड़ा उद्योग को समर्थन देगी और वैश्विक कपड़ा विनिर्माण में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करेगी।
  • कपास निर्यात और वैश्विक ब्रांडिंग को प्रोत्साहन: ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ (ब्रांडिंग और ट्रैसेबिलिटी तंत्र अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय कपास को एक प्रीमियम और संधारणीय उत्पाद के रूप में बढ़ावा देंगे।
  • संधारणीय और जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा: यह मिशन जलवायु-अनुकूल खेती, कुशल संसाधन उपयोग, पुनर्चक्रण प्रथाओं और पर्यावरण की दृष्टि से संधारणीय फाइबर विविधीकरण का समर्थन करता है।
  • आयात निर्भरता में कमी और आत्मनिर्भरता: उच्च घरेलू कपास उत्पादन और उत्पादकता बढ़ती औद्योगिक मांग को पूरा करने और कपास आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।
  • सरकार के 5F विजन की दिशा में आगे बढ़ना: यह मिशन फार्म→ फाइबर → फैक्ट्री → फैशन → फॉरेन तक कपास मूल्य श्रृंखला के एकीकरण को मजबूत करता है और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ‘टेक्सटाइल हब’ बनने के भारत के दीर्घकालिक लक्ष्य का समर्थन करता है।

Sources:
PIB
Economic Time
Bussiness standard
The Hindu Business Line
Indian Express

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