संदर्भ:
ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि वैश्विक तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से वर्ष 2100 तक विश्व सकल घरेलू उत्पाद में 40% की कमी आ सकती है।
अन्य संबंधित जानकारी
- न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय (UNSW) के जलवायु जोखिम एवं प्रतिक्रिया संस्थान (ICRR) द्वारा किए गए इस शोध में पारंपरिक आर्थिक मॉडलों में एक महत्वपूर्ण चूक की पहचान की गई है, जो आज तक जलवायु नीति को प्रभावित करता आया है।
- निष्कर्ष पिछले अनुमानों (लगभग 11%) की तुलना में तीव्र वृद्धि दर्शाते हैं ।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष
अध्ययन से संकेत मिलता है कि यदि देश निकट-अवधि और दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्य दोनों को पूरा कर भी लें, तो भी वैश्विक तापमान में 2.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होगी।
अध्ययन के अद्यतन अनुमान वैश्विक तापमान को 1.7°C तक सीमित रखने के प्रयासों का दृढ़ता से समर्थन करते हैं, जो पेरिस समझौते में उल्लिखित महत्वाकांक्षी डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप है।
यह नया लक्ष्य पिछले 2.7 डिग्री सेल्सियस की सीमा से काफी कम है जिसे पहले के मॉडल के तहत व्यापक रूप से स्वीकार्य माना गया था।

पिछली रिपोर्टों के विपरीत, यह नया विश्लेषण चरम मौसम की घटनाओं के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों के प्रभाव को ध्यान में रखता है।
- इन मौसम व्यवधानों का विश्व भर की अर्थव्यवस्थाओं पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
अध्ययन में इस धारणा को भी चुनौती दी गई है कि रूस और कनाडा जैसे ठंडे क्षेत्रों/देशों को जलवायु परिवर्तन से लाभ हो सकता है। इस दावे को चुनौती दी गई है क्योंकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की परस्पर संबद्धता किसी भी देश को आर्थिक गिरावट से प्रतिरक्षित नहीं बनाती है।
वैश्विक औसत तापमान का अवलोकन
- जनवरी 2025 विश्व स्तर पर सबसे गर्म था, जिसमें औसत सतही वायु तापमान 13.23°C था, जो 1991-2020 जनवरी के औसत से लगभग 0.79°C अधिक था।
- 2024 में, 11 महीनों और लगभग 75% दिनों में वैश्विक-औसत सतही हवा का तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक था।
- 2024 में, दुनिया के अधिकांश हिस्सों में वार्षिक सतही वायु तापमान 1991-2020 के औसत से अधिक (91%) था।