संदर्भ: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाने और खाद्यान्न की चोरी की रोकथाम के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार ने भारतीय खाद्य निगम के डिपो से उचित दर की दुकानों तक होने वाले परिवहन में GPS-युक्त वाहनों का उपयोग अनिवार्य कर दिया है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- इस कदम का उद्देश्य दृढ़ इच्छाशक्ति और स्मार्ट प्रणालियों के माध्यम से सरकारी खरीद से लेकर भंडारण डिपो तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
- उल्लेखनीय है कि खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के दौरान धान की खरीद में भी GPS ट्रैकिंग अनिवार्य कर दी गई है।
मुख्य बिंदु:
- पूर्ण डिजिटल निगरानी: पूर्ण डिजिटल निगरानी के तहत, खाद्य एवं रसद विभाग ने 5,000 से अधिक वाहनों को इस कार्य में लगाया है। इससे भारतीय खाद्य निगम (FCI) के डिपो से लेकर उचित दर की दुकानों तक खाद्यान्न के परिवहन की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सकेगी।
- यह नियंत्रण प्रणाली वाहन की आवाजाही, रुकने के स्थान, निर्धारित मार्ग से विचलन और समय पर पहुँचने जैसे विवरणों को निरंतर रिकॉर्ड करेगी।
- सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी मॉडल: राज्य ने ब्लॉक-स्तरीय गोदाम प्रणाली को समाप्त कर दिया है और अब ‘सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी’ मॉडल को लागू किया है।
- इस प्रणाली के तहत, e-टेंडरिंग के माध्यम से नियुक्त ठेकेदारों द्वारा खाद्यान्न को सीधे FCI डिपो से राशन की दुकानों तक पहुँचाया जाता है। इससे मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो गया है और जवाबदेही में वृद्धि हुई है।
- महत्व: यह प्रणाली पारगमन के दौरान खाद्यान्न की हेराफेरी, हेरफेर और चोरी पर रोक लगाएगी।
- GPS-आधारित निगरानी यह भी सुनिश्चित करेगी कि ये वस्तुएं लाभार्थियों तक समय पर पहुंचें और उनकी मात्रा में कोई कटौती न की गई हो।

