संदर्भ: केंद्र सरकार की डी-रेगुलेशन 1.0 रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश को व्यापार संचालन को सरल, पारदर्शी और निवेश अनुकूल बनाने हेतु सुधार लागू करने में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है।

डी-रेगुलेशन 1.0 रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • मूल्यांकन मानदंड: इस रिपोर्ट में पाँच प्रमुख क्षेत्रों के अंतर्गत 23 प्राथमिकता वाले सुधारों के कार्यान्वयन का मूल्यांकन किया गया। ये क्षेत्र हैं: भूमि, भवन और निर्माण, श्रम, उपयोगिताएँ और अनुमतियाँ।
  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य (Top Performer): उत्तर प्रदेश को ओडिशा और त्रिपुरा के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में पहला स्थान दिया गया है।

डी-रेगुलेशन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की पहलें:

  • भूमि संबंधी सुधार: उत्तर प्रदेश ने मिश्रित उपयोग के लिए भूमि के विकास हेतु लचीली ज़ोनिंग की शुरुआत की, डिजिटलीकरण के माध्यम से भूमि-उपयोग परिवर्तन को सरल बनाया, और निवेशकों की रीयल-टाइम पहुंच बढ़ाने के लिए GIS-आधारित भूमि बैंक को भारत औद्योगिक भूमि बैंक के साथ एकीकृत किया।
  • भवन और निर्माण क्षेत्र: भवन निर्माण की मंजूरी के लिए तीसरे पक्ष के विशेषज्ञों का पैनल बनाया गया, संयुक्त और अग्नि सुरक्षा निरीक्षण की व्यवस्था की गई, और ऑक्यूपेंसी तथा पूर्णता प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
  • श्रम सुधार: राज्य ने कारखानों, दुकानों आदि में महिलाओं को रात के समय रोजगार की अनुमति दी है। काम के घंटों को तर्कसंगत बनाया गया है, और अब ‘दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम’ के तहत अनुपालन केवल 20 या उससे अधिक श्रमिकों वाले व्यवसायों के लिए ही इसका अनुपालन अनिवार्य होगा, जिससे छोटे व्यवसायों पर पड़ने वाले नियामक बोझ में कमी आई है।
  • तकनीकी एकीकरण: राज्य ने ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से कारखानों और व्यापार लाइसेंस की मंजूरी देने की प्रक्रिया को सरल बनाया है। साथ ही, एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्मों का उपयोग करके बिजली और पानी के कनेक्शन देने की प्रक्रिया में तेजी आई है।
Shares: