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सामान्य अध्ययन-2: कार्यपालिका, न्यायपालिका, संसद तथा राज्य विधायिका की भूमिका और संरचना; शक्तियाँ; विशेषाधिकार तथा कार्यप्रणाली।

संदर्भ: हाल ही में, उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 224-A के तहत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए तदर्थ न्यायाधीशों के रूप में पांच सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

अन्य संबंधित जानकारी

• ये नियुक्तियाँ अनुच्छेद 224-A के तहत दो वर्ष के कार्यकाल के लिए की गई हैं।

• नामों की सिफारिश इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा की गई थी और उचित विचार-विमर्श के उपरांत उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने इनकी नियुक्ति की स्वीकृति दी।

• यह कदम भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों से उपयुक्त सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ नियुक्तियों के लिए अनुशंसित करने का अनुरोध के बाद उठाया गया है।

• नियुक्ति के लिए स्वीकृत न्यायाधीशों के नाम: न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान, न्यायमूर्ति मोहम्मद असलम, न्यायमूर्ति सैयद आफताब हुसैन रिजवी, न्यायमूर्ति रेणु अग्रवाल और न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना शर्मा।

• नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के अनुसार, उच्च न्यायालयों में कुल मिलाकर लगभग 63.6 लाख मामले लंबित हैं, जिनमें अकेले इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 12 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिस कारण इस प्रकार के असाधारण उपाय करने की आवश्यकता पड़ी।

संविधान का अनुच्छेद 224-A

• अनुच्छेद 224-A को अक्सर भारतीय संविधान के “सुप्त प्रावधान” के रूप में वर्णित किया जाता है।

• इसे 15वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1963 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था।

• यह किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को, भारत के राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से उच्च न्यायालय के “न्यायाधीश के पद पर रहने और कार्य करने” का अनुरोध करने का अधिकार देता है।

• इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की सहमति लेना अनिवार्य है।

• इस प्रावधान का उपयोग विकट परिस्थितियों, विशेष रूप से उच्च न्यायालयों में अत्यधिक मामलों के लंबित होने (बैकलॉग) की स्थिति में किया जाता है।

• कार्यकाल के दौरान:

  • ऐसे न्यायाधीश को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही सभी क्षेत्राधिकार, शक्तियाँ और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं।
  • वे राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित भत्तों के हकदार होते हैं।

• हालांकि, उन्हें उस उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नहीं माना जाता है (अर्थात, वे स्थायी संवर्ग का हिस्सा नहीं होते हैं)।

पूर्व दृष्टांत

• अनुच्छेद 224-A का उपयोग सर्वप्रथम 1972 में चुनाव याचिकाओं के निपटान के लिए न्यायमूर्ति सूरज भान (मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय) को तदर्थ न्यायाधीश नियुक्त करने के लिए किया गया था।

• तब से इस प्रावधान का उपयोग बहुत कम किया गया है।

अनुच्छेद 224-A के तहत नियुक्ति प्रक्रिया

• सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन बनाम भारत संघ (1998) (द्वितीय न्यायाधीश मामला) के बाद तैयार किए गए 1998 के प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) के अनुसार, यह प्रक्रिया न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है।

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्त न्यायाधीश की सहमति प्राप्त करते हैं।
  • भारत के मुख्य न्यायाधीश संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री को कार्यकाल निर्दिष्ट करते हुए सिफारिशें भेजते हैं।
  • मुख्यमंत्री, राज्यपाल के परामर्श से, प्रस्ताव को केंद्रीय विधि और न्याय मंत्रालय को भेजते हैं।
  • केंद्रीय विधि मंत्री भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करते हैं और सलाह प्रधानमंत्री को भेजते हैं।
  • प्रधानमंत्री भारत के राष्ट्रपति को सलाह देते हैं।
  • राष्ट्रपति की सहमति मिलने पर, न्याय विभाग उच्च न्यायालय और राज्य सरकार को सूचित करता है, और भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचना जारी की जाती है।

• उच्चतम न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश: अनुच्छेद 127 कोरम (गणपूर्ति) के अभाव में तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान करता है।

  • नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती है।
  • उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए अर्ह उच्च न्यायालय का वर्तमान न्यायाधीश ही इसके लिए पात्र है।

• उच्च न्यायालयों में तदर्थ न्यायाधीश: अनुच्छेद 224-A सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को न्यायाधीश के पद पर रहने और कार्य करने का अनुरोध करने की अनुमति देता है।

  • नियुक्ति प्राधिकारी: राष्ट्रपति की सहमति से उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश।
  • उद्देश्य: गंभीर बैकलॉग (लंबित मामलों), विशेष रूप से लंबे समय से लंबित आपराधिक अपीलों का समाधान करना।
  • नियुक्ति स्वैच्छिक है, और सेवानिवृत्त न्यायाधीश की सहमति लेनी अनिवार्य है।

Source :
The Indian Express
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