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सामान्य अध्ययन-1: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय गतिविधियाँ, चक्रवात आदि जैसे महत्वपूर्ण भू-भौतिकीय परिघटनाएँ; भौगोलिक विशेषताएँ तथा उनका स्थान; महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जिसमें जल-निकाय और हिमावरण/हिम-क्षत्रक शामिल हैं) में होने वाले परिवर्तन; तथा वनस्पति और जीव-जंतुओं में होने वाले परिवर्तनों के प्रभाव।
सामान्य अध्ययन -3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं पर्यावरणीय क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन।
संदर्भ: आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड 2025 में आर्कटिक क्षेत्र में अभूतपूर्व तापवृद्धि और पारिस्थितिकी तंत्र में हुए परिवर्तनों का खुलासा किया गया है, जो वैश्विक पर्यावरणीय तथा सामाजिक-आर्थिक प्रभावों के साथ तीव्र होती जलवायु परिवर्तन की स्थिति को रेखांकित करता है।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड 2025 इसका 20वाँ वार्षिक संस्करण है, जिसे राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों और आदिवासी साझेदारों के सहयोग से प्रकाशित किया गया है।
- यह रिपोर्ट आर्कटिक क्षेत्र में वायुमंडलीय, महासागरीय, हिममंडलीय (क्रायोस्फेरिक) और स्थलीय परिवर्तनों का सहकर्मी-समीक्षित आकलन प्रस्तुत करती है।
- इसमें मुख्यतः अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच देखी गई परिस्थितियों का दस्तावेजीकरण किया गया है।
आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड 2025 के प्रमुख निष्कर्ष

आर्कटिक जलवायु:
- अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 की अवधि के दौरान आर्कटिक क्षेत्र में 1900 के बाद से अब तक का सबसे अधिक सतही वायु तापमान दर्ज किया गया।
- आर्कटिक में पिछले दस वर्ष रिकॉर्ड पर सबसे अधिक गर्म रहे हैं।
- वर्ष 2006 के बाद से आर्कटिक का तापमान वैश्विक औसत दर से दो गुना से भी अधिक गति से बढ़ा है।
- इस दौरान वर्षा स्तर एक नए ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुँच गया।
आर्कटिक महासागर और समुद्री बर्फ:
- मार्च 2025 में शीतकालीन समुद्री बर्फ का विस्तार 47 वर्षों के उपग्रह रिकॉर्ड में सबसे कम दर्ज किया गया।
- सितंबर 2025 में समुद्री बर्फ का न्यूनतम विस्तार रिकॉर्ड में दसवाँ सबसे कम रहा।
- 1980 के दशक से अब तक सबसे पुरानी और सबसे मोटी बहुवर्षीय समुद्री बर्फ में 95 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है।
- अटलांटिफिकेशन (Atlantification) केंद्रीय आर्कटिक महासागर तक पहुँच गया है, जिससे महासागर की स्तरीकरण कमजोर हो रही है और बर्फ के पिघलने की प्रक्रिया तेज हो रही है।
- अटलांटिफिकेशन से आशय आर्कटिक महासागर में गर्म और अधिक लवणीय अटलांटिक महासागर के जल के बढ़ते प्रभाव से है, जिसके परिणामस्वरूप आर्कटिक समुद्री प्रणाली में भौतिक, रासायनिक और जैविक परिवर्तन होते हैं।
समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र:
- वर्ष 2003 से 2025 के बीच अधिकांश आर्कटिक क्षेत्रों में फाइटोप्लैंकटन उत्पादकता में तीव्र वृद्धि हुई है।
- समुद्र के बढ़ते तापमान और बर्फ के घटते आवरण से मछलियों के वितरण और आर्कटिक मत्स्य उद्योग में बदलाव आ रहा है, जिससे खाद्य सुरक्षा और आदिवासी समुदायों की आजीविका-आधारित परंपराएँ प्रभावित हो रही हैं।
- अधिक गर्म परिस्थितियाँ बोरियल प्रजातियों के उत्तर की ओर विस्तार को बढ़ावा दे रही हैं, जिससे खाद्य जाल और पारंपरिक पारिस्थितिक संतुलन में बदलाव आ रहा है।
हिममंडल और हिमनद:
- स्कैंडिनेविया और स्वालबार्ड में आर्कटिक हिमनदों ने 2023–2024 के दौरान अब तक का सर्वाधिक वार्षिक हिम-हानि दर्ज की।
- ग्रीनलैंड हिम-चादर (Greenland Ice Sheet) ने 2025 में लगभग 129 अरब टन बर्फ खो दी।
- दीर्घकालिक हिमनद क्षरण वैश्विक समुद्र-स्तर में वृद्धि कर रहा है और आपदा जोखिमों को बढ़ा रहा है।
स्थलीय प्रणालियाँ और पर्माफ्रॉस्ट:
- पिघलते पर्माफ्रॉस्ट से लौह (आयरन) और अन्य खनिजों के मुक्त होने के कारण आर्कटिक अलास्का की 200 से अधिक जलग्रहण प्रणालियों में जल नारंगी रंग का हो गया है, जिन्हें “रस्टिंग रिवर्स” (जंग लगी नदियाँ) कहा जाता है; इससे जल गुणवत्ता, आवास और पारंपरिक जल स्रोतों का क्षरण हो रहा है।
- पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना उस स्थायी रूप से जमी हुई भूमि के गलने को दर्शाता है जो कम से कम दो लगातार वर्षों तक 0°C या उससे कम तापमान पर बनी रहती है; यह मुख्यतः आर्कटिक और उप-आर्कटिक क्षेत्रों में पाई जाती है।
- जल गुणवत्ता में गिरावट जलीय पारिस्थितिकी तंत्र और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के लिए खतरा बन रही है।
- 2025 में आर्कटिक टुंड्रा की हरियाली उपग्रह रिकॉर्ड में तीसरे स्थान पर सबसे अधिक रही।
- आर्कटिक टुंड्रा हरियाली (Arctic Greening का एक उपसमूह) बढ़ते तापमान और लंबे होते वृद्धि काल (Growing Season) के कारण टुंड्रा क्षेत्रों में वनस्पति वृद्धि और पौधों की उत्पादकता में देखी गई बढ़ोतरी को दर्शाती है।
स्वदेशी ज्ञान और भागीदारी:
- स्वदेशी नेतृत्व वाले अवलोकन नेटवर्क पर्यावरणीय परिवर्तनों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
- समुदाय-आधारित पहल खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय जागरूकता में सुधार कर रही हैं।
- दीर्घकालिक साझेदारियाँ आर्कटिक क्षेत्र में वैज्ञानिक समझ और अनुकूलन क्षमता को सुदृढ़ कर रही हैं।
रिपोर्ट का महत्व:
- जलवायु परिवर्तन का संकेतक: यह रिपोर्ट आर्कटिक को वैश्विक जलवायु परिवर्तन का अग्रिम संकेतक के रूप में रेखांकित करती है।
- शमन की आवश्यकता: यह वैश्विक प्रभावों के कारण जलवायु शमन की तात्कालिकता पर प्रकाश डालती है।
- स्वदेशी समुदायों की भूमिका: यह जलवायु विज्ञान में स्थानीय समुदायों और उनके पारंपरिक ज्ञान के महत्व को पुख्ता करती है।
- वैश्विक पर्यावरण संरचना: यह अंतर्राष्ट्रीय जलवायु नीति और पर्यावरणीय शासन प्रयासों को मजबूत करने की आवश्यकता के बारे में सूचित करती है।
