संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।
सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ‘रशियन सेंक्शंस बिल’ को मंजूरी देने के बाद भारत को ऊर्जा के मोर्चे पर दोहरे दबाव का सामना करना पड़ा। दरअसल, इस विधेयक में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर ‘500% तक टैरिफ’ लगाने का अनिवार्य प्रावधान थ। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत के नेतृत्व वाले ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन‘ (ISA) सहित कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर करने का भी निर्णय लिया है।
अन्य संबंधित जानकारी

- अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए एक द्विदलीय बिल ‘रशियन सेंक्शंस बिल’ को अब तक कुल 100 सीनेट सदस्यों में से 84 सह-समर्थक और अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में 151 सह-समर्थकों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। इससे यह संकेत मिलता है कि मतदान के लिए रखे जाने पर यह बिना किसी विरोध के आसानी से पारित हो जाएगा।
- ये घोषणाएं इस सप्ताह के अंत में अमेरिकी की ओर से नामित राजदूत सर्जियो गोर के दिल्ली आगमन से ठीक पहले की गई हैं। उन्होंने सितंबर में कहा था कि यह सुनिश्चित करना उनकी ‘शीर्ष प्राथमिकता‘ है कि भारत रूस से तेल का आयात करना बंद कर दे।
- सर्जियो गोर 12 जनवरी, 2026 को दिल्ली में अमेरिका के राजदूत और ‘दक्षिण एवं मध्य एशिया के विशेष दूत‘ के रूप में अपना कार्यकाल शुरू करेंगे।
- “अमेरिकी हितों की रक्षा” की व्यापक नीति के तहत, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) सहित कई अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को बाहर करने का निर्णय लिया है|
- अमेरिका, 2021 में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हुआ था|
रशियन सेंक्शंस बिल के मुख्य प्रावधान:
- टैरिफ द्वारा निवारण: यह विधेयक अमेरिका को रूसी पेट्रोलियम उत्पादों के लेन-देन में शामिल देशों की सभी वस्तुओं और सेवाओं पर टैरिफ बढ़ाकर उनके मूल्य का कम से कम 500% करने की अनुमति देता हैं।
- छूट: यदि देश अमेरिका के हितों की पूर्ति करता है तो राष्ट्रपति को 180 दिन तक टैरिफ हटाने की अनुमति देने का प्रावधान|
भारत के लिए इस कदम के संभावित निहितार्थ:

- रूसी तेल प्रतिबंध का प्रभाव: भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs), रिलायंस, नायरा एनर्जी और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले अन्य बड़े आयातक रूस से तेल के आयात में कटौती करेंगे, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी।
- 2018 में, ट्रंप प्रशासन के इसी तरह के दबाव में, भारत ने अपने दो प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं अर्थात ईरान और वेनेजुएला से भी तेल का आयात पूरी तरह बंद कर दिया था।
- व्यापार पर प्रभाव: अमेरिका को होने वाले निर्यात पर टैरिफ में 500% की वृद्धि से भारत की व्यापारिक प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी आएगी, जिससे विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए भारत से होने वाला निर्यात प्रभावी रूप से बंद हो सकता है।
- द्विपक्षीय संबंध: रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों के बीच सहयोग होने के बावजूद यह विधायी कदम और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) तथा अन्य निकायों से अमेरिका का बाहर होना संयुक्त रूप से इनके संबंधों में बढ़ते तनाव का संकेत देते हैं|
- बहुपक्षवाद को नकारना: प्रमुख जलवायु संधियों से अमेरिका के हटने के कारण, नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के वैश्विक अभियानों को क्षति पहुंची है।
- WTO के प्रमुख सिद्धांतों का उल्लंघन: एकतरफा प्रतिबंध विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ‘गैर-भेदभावपूर्ण’ और ‘पूर्वानुमेयता’ के सिद्धांतों को कमजोर करते हैं। ये नियम-आधारित व्यापार को बल-पूर्व दबाव से प्रतिस्थापित कर बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को प्रभावित करते हैं।
