संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
संदर्भ: हाल ही में अभिनव बिंद्रा के नेतृत्व में गठित टास्क फोर्स ने खेल मंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपी| उल्लेखनीय है कि 170 पन्नों की इस रिपोर्ट में भारतीय खेल प्रशासन में “प्रणालीगत खामियों” को उजागर किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी
- अगस्त 2025 में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने नौ सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया जिसके अध्यक्ष अभिनव बिंद्रा थे। वर्ल्ड एथलेटिक्स के उपाध्यक्ष आदिल सुमारीवाला और ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) के पूर्व मुख्य कार्यकारी निदेशक सीडीआर. राजेश राजगोपालन इसके सदस्य थे।
- इस टास्क फोर्स को एक विस्तृत कार्यक्षेत्र सौंपा गया था और इसमें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) और राज्य संघों जैसे संस्थानों के वर्तमान प्रशासनिक ढांचे का मूल्यांकन करना भी शामिल था|
बिंद्रा पैनल के मुख्य निष्कर्ष
- अपर्याप्त क्षमता: भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSFs) दोनों ही भारतीय खेल प्रशासन का आधार हैं, परन्तु इन्हें प्रणालीगत और क्षमता संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है जिससे व्यावसायिकता, कार्यकुशलता और प्रशासन की प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है।
- खेल प्रशासन के पेशेवर कैडर का अभाव: भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और राज्य विभागों में समर्पित खेल प्रशासनिक सेवकों का अभाव है। वर्तमान में इन पदों पर सामान्य प्रशासनिक अधिकारियों या संविदा कर्मियों की नियुक्ति की जाती है, जिनके पास खेल क्षेत्र में कोई विशिष्ट अनुभव नहीं होता। इस कारण वे अस्थायी निर्णय ले पाते हैं जिसका प्रभाव प्रत्यक्ष तौर पर संस्थागत निरंतरता और स्थायी पेशेवर कार्यप्रणाली पर पड़ता है|
- खंडित खेल इकोसिस्टम: सरकारी निकायों, महासंघों, निजी अकादमियों और प्रायोजकों के बीच कुशल समन्वय न होने के कारण एक आधुनिक और एथलीट-केंद्रित खेल इकोसिस्टम का निर्माण करने की भारत की क्षमता सीमित हो जाती है।
- प्रशासन में एथलीटों के लिए कोई स्पष्ट दिशा नहीं: पैनल ने यह भी उल्लेख किया कि यद्यपि शीघ्र ही लागू होने वाले ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम‘ के तहत राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) की कार्यकारी समितियों में एथलीटों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन उन्हें इस कार्य के लिए प्रशिक्षित करने हेतु कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है।
- ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025′, एक ऐतिहासिक सुधार-उन्मुख खेल कानून है, जिसका उद्देश्य खेल प्रशासन, विशेष रूप से राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) के शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही में आमूल-चूल परिवर्तन लाना है।
- राष्ट्रीय खेल महासंघों में प्रशासन अंतराल : राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) में शक्तियों का अत्यधिक केंद्रीकरण और सीमित पारदर्शिता न केवल जवाबदेही को कमजोर करती है, बल्कि यह भावी नेतृत्व के विकास की संभावनाओं को भी अवरुद्ध करता है।

टास्क फोर्स द्वारा की गई सिफारिशें
- राष्ट्रीय खेल शिक्षा और क्षमता निर्माण परिषद (NCSECB): खेल मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त वैधानिक निकाय का गठन किया जाए, जो खेल प्रशासन प्रशिक्षण को विनियमित करने, मान्यता प्रदान करने और प्रमाणित करने का कार्य करेगा।
- सिविल सेवा एकीकरण: भावी नौकरशाहों को संवेदनशील बनाने के लिए सिविल सेवा अकादमियों (जैसे LBSNAA) को अपने पाठ्यक्रम में खेल प्रशासन में प्रशिक्षण को शामिल करना चाहिए।
- संरचित दोहरा एथलीट करियर पथ (Structured Dual Athlete Career Pathway): भारत को ‘लॉन्ग-टर्म एथलीट डेवलपमेंट’ (LTAD) मॉडल जैसे वैश्विक मानकों को अपनाना चाहिए। यह मॉडल एथलीटों को शिक्षा, नेतृत्व और प्रशासनिक कौशल से जोड़ने के साथ-साथ उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के लिए सहायता प्रदान करता है।
- डिजिटल एकीकरण: प्रशासकों के लिए विशिष्ट आईडी, एक राष्ट्रीय रजिस्ट्री और प्रदर्शन डैशबोर्ड तैयार करना—साथ ही मानक तय करने और वैश्विक अनुभव के लिए IOC, AISTS और लाफबोरो (Loughborough) जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारी करना।
रिपोर्ट का महत्त्व
- खेल रूपांतरण के लिए रोडमैप: यह रिपोर्ट निदानात्मक और उपचारात्मक दोनों है, जो उन संरचनात्मक, कार्यात्मक और प्रणालीगत खामियों की पहचान करती है जो वर्तमान में खेल प्रशासन में बाधा उत्पन्न कर रही हैं।
- एथलीट–केंद्रित प्रशासन: चूंकि भारत 2036 के ओलंपिक की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी प्रस्तुत कर रहा है अतः बीजिंग खेलों के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा की अध्यक्षता में इस टास्क फोर्स का गठन ‘एथलीट-प्रथम‘ और ‘प्रदर्शन-उन्मुख‘ नीति-निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
- अंतराल को पाटना: यह ब्लूप्रिंट भारत के खिलाडियों को एक पेशेवर और परिणाम-उन्मुख खेल संस्कृति से जोड़ता है, जो भारत की दीर्घकालिक ओलंपिक महत्त्वाकांक्षाओं के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
