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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey – PLFS) का अक्टूबर-दिसंबर 2025 का तिमाही बुलेटिन जारी किया।
अन्य संबंधित जानकारी
• सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के माध्यम से ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण’ का अक्टूबर-दिसंबर 2025 का तिमाही बुलेटिन जारी किया है।

• यह संपूर्ण भारत में श्रम बाजार की गतिविधियों और रोजगार-बेरोजगारी की प्रवृत्तियों पर डेटा के मुख्य स्रोत के रूप में कार्य करता है।
• जनवरी 2025 से ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण’ (PLFS) की कार्यप्रणाली में संशोधन किया गया है, ताकि वर्तमान साप्ताहिक स्थिति के ढांचे के अंतर्गत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए श्रम बल संकेतकों के मासिक और तिमाही अनुमान प्रदान किए जा सकें।
• यह रिपोर्ट संशोधित कार्यप्रणाली के तहत तीसरा तिमाही बुलेटिन है, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के मुख्य घटक
श्रम बल भागीदारी दर (LFPR)
• 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान बढ़कर 55.8% हो गई, जबकि पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में यह 55.1% थी।
• ग्रामीण LFPR पिछली तिमाही के 57.2% से बढ़कर 58.4% हो गई।
• इस अवधि के दौरान शहरी LFPR स्थिर रही।
• 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की कुल LFPR में वृद्धि की प्रवृत्ति देखी गई, जो पिछली तिमाही के 33.7% से बढ़कर अक्टूबर-दिसंबर 2025 में 34.9% हो गई।
- ऐसा मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में हुई वृद्धि के कारण हुआ, जो जुलाई-सितंबर 2025 की तिमाही में 37.5% से बढ़कर अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में 39.4% हो गई। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में महिला LFPR स्थिर बनी रही।

श्रमिक-जनसंख्या अनुपात
• 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए कुल श्रमिक-जनसंख्या अनुपात (WPR) पिछली तिमाही के 52.2% से बढ़कर 53.1% हो गया।
• ग्रामीण श्रमिक जनसंख्या अनुपात में पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए निरंतर वृद्धि की प्रवृत्ति देखी गई।
• यह सुधार श्रम की उच्च अवशोषण दर को इंगित करता है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।

बेरोजगारी दर
• 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए कुल बेरोजगारी दर अक्टूबर-दिसंबर 2025 के दौरान घटकर 4.8% हो गई।
• ग्रामीण पुरुषों और महिलाओं दोनों की स्थिति में सुधार से ग्रामीण बेरोजगारी दर घटकर 4.0% रह गई।
• पुरुष बेरोजगारी में आई कमी के कारण शहरी बेरोजगारी दर घटकर 6.7% हो गई।
श्रमिकों का रोजगार स्थिति और उद्योग के आधार पर वितरण
• स्व-नियोजित व्यक्तियों की हिस्सेदारी विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी है, जहाँ यह 63.2% हो गई है।
• ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में वेतनभोगी रोजगार की हिस्सेदारी में गिरावट आई है।
• ग्रामीण रोजगार में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी 58.5% रही और यह प्रमुख नियोक्ता बना रहा।
• तिमाही के दौरान रोजगार में द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रकों की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई।
• शहरी क्षेत्रों में तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़ा नियोक्ता बना रहा, जिसमें 61.9% श्रमिक संलग्न हैं।
रिपोर्ट का महत्व
• श्रम-बाजार की स्थितियों में सुधार के प्रमाण: श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) और श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) में वृद्धि के साथ-साथ बेरोजगारी दर (UR) में गिरावट, रोजगार अवशोषण में सुधार का संकेत देती है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और महिलाओं में।
• रोजगार की गुणवत्ता और संरचना पर अंतर्दृष्टि: स्व-नियोजन में वृद्धि और ग्रामीण नौकरियों में कृषि क्षेत्र का निरंतर वर्चस्व, अनौपचारिकता और उत्पादकता से संबंधित चिंताओं को उजागर करता है। यह निर्वाह क्षेत्रों से इतर गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन की आवश्यकता पर बल देता है।
• उच्च-स्तरीय नीति मार्गदर्शन: संशोधित ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण’ (PLFS) कार्यप्रणाली, ग्रामीण एवं शहरी भारत हेतु मासिक व त्रैमासिक अनुमान उपलब्ध कराकर कौशल संवर्धन, ग्रामीण आजीविका तथा श्रम बल के औपचारिकीकरण जैसे क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित एवं सामयिक नीतिगत निर्णयन को सशक्त बनाती है।
