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सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने ‘प्रतिभूति बाजार संहिता, 2025’ पर अपनी रिपोर्ट में सरकार से आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों (Virtual Digital Assets–VDAs) के लिए एक वैधानिक एवं नियामक ढाँचा विकसित करने की आवश्यकता पर विचार करने का आग्रह किया है।

समिति की रिपोर्ट की प्रमुख विशेषताएँ

  • व्यापक नियामक ढाँचे की आवश्यकता: समिति ने कहा कि आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों (VDAs) के क्षेत्र में तीव्र वृद्धि के कारण कई नियामकीय अंतराल उत्पन्न हुए हैं। इसलिए इनके लिए एक समर्पित वैधानिक ढाँचा बनाया जाना चाहिए।
  • अंतरिम नियामक व्यवस्था: व्यापक कानून बनने तक समिति ने स्व-नियामक संगठन की स्थापना का सुझाव दिया है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अथवा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) जैसे नामित नियामक के पर्यवेक्षण में कार्य करे।
  • निवेशक संरक्षण को सुदृढ़ करना: प्रस्तावित ढाँचे में सुशासन मानक, उपयुक्तता एवं पात्रता मानदंड, प्रकटीकरण मानदंड, ग्राहक परिसंपत्तियों की सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था तथा सेवा प्रदाताओं के लिए आचार संहिता का प्रावधान होना चाहिए।
  • वित्तीय एवं सुरक्षा जोखिमों का न्यूनीकरण: समिति ने धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण, कर चोरी, साइबर धोखाधड़ी तथा अवैध सीमा-पार वित्तीय प्रवाह जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षा उपायों को मजबूत करने पर बल दिया है।
  • वर्तमान नियामकीय शून्य को दूर करना: यद्यपि आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों से संबंधित लेन-देन आयकर अधिनियम के अंतर्गत कराधान के दायरे में हैं तथा इनके सेवा प्रदाता धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के अंतर्गत आते हैं, फिर भी क्रिप्टोकरेंसी एवं अन्य आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों को विनियमित करने वाला कोई समर्पित कानून भारत में अभी उपलब्ध नहीं है।

आभासी डिजिटल परिसंपत्तियाँ (VDAs) की समझ

  • अर्थ: आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 2(47A) के अनुसार, आभासी डिजिटल परिसंपत्ति (Virtual Digital Asset–VDA) ऐसी सूचना, कोड, संख्या या टोकन है, जो क्रिप्टोग्राफिक माध्यमों अथवा अन्य किसी माध्यम से उत्पन्न होती है और मूल्य का डिजिटल प्रतिनिधित्व करती है। इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्तांतरित, संग्रहीत अथवा व्यापार किया जा सकता है, बशर्ते कि वह अधिनियम में निर्दिष्ट अपवादों के अंतर्गत न आती हो।
  • उदाहरण: क्रिप्टोकरेंसी (जैसे– बिटकॉइन एवं ईथर), नॉन-फंजिबल टोकन (NFTs), केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य ब्लॉकचेन-आधारित डिजिटल परिसंपत्तियाँ
  • भारत में वर्तमान नियामक स्थिति:
    • आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों के हस्तांतरण से होने वाली आय पर आयकर अधिनियम की धारा 115BBH के तहत 30% कर लगाया जाता है।
    • धारा 194S के अंतर्गत निर्दिष्ट VDA लेन-देन पर 1% स्रोत पर कर कटौती (TDS) लागू होती है।
    • आभासी डिजिटल परिसंपत्ति सेवा प्रदाताओं को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के अंतर्गत ‘रिपोर्टिंग इकाई’ का दर्जा प्राप्त है। इसलिए उन्हें अपने ग्राहक को जानें (KYC), अभिलेख संधारण तथा रिपोर्टिंग संबंधी दायित्वों का पालन करना अनिवार्य है।
    • वर्तमान में भारत में आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों के निर्गम, व्यापार, अभिरक्षा तथा उपभोक्ता संरक्षण को विनियमित करने वाला कोई समग्र कानून उपलब्ध नहीं है।

भारत को आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए नियामक ढाँचे की आवश्यकता क्यों है?

  • निवेशकों की सुरक्षा: निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए प्रकटीकरण मानदंड, ग्राहक परिसंपत्तियों का पृथक्करण, शिकायत निवारण तंत्र तथा धोखाधड़ी, साइबर अपराध एवं बाजार में हेरफेर से सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • नियामकीय स्पष्टता प्रदान करना: आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों की कानूनी स्थिति, नियामकों की जिम्मेदारियाँ तथा अनुपालन संबंधी दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा डिजिटल परिसंपत्ति बाजार का सुव्यवस्थित विकास सुनिश्चित होगा।
  • वित्तीय प्रणाली की अखंडता को सुदृढ़ करना: धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण, कर चोरी तथा अन्य अवैध वित्तीय गतिविधियों के विरुद्ध सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा सकेगा।
  • वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना: स्टेबलकॉइन, अत्यधिक सट्टेबाज़ी तथा क्रिप्टो बाजार और औपचारिक वित्तीय प्रणाली के बीच बढ़ते संबंधों से उत्पन्न प्रणालीगत जोखिमों का प्रभावी समाधान किया जा सकेगा।
  • उत्तरदायी नवाचार एवं वैश्विक मानकों के अनुरूपता को बढ़ावा: ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी पर आधारित नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए भारत के नियामक ढाँचे को वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की सिफारिशों सहित विकसित हो रहे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।

आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों (VDAs) के विनियमन की चुनौतियाँ

  • सीमाहीन एवं विकेंद्रीकृत पारिस्थितिकी तंत्र: सीमा-पार लेन-देन तथा विकेंद्रीकृत मंचों के कारण अधिकार-क्षेत्र, कराधान एवं कानून के प्रवर्तन से संबंधित चुनौतियाँ अधिक जटिल हो जाती हैं।
  • नियामकीय वर्गीकरण की चुनौती: यह निर्धारित करना कि विभिन्न आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों को मुद्रा, प्रतिभूति, वस्तु (कमोडिटी) अथवा एक पृथक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में माना जाए, एक प्रमुख नीतिगत चुनौती है।
  • नियामकीय समन्वय: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI), भारतीय वित्तीय आसूचना इकाई (FIU-IND) तथा अन्य एजेंसियों की भूमिकाओं का स्पष्ट निर्धारण कठिन है, क्योंकि विभिन्न आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों में अनेक प्रकार के वित्तीय साधनों की विशेषताएँ पाई जाती हैं।
  • वैश्विक समन्वय का अभाव: विभिन्न देशों द्वारा अपनाए गए अलग-अलग नियामकीय दृष्टिकोण नियामकीय मध्यस्थता को बढ़ावा देते हैं तथा सीमा-पार निगरानी एवं कानून के प्रवर्तन को जटिल बनाते हैं।
  • नवाचार एवं विनियमन के बीच संतुलन: ऐसा नियामक ढाँचा तैयार करना, जो निवेशकों की सुरक्षा एवं वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करे, साथ ही प्रौद्योगिकी नवाचार को भी बाधित न करे, एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत चुनौती है।

आगे की राह

  • आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए समर्पित कानून बनाना: विभिन्न प्रकार की आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों के लिए स्पष्ट कानूनी परिभाषाएँ, नियामकीय उत्तरदायित्व एवं अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं का निर्धारण किया जाना चाहिए।
  • जोखिम-आधारित नियामक ढाँचा अपनाना: विभिन्न आभासी डिजिटल परिसंपत्तियों की प्रकृति एवं उनसे जुड़े जोखिमों के आधार पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI), भारतीय वित्तीय आसूचना इकाई (FIU-IND) तथा अन्य सक्षम प्राधिकरणों की भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से निर्धारित की जानी चाहिए।
  • निवेशक संरक्षण को सुदृढ़ करना: सुदृढ़ प्रकटीकरण मानक, ग्राहक परिसंपत्तियों का पृथक्करण, नियमित लेखा-परीक्षण तथा प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना: भारत के घरेलू नियामक ढाँचे को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाया जाए तथा धन शोधन निरोध, कराधान एवं सीमा-पार कानून प्रवर्तन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया जाए।

Souce:
Indianexpress
Thehindubusinessline
Incometaxindia
PWC

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