FIU-भारत, I4C ने साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

संदर्भ: साइबर-धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के विरुद्ध भारत के संघर्ष को बल प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वित्तीय आसूचना इकाई-भारत (FIU-IND) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने सूचना साझाकरण और समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

समझौता ज्ञापन (MoU) की मुख्य विशेषताएं

  • समझौता ज्ञापन साइबर धोखाधड़ी से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने के लिए FIU-IND और I4C के बीच बेहतर सूचना साझाकरण और समन्वय हेतु एक फ्रेमवर्क प्रस्तुत करता है।
  • इसका उद्देश्य परिचालन संबंधी आसूचना विकसित करना और वित्तीय अपराधों को रोकने, डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा करने तथा संपत्ति की वसूली सक्षम बनाने हेतु जांच एजेंसियों को सहायता प्रदान करना है।
  • यह समझौता राष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी का पता लगाने के प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने के लिए मजबूत ‘फीडबैक तंत्र’ का प्रावधान करता है।

वित्तीय आसूचना इकाई-भारत (FIU-IND) के विषय में

  • वित्त मंत्रालय के अंतर्गत नवंबर 2004 में स्थापित, FIU-IND संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित सूचना प्राप्त करने, उनका विश्लेषण करने और प्रसार करने के लिए जिम्मेदार केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी है।
  • यह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करके धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।-
  • यह इकाई वित्तीय आसूचना भंडार के रूप में भी कार्य करती है और वित्तीय जांच में प्रवर्तन एजेंसियों का समर्थन करती है।

अभ्यास साइक्लोन-IV

संदर्भ: भारतीय सेना का एक दल अभ्यास साइक्लोन-IV में प्रतिभाग कर रहा है। यह अभ्यास 9 से 17 अप्रैल 2026 तक मिस्र के अंशास में आयोजित किया जा रहा है।

अभ्यास साइक्लोन-IV के बारे में

  • अभ्यास साइक्लोन-IV भारत और मिस्र के विशेष बलों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास का चौथा संस्करण है।
  • यह अभ्यास भारत और मिस्र के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग की निरंतरता है। यह भारत में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित तृतीय संस्करण (साइक्लोन-III) के सफल समापन के बाद आयोजित किया जा रहा है।
  • इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त मिशन नियोजन क्षमताओं को सुदृढ़ करना और विशेष अभियानों में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से अंतरसंचालनीयता में सुधार करना है।
  • प्रतिभागी सैनिक मरुस्थलीय और अर्ध-मरुस्थलीय क्षेत्रों में विशेष परिचालन युक्तियों, तकनीकों और प्रक्रियाओं पर केंद्रित प्रशिक्षण गतिविधियों की एक श्रृंखला संचालित करेंगे।

विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026

संदर्भ: विश्व स्वास्थ्य दिवस प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को मनाया जाता है। 2026 में यह दिवस “स्वास्थ्य के लिए एकजुट: विज्ञान के साथ खड़े हों” विषय के अंतर्गत मनाया जा रहा है, जो वैश्विक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हेतु वैज्ञानिक साक्ष्यों और सहयोग के महत्व पर बल देता है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह अभियान विज्ञान-आधारित समाधानों को बढ़ावा देने और ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में विश्वास बढ़ाने के लिए एक वर्ष लंबी वैश्विक पहल का शुभारंभ करता है। यह दृष्टिकोण मानव, पशु, पादप और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एकीकृत करता है।
  • यह वैज्ञानिक सहयोग और बहुपक्षीय साझेदारी पर बल देता है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय वन हेल्थ शिखर सम्मेलन (फ्रांस, 7 अप्रैल) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोगी केंद्रों के वैश्विक मंच (7–9 अप्रैल) जैसे प्रमुख आयोजनों द्वारा रेखांकित किया गया है। इसमें 80 से अधिक देशों के लगभग 800 संस्थान सम्मिलित हैं।
  • यह अभियान हितधारकों से साक्ष्य-आधारित ज्ञान के साथ जुड़ने, विज्ञान में विश्वास को बहाल करने और विज्ञान-आधारित समाधानों का समर्थन करने का आग्रह करता है, साथ ही वैश्विक जागरूकता पहलों के माध्यम से जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
  • यह जागरूकता गतिविधियों, अनुभव साझा करने और #StandWithScience एवं #WorldHealthDay जैसे हैशटैग का उपयोग करके डिजिटल सहभागिता के माध्यम से वैश्विक भागीदारी को भी प्रोत्साहित करता है।

विश्व स्वास्थ्य दिवस के विषय में

  • विश्व स्वास्थ्य दिवस प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को मनाया जाता है ताकि विश्व भर के लोगों को प्रभावित करने वाले ज्वलंत स्वास्थ्य मुद्दों की ओर विश्व समुदाय का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
  • यह तिथि वर्ष 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्थापना का प्रतीक है, जो प्रथम विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान लिए गए निर्णय के उपरांत अस्तित्व में आया था।
  • इस आयोजन का उद्देश्य बेहतर स्वास्थ्य मानकों, जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए प्रोत्साहित करना है, जो सभी के लिए उन्नत जीवन स्तर, वैश्विक कल्याण और स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के संयुक्त राष्ट्र के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है।

विश्व होम्योपैथी दिवस 2026

संदर्भ: होम्योपैथी के संस्थापक सैमुअल हैनीमैन की जयंती के उपलक्ष्य में 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 मनाया गया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • वर्ष 2026 का विषय “सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” है, जो समग्र, किफायती और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
  • यह अभियान होम्योपैथी की वैश्विक विश्वसनीयता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए साक्ष्य-आधारित विस्तार, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतर-विषयक सहयोग पर बल देता है।
  • भारत में होम्योपैथी का सबसे विशाल इकोसिस्टम विद्यमान है, जिसमें 3.45 लाख से अधिक चिकित्सक, लगभग 300 संस्थान और व्यापक अनुसंधान अवसंरचना शामिल है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल में इसके एकीकरण का समर्थन करती है।
  • प्रमुख पहलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म (आयुष ग्रिड), बेहतर प्रशिक्षण, नियामक सुधार और अनुसंधान-आधारित वैधीकरण के माध्यम से आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना शामिल है।
  • होम्योपैथी में सुलभता, ज्ञान के प्रसार और गुणवत्ता मानकों में सुधार के लिए नए डिजिटल उपकरण, प्रमाणन पाठ्यक्रम और अनुसंधान प्रकाशनों को लॉन्च किया गया।

विश्व होम्योपैथी दिवस के बारे में

  • विश्व होम्योपैथी दिवस प्रतिवर्ष जर्मन चिकित्सक और रसायनज्ञ डॉ. सैमुअल हैनीमैन के कार्यों को सम्मानित करने के लिए उनकी जयंती 10 अप्रैल को मनाया जाता है।
    • डॉ. सैमुअल हैनीमैन को होम्योपैथी के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।
  • वर्ष 1997 में, भारत सरकार ने चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. हैनीमैन के उल्लेखनीय योगदान को श्रेय देने हेतु 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस घोषित किया।
    • तब से यह दिन प्रतिवर्ष मनाया जा रहा है।
  • यह दिवस उपचार के प्रति होम्योपैथी के सौम्य, गैर-आक्रामक दृष्टिकोण और विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के समाधान हेतु इसकी क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।

होम्योपैथी क्या है?

  • होम्योपैथी, जिसे होम्योपैथिक चिकित्सा भी कहा जाता है, एक चिकित्सा पद्धति है जिसे 200 से अधिक वर्ष पूर्व जर्मनी में विकसित किया गया था।
  • होम्योपैथी चिकित्सा की एक समग्र प्रणाली है जो शरीर की स्व-उपचार प्रणालियों को उत्तेजित करने के लिए अत्यधिक सूक्ष्म प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग करती है और केवल रोग के स्थान पर व्यक्ति के उपचार पर ध्यान केंद्रित करती है।
  • यह दो गैर-परंपरागत सिद्धांतों पर आधारित है:
    • समान ही समान को ठीक करता है” (Like cures like): यह धारणा कि किसी रोग का उपचार उस पदार्थ द्वारा किया जा सकता है जो स्वस्थ व्यक्तियों में समान लक्षण उत्पन्न करता है।
    • न्यूनतम खुराक का नियम” (Law of minimum dose): यह धारणा कि औषधि की मात्रा जितनी कम होगी, उसकी प्रभावशीलता उतनी ही अधिक होगी। कई होम्योपैथिक उत्पाद इतने तनु होते हैं कि मूल पदार्थ का कोई भी अणु शेष नहीं बचता।

पोषण पखवाड़ा 2026

संदर्भ: हाल ही में, भारत सरकार ने एक व्यापक और अभिसरण-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के लिए पोषण संबंधी परिणामों में सुधार करने हेतु पोषण अभियान का शुभारंभ किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • इस वृहद मिशन के भाग के रूप में, पोषण पखवाड़ा 2026 (8वां संस्करण) 9 अप्रैल से 23 अप्रैल, 2026 तक मनाया जा रहा है, जिसका विषय “जीवन के प्रथम छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” है।
  • यह पहल पोषण को एक जन आंदोलन में परिवर्तित करने के सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है, जिसमें समुदायों, संस्थानों और परिवारों को सम्मिलित किया गया है।
  • इस अभियान का नेतृत्व महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और आंगनवाड़ी केंद्रों जैसे जमीनी स्तर के संस्थानों की भागीदारी है।

पोषण पखवाड़ा के बारे में

  • यह पोषण अभियान के अंतर्गत एक वार्षिक पोषण जागरूकता और सामुदायिक लामबंदी अभियान है, जिसे देश भर में पोषण संबंधी संकेतकों में सुधार के प्रयासों को तीव्र करने हेतु तैयार किया गया है।
  • यह कुपोषण से निपटने हेतु जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक भागीदारी के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
  • वर्ष 2026 का विषय इस बात पर बल देता है कि प्रारंभिक बाल्यावस्था, विशेष रूप से प्रथम 1,000 दिन (गर्भाधान से 2 वर्ष तक), मस्तिष्क के विकास, शारीरिक वृद्धि और जीवन भर के स्वास्थ्य परिणामों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधि है।
  • वैज्ञानिक साक्ष्य इस बात को रेखांकित करते हैं कि मस्तिष्क का 85% से अधिक विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है, जिससे प्रारंभिक पोषण, देखभाल और प्रोत्साहन अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

महत्व

  • विकास की महत्वपूर्ण अवधि: प्रथम 1,000 दिनों पर बल देना इस अवधि को एक “मैजिक विंडो” के रूप में मान्यता देता है, जहाँ उचित पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और भावनात्मक देखभाल आजीवन शारीरिक और मानसिक कल्याण को आकार देते हैं।
  • पोषण के प्रति समग्र दृष्टिकोण: यह पहल पोषण, स्वास्थ्य देखभाल, प्रारंभिक शिक्षा और देखभाल को एकीकृत करके खाद्य अंतर्ग्रहण से आगे बढ़कर कार्य करती है, जो पृथक हस्तक्षेपों के बजाय व्यापक बाल विकास सुनिश्चित करती है।
  • प्रौद्योगिकी-संचालित शासन: पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल उपकरण लाभार्थियों की वास्तविक समय में निगरानी करने में सक्षम बनाते हैं, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में सुधार होता है।
  • कुपोषण के दोहरे बोझ का समाधान: यह अभियान अल्पपोषण (बौनापन, एनीमिया) और बाल मोटापा जैसी उभरती समस्याओं, दोनों से निपटता है, तथा संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देता है।

आरोग्य वन पहल

संदर्भ: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास में पारिस्थितिक स्थिरता को एकीकृत करने के लिए ‘आरोग्य वन’ नामक एक नई पहल का शुभारंभ किया है।

आरोग्य वनपहल के बारे में

  • ‘आरोग्य वन’ पहल के अंतर्गत पारिस्थितिकी तंत्र के लचीलेपन को बढ़ाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे रिक्त भूमि खंडों पर विषयगत औषधीय वृक्षारोपण का विकास किया जाएगा।
  • प्रथम चरण में, 62.8 हेक्टेयर में फैले 17 भूमि खंडों को कवर करने वाली एक कार्ययोजना तैयार की गई है, जहाँ मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में लगभग 67,462 औषधीय वृक्ष लगाए जाएंगे।
  • लगभग 36 औषधीय वृक्ष प्रजातियों—जिनमें नीम, आंवला, जामुन, इमली, नींबू, गूलर और मौलसिरी शामिल हैं—की पहचान की गई है और उन्हें कृषि-जलवायु उपयुक्तता के अनुसार रोपा जाएगा।
  • दृश्यता और सार्वजनिक पहुंच को अधिकतम करने के लिए टोल प्लाजा, मार्ग के किनारे की सुविधाओं, इंटरचेंज और प्रमुख राजमार्ग खंडों के निकट वृक्षारोपण को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • इसके अतिरिक्त, उच्च उत्तरजीविता दर और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मानसून के मौसम के दौरान वृक्षारोपण हेतु लगभग 188 हेक्टेयर रिक्त भूमि को चिन्हित किया गया है।
  • यह पहल स्वदेशी औषधीय वनस्पतियों के संरक्षण के साथ-साथ आयुर्वेद जैसी चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के अनुरूप है।

महत्व

  • जैव विविधता संवर्धन: औषधीय प्रजातियों का वृक्षारोपण परागणकों, पक्षियों और सूक्ष्मजीवों को सहायता प्रदान करके सड़क के किनारे के पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करता है, जिससे पारिस्थितिक लचीलेपन में सुधार होता है।
  • हरित गलियारों (ग्रीन कॉरिडोर) का निर्माण: यह पहल राष्ट्रीय राजमार्गों को हरित गलियारों में परिवर्तित करती है, जो बुनियादी ढांचे के विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ एकीकृत करती है।
  • पारंपरिक चिकित्सा को प्रोत्साहन: औषधीय पौधों पर ध्यान केंद्रित करके, यह कार्यक्रम आयुर्वेद को बढ़ावा देता है और भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करता है।
  • शैक्षिक और जागरूकता मूल्य: यह वृक्षारोपण ‘जीवंत भंडार’ के रूप में कार्य करते हैं, जो औषधीय पौधों और आधुनिक जीवन में उनकी प्रासंगिकता के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाते हैं।
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