शहरी विकास बजट में गिरावट का मुद्दा

संदर्भ: आवास और शहरी मामलों की विभाग-संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने संसद में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें शहरी विकास कार्यक्रमों के लिए घटते वित्तीय समर्थन पर चिंता व्यक्त की गई है।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • समिति ने तीव्र शहरीकरण के बावजूद शहरी विकास के लिए बजटीय आवंटन में गिरावट पर चिंता व्यक्त की और वर्ष 2047 तक शहरी बुनियादी ढांचे की जरूरतों के एक नए राष्ट्रीय मूल्यांकन की सिफारिश की।
  • रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का आवंटन 2026-27 में कुल बजट अनुमान से घटकर 1.6% रह गया है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम है।
  • समिति ने अवलोकन किया कि यह कमी बढ़ते शहरीकरण और आवास, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता प्रणाली और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं जैसे शहरी बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग के बावजूद हो रही है।
  • पैनल ने मंत्रालय द्वारा बजटीय अनुमानों और वास्तविक व्यय के बीच एक महत्वपूर्ण अंतराल को भी रेखांकित किया।
  • आवंटित निधियों के कम उपयोग के कारण मंत्रालय ने 2024-25 में ₹32,291.34 करोड़ की राशि छोड़ दी।
  • समिति ने यह भी बताया कि 2025-26 के बजट का 28.38% हिस्सा वित्तीय वर्ष के अंतिम 39 दिनों के दौरान खर्च नहीं किया गया था, जो खराब व्यय योजना और विलंबित कार्यान्वयन को दर्शाता है।
  • समिति ने चेतावनी दी कि नए उभरते शहरी क्षेत्रों को संतुलित और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए नियोजित निवेश की आवश्यकता है।
  • समिति ने उल्लेख किया कि निधि आवश्यकताओं का सटीक पूर्वानुमान न लगाने और राज्य स्तर पर कमजोर कार्यान्वयन क्षमता के कारण बार-बार बजट संशोधन और धन छोड़ने की स्थिति बन रही है।
  • संसदीय पैनल ने सिफारिश की कि सरकार ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप, 2047 तक भारत की शहरी बुनियादी ढांचे की जरूरतों का मूल्यांकन करने के लिए एक नई उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन करे।

महिलाओं की स्थिति पर आयोग का 70वाँ सत्र

संदर्भ: हाल ही में, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महिलाओं की स्थिति पर आयोग (Commission on the Status of Women – CSW-70) के 70वें सत्र में सामान्य चर्चा के दौरान भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया।

संबोधन के मुख्य अंश:

  • मंत्री ने महिला नेतृत्व में विकास को बढ़ावा देने में भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला और लैंगिक समानता तथा न्याय तक पहुंच के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दोहराया।
  • उन्होंने उल्लेख किया कि “सबका साथ, सबका विकास” का दर्शन समावेशी और महिला नेतृत्व वाली प्रगति का आधार है।
  • लगभग 90 लाख स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की 10 करोड़ से अधिक महिलाओं ने नेतृत्व और उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बदल दिया है।
  • मंत्री ने बताया कि अटल इनक्यूबेशन केंद्रों के सहयोग से 1,000 से अधिक स्टार्टअप्स का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।
  • सक्रिय कंपनियों में 8 लाख से अधिक महिलाएं निदेशक के रूप में कार्यरत हैं, जो कॉर्पोरेट भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं।
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA) के तहत 2.5 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं ने डिजिटल प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
  • मंत्री ने रेखांकित किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • उन्होंने कहा कि पालना योजना के तहत लगभग 39,000 बच्चे गुणवत्तापूर्ण क्रेच (शिशु गृह) सुविधाओं से लाभान्वित हो रहे हैं।
  • मंत्री ने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने 2.9 करोड़ ग्रामीण घरों में से 72% से अधिक का स्वामित्व पूर्ण या संयुक्त रूप से महिलाओं के पास है।

महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW) के बारे में:

  • महिलाओं की स्थिति पर आयोग (CSW), संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) के तहत प्रमुख वैश्विक अंतर-सरकारी निकाय है, जो विशेष रूप से लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित है।
  • वर्ष 1946 में स्थापित, यह निकाय वैश्विक मानक निर्धारित करता है, प्रगति की निगरानी करता है और महिलाओं तथा लड़कियों के अधिकारों को बढ़ावा देता है।
  • CSW बीजिंग घोषणा और प्लेटफॉर्म फॉर एक्शन के कार्यान्वयन की समीक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो लैंगिक समानता के लिए सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक फ्रेमवर्क में से एक है।

प्रोजेक्ट गंगा/ GANGA

संदर्भ: उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गति वाली ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी का विस्तार करने, डिजिटल उद्यमिता को बढ़ावा देने और ‘डिजिटल अंतराल’ को कम करने के लिए ‘प्रोजेक्ट गंगा’ लॉन्च किया।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य परिवर्तन आयोग के माध्यम से हिंदुजा समूह की सहायक कंपनी ‘वन ओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड’ के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • इस पहल का लक्ष्य अगले दो से तीन वर्षों के भीतर राज्य भर के 20 लाख से अधिक घरों में उच्च गति वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
  • इस कार्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्रों में एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगारों का सृजन होने की उम्मीद है।
  • यह परियोजना डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और गांवों में प्रौद्योगिकी-संचालित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है।

प्रोजेक्ट GANGA (विकास और उन्नति के लिए सरकारी सहायता प्राप्त नेटवर्क) के बारे में:

  • इस पहल का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार करना है।
  • यह परियोजना दूरस्थ गांवों तक विश्वसनीय इंटरनेट पहुंच पहुंचाना चाहती है, जिससे ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-कॉमर्स, डिजिटल कौशल विकास और डिजिटल सामग्री निर्माण जैसी डिजिटल सेवाएं सक्षम हो सकें।
  • इस पहल के तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी और संबंधित सेवाएं प्रदान करने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर लगभग 8,000-10,000 स्थानीय उद्यमियों को डिजिटल सेवा प्रदाता (DSP) के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • यह कार्यक्रम समावेशी डिजिटल उद्यमिता को बढ़ावा देता है, जिसमें इन डिजिटल उद्यमियों में महिलाओं की लगभग 50% भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है।
  • चयनित उद्यमियों को ग्रामीण डिजिटल नेटवर्क संचालित करने के लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, नेटवर्क बुनियादी ढांचा समर्थन और आधुनिक डिजिटल तकनीकों तक पहुंच प्राप्त होगी।
  • इस परियोजना से ग्रामीण डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने, प्रौद्योगिकी-आधारित रोजगार के अवसर पैदा होने और उत्तर प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों सहित अल्पविकसित जिलों में आर्थिक विकास को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
  • यह परियोजना गंगा नदी से प्रेरित है, जो उत्तर भारत में लाखों लोगों को जोड़ती है और उनका पोषण करती है।

विशाखापत्तन में हाई-एनर्जी प्रोटोन एक्सेलरेटर फैसिलिटी

संदर्भ: भारत ने विशाखापत्तनम में एक हाई एनेर्जी प्रोटोन एक्सेलरेटर फैसिलिटी स्थापित करने की योजना बनाई है, ताकि ‘त्वरक-संचालित प्रणालियों’ को समर्थन दिया जा सके और देश के दीर्घकालिक थोरियम-आधारित परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सके।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • भारत सरकार देश के दीर्घकालिक परमाणु अनुसंधान रोडमैप के हिस्से के रूप में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक उच्च-ऊर्जा प्रोटॉन त्वरक सुविधा स्थापित करने की योजना बना रही है।
  • प्रस्तावित सुविधा भारत की त्वरक-संचालित प्रणालियों (ADS) का एक प्रमुख घटक होगी।
  • यह प्रणाली भारत को परमाणु ऊर्जा उत्पादन करने के लिए अपने विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करने में सहायता करेगी।
  • त्वरक विकसित करने में शामिल तकनीक जटिल और महंगी है, इसलिए इस सुविधा को पूरी तरह परिचालन में आने में कई दशक लग सकते हैं।
  • सरकार ने विशाखापत्तनम का चयन इसलिए किया क्योंकि इस क्षेत्र में एक मजबूत तकनीकी और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र है, और समुद्र से निकटता उच्च-ऊर्जा त्वरक प्रणालियों के संचालन के लिए आवश्यक ‘शीतलक जल’ की विश्वसनीय आपूर्ति करेगी।

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में भूमिका:

  • प्रस्तावित प्रोटॉन त्वरक विखंडन अभिक्रियाओं के माध्यम से उच्च-ऊर्जा न्यूट्रॉन उत्पन्न करेगा।
  • यह प्रक्रिया थोरियम को यूरेनियम ईंधन में परिवर्तित कर देगी, जिसका उपयोग परमाणु रिएक्टरों में किया जा सकता है।
  • यह तकनीक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के पास विश्व के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है।
  • त्वरक-संचालित प्रणालियों के विकास से वैकल्पिक परमाणु ईंधन चक्रों के माध्यम से भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।

डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म

संदर्भ: वी. ओ. चिदंबरनार पत्तन प्राधिकरण, पत्तन प्रबंधन के लिए ‘डिजिटल ट्विन’ प्लेटफॉर्म लागू करने वाला भारत का पहला पत्तन प्राधिकरण बन गया है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • यह पहल भारत में प्रौद्योगिकी-संचालित समुद्री प्रबंधन और ‘स्मार्ट पोर्ट’ संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • वी.ओ. चिदंबरनार (VOC) पत्तन तमिलनाडु के थूथुकुडी (पूर्व में तूतीकोरिन) में स्थित है, जो मन्नार की खाड़ी के सामने भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है।
  • यह प्लेटफॉर्म पत्तन के बुनियादी ढांचे, परिचालन परिसंपत्तियों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की एक रियल टाइम आभासी प्रतिकृति तैयार करता है।

पत्तन प्रबंधन में डिजिटल ट्विन प्रौद्योगिकी:

  • डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म एक सॉफ्टवेयर परिवेश है जो किसी भौतिक वस्तु, प्रक्रिया या प्रणाली की वास्तविक समय की आभासी प्रतिकृति बनाता और प्रबंधित करता है।
  • एक स्थिर 3D मॉडल या मानक सिमुलेशन के विपरीत, एक डिजिटल ट्विन डेटा के निरंतर, द्वि-मार्गी प्रवाह के माध्यम से अपने भौतिक समकक्ष से गतिशील रूप से जुड़ा होता है।
  • यह प्रणाली पत्तन संचालन में बेहतर परिचालन दृश्यता, पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण और डेटा-संचालित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
  • यह प्लेटफॉर्म बर्थ अधिभोग, जहाजों की आवाजाही, क्रेन के उपयोग और यार्ड क्षमता सहित पत्तन की गतिविधियों की लाइव निगरानी प्रदान करता है।
  • यह प्रणाली वास्तविक समय में सूचना साझाकरण के माध्यम से विभिन्न परिचालन विभागों को कुशलतापूर्वक समन्वय करने में सहायता करती है।
  • इस पहल का लक्ष्य जहाजों के टर्नअराउंड समय को 25% तक कम करना और दक्षता, सुरक्षा तथा सततता में सुधार करना है।

प्लेटफॉर्म में प्रयुक्त प्रौद्योगिकियाँ:

  • यह प्रणाली इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसर, जीपीएस ट्रैकिंग, लिडार (LiDAR) मैपिंग, ड्रोन इमेजिंग और सीसीटीवी नेटवर्क जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करती है।
  • ये प्रौद्योगिकियाँ लगातार वास्तविक समय के परिचालन डेटा को एकत्र करती हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रेषित करती हैं।
  • प्रणाली कुशल पत्तन संचालन में सहायता करने वाले निष्कर्ष प्रदान करने के लिए एकत्र किए गए डेटा का विश्लेषण करती है।

राष्ट्रीय दिव्यांगजन आयोग का प्रस्ताव

संदर्भ: हाल ही में, एक संसद सदस्य ने दिव्यांगजनों के अधिकारों की रक्षा हेतु संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए एक राष्ट्रीय दिव्यांगजन आयोग (National Commission for Persons with Disabilities) की स्थापना का प्रस्ताव रखा।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • एक सांसद ने भारत में दिव्यांगजनों के अधिकारों और कल्याण के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक स्थायी संस्थागत ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया।
  • प्रस्ताव में दिव्यांगजनों के सामने आने वाली समस्याओं के समाधान हेतु वर्तमान ‘आयुक्त प्रणाली’ के स्थान पर एक अधिक सशक्त संस्थागत तंत्र लाने का सुझाव दिया गया।

वर्तमान संस्थागत ढांचा:

  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में एक मुख्य दिव्यांगजन आयुक्त और दो संबद्ध आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान है।
  • आयुक्त प्रणाली दिव्यांगजनों के अधिकारों और कल्याण से संबंधित प्रावधानों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए उत्तरदायी है।
  • संसद सदस्य ने कहा कि दिव्यांगजनों को विविध चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जिनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वर्तमान प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय आयोग के लिए प्रस्ताव:

  • प्रस्ताव में एक पूर्णकालिक ‘राष्ट्रीय दिव्यांगजन आयोग’ की स्थापना की सिफारिश की गई है।
  • यह आयोग दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर कार्य करेगा।
  • प्रस्तावित निकाय नीति निर्माण, सरकारी योजनाओं की निगरानी और बजटीय आवंटन से संबंधित सिफारिशें करने जैसे कार्य करेगा।
  • आयोग दिव्यांगजनों के अधिकारों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक विधायी उपाय भी सुझाएगा।
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