लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव
संदर्भ: हाल ही में विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें उन पर सदन की कार्यवाही के संचालन में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया गया था।
अन्य संबंधित जानकारी:
- अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव, मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव से भिन्न होता है।
- यह विषय संसदीय प्राधिकार, पीठासीन अधिकारी की तटस्थता और भारत के संवैधानिक ढांचे के भीतर लोकतांत्रिक निरीक्षण के बीच संतुलन को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
संवैधानिक एवं संसदीय प्रावधान:
- अनुच्छेद 94: संविधान का यह अनुच्छेद लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद की रिक्ति, त्यागपत्र और पद से हटाए जाने से संबंधित है।
- अनुच्छेद 94(c): इसके अंतर्गत अध्यक्ष को ‘प्रभावी बहुमत’ (Effective Majority) द्वारा हटाया जा सकता है, अर्थात लोकसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा।
- अनुच्छेद 96: यह प्रावधान करता है कि जब अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तब वह अध्यक्षता नहीं कर सकता, हालांकि वह सदन की कार्यवाही में भाग ले सकता है और प्रथम दृष्टया मत दे सकता है।
- लोकसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के नियम 200-203 में विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जो सूचना (नोटिस), प्रस्ताव की स्वीकार्यता, चर्चा और मतदान को विनियमित करते हैं।
हटाने की प्रक्रिया:
- कोई भी सदस्य अध्यक्ष को हटाने के प्रस्ताव की सूचना लिखित रूप में लोकसभा के महासचिव को दे सकता है।
- प्रस्ताव पर विचार करने से पूर्व 14 दिनों की पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।
- नियत तिथि पर संकल्प पेश करने की अनुमति मांगी जाती है, जिसके लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। यदि समर्थन कम हो, तो प्रस्ताव स्वतः व्यपगत हो जाता है।
- चर्चा (बहस) पूर्णतः संकल्प में लगाए गए विशिष्ट आरोपों तक ही सीमित रहती है; प्रस्ताव का पाठ सटीक, स्पष्ट और तर्कयुक्त होना चाहिए, इसमें मानहानिकारक भाषा नहीं होनी चाहिए।
- चर्चा के पश्चात, सदन में मतदान होता है। निष्कासन तभी सफल माना जाता है जब लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों का बहुमत (प्रभावी बहुमत) संकल्प का समर्थन करे; अन्यथा, प्रस्ताव विफल हो जाता है और अध्यक्ष अपने पद पर बना रहता है।
पूर्व दृष्टांत:
- स्वतंत्रता के बाद से अब तक केवल तीन अध्यक्षों .वी. मावलंकर (1954), सरदार हुकम सिंह (1966) और बलराम जाखड़ (1987) के विरुद्ध प्रस्ताव सदन में पेश किए गए हैं।
- अभी तक किसी भी अध्यक्ष को इस प्रक्रिया के माध्यम से नहीं हटाया गया है।
रक्षा सहयोग पर भारत-ग्रीस घोषणा
संदर्भ: हाल ही में भारत और ग्रीस ने दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के लिए ‘संयुक्त आशय घोषणा’ पर हस्ताक्षर किए।
अन्य संबंधित जानकारी:
- यह घोषणा भारत-ग्रीस सामरिक साझेदारी की पुष्टि करती है, जो शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और परस्पर सम्मान के साझा मूल्यों पर आधारित है, तथा दोनों देशों के बीच बढ़ते समन्वय को प्रतिबिंबित करती है।
- यह साझेदारी भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को ‘एजेंडा 2030’ के तहत ग्रीस के रक्षा आधुनिकीकरण के साथ संरेखित करती है, जो आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत रक्षा इकोसिस्टम की दिशा में साझा प्रयास का संकेत देती है।
घोषणा के मुख्य बिंदु
- यह घोषणा रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी सहयोग, औद्योगिक साझेदारी एवं क्षमता विकास तथा सैन्य-से-सैन्य जुड़ाव में सहयोग के विस्तार हेतु एक पाँच-वर्षीय कार्ययोजना के आधार के रूप में कार्य करती है।
- दोनों पक्षों ने ‘द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना 2026’ पर भी सहयोग किया, जो उनके सशस्त्र बलों के बीच भविष्य में होने वाले प्रशिक्षण, अभ्यास और संस्थागत समन्वय की रूपरेखा तैयार करती है।
- समुद्री सहयोग पर विशेष बल दिया गया, जिसमें सूचना साझाकरण और समुद्री क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन’ (IFC-IOR) में एक ग्रीक संपर्क अधिकारी की नियुक्ति करना भी शामिल है।
- IFC-IOR एक क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा केंद्र है जिसे भारत सरकार द्वारा दिसंबर 2018 में स्थापित किया गया था। गुरुग्राम में भारतीय नौसेना द्वारा संचालित, इस केंद्र का उद्देश्य सहयोगात्मक सूचना साझाकरण और उन्नत स्थितिजन्य जागरूकता के माध्यम से समुद्री सुरक्षा और संरक्षा को बढ़ावा देना है।
रणनीतिक महत्व
- यह पहल शांति, स्थिरता, नौवहन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित व्यवस्था के साझा मूल्यों पर आधारित भारत-ग्रीस रणनीतिक अभिसरण का मार्ग प्रशस्त करती है।
- यह भूमध्य सागर और यूरोप में भारत के रक्षा कूटनीति पदचिह्न का विस्तार करती है, जबकि ग्रीस को हिंद-प्रशांत सुरक्षा संरचना के साथ अधिक निकटता से जुड़ने में सक्षम बनाती है।
- ‘आत्मनिर्भर भारत’ को ग्रीक सुधारों के साथ जोड़कर, यह घोषणा दोनों देशों को आयात पर निर्भरता कम करने, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा स्टार्टअप्स को समर्थन देने और यूरोपीय एवं हिंद-प्रशांत भागीदारों के साथ त्रिकोणीय सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित करती है।
BIOFACH 2026 में भारत ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ नामित
संदर्भ: जर्मनी के नूर्नबर्ग में 10 से 13 फरवरी 2026 तक आयोजित ‘BIOFACH 2026’ में भारत को “कंट्री ऑफ द ईयर’ नामित किया गया है।
अन्य संबंधित जानकारी:
- वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने इस आयोजन में भारत की भागीदारी का नेतृत्व किया।
- भारत की भागीदारी ने देश की समृद्ध कृषि विरासत और जैविक उत्पादों के एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में इसकी शक्ति को रेखांकित किया।
- 14 वर्षों के अंतराल के बाद, भारत का जैविक कृषि क्षेत्र एक बार फिर ‘BIOFACH 2026’ में आकर्षण का केंद्र बनने के लिए तैयार है।
BIOFACH के बारे में:
- BIOFACH (जर्मनी) विशेष रूप से जैविक उत्पादों और टिकाऊ कृषि के लिए समर्पित विश्व की सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली प्रदर्शनी है।
- यह एक वैश्विक बाजार और नीतिगत संवाद मंच के रूप में कार्य करता है, जो उत्पादकों, निर्यातकों, खुदरा विक्रेताओं, प्रमाणन निकायों और शोधकर्ताओं को एक साथ जोड़ता है।
- यह आयोजन संधारणीयता, पारिस्थितिकी-अनुकूल उपभोग और ट्रेस करने योग्य खाद्य प्रणालियों की ओर हो रहे वैश्विक स्थानांतरण को प्रतिबिंबित करता है।
एपीडा (APEDA) के बारे में:
- यह एपीडा अधिनियम, 1985 के तहत स्थापित एक सांविधिक निकाय है।
- यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NAB) के सचिवालय के रूप में भी कार्य करता है।
- इसके मुख्य कार्यों में निर्यात प्रोत्साहन, गुणवत्ता प्रमाणन और जैविक उत्पादकों एवं किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सहायता प्रदान करना शामिल है।
विश्व रेडियो दिवस
संदर्भ: हाल ही में 13 फरवरी को विश्व भर में ‘विश्व रेडियो दिवस’ मनाया गया।
दिवस के बारे में:
- इसकी घोषणा 2011 में यूनेस्को द्वारा की गई थी और 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा इसे अपनाया गया था।
- यह 1946 में ‘यूनाइटेड नेशंस रेडियो’ की स्थापना की स्मृति में मनाया जाता है।
- वर्ष 2026 का विषय: “रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: AI एक उपकरण है, आवाज़ नहीं”।
भारत में रेडियो:
- भारत के पहले ‘कम्युनिटी रेडियो स्टेशन’ का उद्घाटन 1 फरवरी 2004 को लालकृष्ण आडवाणी द्वारा किया गया था।
- उत्तर प्रदेश के अमरोहा के राम सिंह बौद्ध को “रेडियो मैन ऑफ इंडिया” कहा जाता है। उन्हें 2025 में 1,257 रेडियो के सबसे बड़े संग्रह के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता दी गई।
रेडियो का महत्व
- रेडियो विशेष रूप से दूरस्थ, ग्रामीण और आपदा प्रवण क्षेत्रों में सबसे सुलभ और किफायती संचार माध्यम बना हुआ है।
- लोकतांत्रिक परिचर्चा और सांस्कृतिक बहुलता का समर्थन करते हुए, रेडियो स्थानीय बोलियों और सामुदायिक विमर्श को प्रोत्साहित करने वाला एक समावेशी माध्यम सिद्ध होता है।
- महामारियों, संघर्षों और प्राकृतिक आपदाओं जैसे संकट के समय, रेडियो विश्वसनीय और रियल टाइम जानकारी प्रदान करता है।
