आईटी रेजिलिएंस इंडेक्स (ITRI)
संदर्भ: SEBI ने बाजार अवसंरचना संस्थानों (MIIs) के महत्वपूर्ण IT सिस्टम के लचीलेपन को बढ़ाने और व्यवधान उत्पन्न होने से पहले उभरती कमजोरियों की पहचान करने के लिए आईटी रेजिलिएंस इंडेक्स (ITRI) फ्रेमवर्क पेश किया है।
आईटी रेजिलिएंस इंडेक्स (ITRI) के बारे में
- ITRI एक सिस्टम-आधारित, 100-अंकीय सूचकांक है, जिसका उपयोग स्टॉक एक्सचेंजों, क्लियरिंग कॉरपोरेशन और डिपॉजिटरी के महत्वपूर्ण IT सिस्टम की मजबूती का आकलन करने के लिए किया जाएगा।
- यह नौ मापदंडों का आकलन करता है:
- उपलब्धता — 20%
- सुरक्षा— 20%
- अखंडता— 10%
- अभिशासन— 10%
- विश्वसनीयता एवं निगरानी — 10%
- व्यवसाय निरंतरता— 10%
- मॉड्यूलरिटी एवं लचीलापन— 10%
- स्केलेबिलिटी— 5%
- अन्य पहलू, जिसमें घटना प्रबंधन शामिल है — 5%
- सूचकांक की गणना प्रत्येक छमाही के अंत के 60 दिनों के भीतर की जाएगी। इसमें लगातार दो छमाहियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाएगा तथा सुधारात्मक कार्रवाई प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति (SCOT) और गवर्निंग बोर्ड को प्रस्तुत की जाएगी।
- इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम (ISF) विस्तृत उप-मापदंडों, मापन मानदंडों, सीमाओं (Thresholds) और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को अंतिम रूप देगा।
- MIIs को एक अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) स्थापित करना होगा, ताकि ITRI के मापदंडों में होने वाली ऐसी गिरावट का पता लगाया जा सके, जो प्रदर्शन संबंधी समस्याओं, सिस्टम की धीमी गति या व्यवधान का कारण बन सकती है।
- EWS और सेवा प्रदायगी की रियल-टाइम निगरानी सहित इस फ्रेमवर्क को 28 फरवरी 2027 तक लागू किया जाना है। पहली ITRI गणना 31 मार्च 2027 को समाप्त होने वाली छमाही को कवर करेगी। MIIs ने इस फ्रेमवर्क का बीटा संस्करण पहले ही लागू कर दिया है।
ITRI का महत्त्व
- सक्रिय जोखिम प्रबंधन: महत्वपूर्ण IT सिस्टम की कमजोरियों की शुरुआती स्तर पर पहचान करने और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है।
- बेहतर परिचालन लचीलापन: प्रौद्योगिकी संबंधी व्यवधानों के दौरान प्रतिभूति बाजार के महत्वपूर्ण कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने में सहायता करता है।
- मानकीकृत नियामकीय आकलन: एक समान, सिस्टम-आधारित स्कोरिंग फ्रेमवर्क MIIs के IT लचीलेपन के आकलन को अधिक वस्तुनिष्ठ और तुलनीय बनाता है।
खगंतक –243 लंबी दूरी का ग्लाइड बम
संदर्भ: भारतीय वायु सेना (IAF) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं विकसित खगंतक-243 लंबी दूरी की ग्लाइड बम (LRGB) का ड्रॉप परीक्षण सफलतापूर्वक किया है। इस परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया गया।
खगंतक-243: प्रमुख विशेषताएँ
- प्रकार: यह 300 किलोग्राम श्रेणी का, हवा से प्रक्षेपित, लंबी दूरी का स्टैंड-ऑफ सटीक-निर्देशित ग्लाइड बम है, जिसे काफी दूरी से जमीनी लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है।
- मारक क्षमता: लगभग 12 किलोमीटर की ऊँचाई से छोड़े जाने पर इसकी रिपोर्टेड मारक दूरी 140 किलोमीटर से अधिक है।
- वारहेड: इसमें लगभग 125 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री वाला Mk-81 सामान्य प्रयोजन ब्लास्ट-फ्रैगमेंटेशन वारहेड लगाया गया है।
- डिजाइन: इसमें बेलनाकार बॉडी, मध्य भाग में स्विवेल-प्रकार के ग्लाइड विंग और पिछले हिस्से में पाँच नियंत्रण सतहें हैं। ये वायुगतिकीय लिफ्ट उत्पन्न करती हैं और बम को छोड़े जाने के बाद लक्ष्य की ओर ग्लाइड करने में सक्षम बनाती हैं।
- विकास: इसे नागपुर स्थित जेएसआर डायनामिक प्राइवेट लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (DcPP) मॉडल के तहत संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। JSR Dynamics बम बॉडी और नियंत्रण प्रणालियाँ उपलब्ध कराती है, जबकि BEL इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मार्गदर्शन उप-प्रणालियों में योगदान देता है।
- विमान के साथ एकीकरण: Su-30MKI को परीक्षण के लिए प्रारंभिक प्लेटफॉर्म के रूप में चिन्हित किया गया है। भविष्य में इसे अन्य लड़ाकू विमानों के साथ भी एकीकृत करने की योजना है।
- ग्लाइड बम: पारंपरिक फ्री-फॉल बम के विपरीत, ग्लाइड बम छोड़े जाने के बाद अपने स्वयं के प्रणोदन का उपयोग नहीं करता। यह लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए वायुगतिकीय लिफ्ट और नियंत्रण सतहों का उपयोग करता है, जिससे स्टैंड-ऑफ दूरी से लक्ष्य पर हमला करना संभव होता है।
महत्त्व
- स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता में वृद्धि: लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी से लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम बनाता है, जिससे शत्रु की वायु-रक्षा प्रणालियों के संपर्क में आने का जोखिम कम होता है।
- स्वदेशी सटीक आयुध क्षमता को मजबूती: भारत की सटीक-प्रहार क्षमता में स्वदेशी रूप से विकसित लंबी दूरी के हवा-से-सतह हथियार को शामिल करता है।
- रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: जेएसआर डायनामिक और BEL की साझेदारी उन्नत हथियारों के विकास में सार्वजनिक-निजी सहयोग को दर्शाती है और आयातित सटीक-निर्देशित आयुधों पर निर्भरता कम करने के आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को समर्थन देती है।
छठे विश्व नोमैड गेम्स
संदर्भ: छठे विश्व नोमैड गेम्स का आयोजन 31 अगस्त से 6 सितंबर 2026 तक किर्गिज़स्तान में किया जा रहा है। इनका उद्घाटन समारोह बिश्केक में तथा मुख्य आयोजन इस्सिक-कुल क्षेत्र में हो रहा है।
विश्व नोमैड गेम्स के बारे में
- विश्व नोमैड गेम्स (WNG) पारंपरिक खेलों, क्रीड़ाओं और खानाबदोश लोगों की सांस्कृतिक विरासत को समर्पित द्विवार्षिक अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल प्रतियोगिता है।
- इसकी पहल 2012 की बिश्केक घोषणापत्र के बाद किर्गिज़स्तान से हुई थी। यह घोषणा तुर्क राज्यों के प्रमुखों के शिखर सम्मेलन में किर्गिज़स्तान, कज़ाखस्तान, अज़रबैजान और तुर्किये द्वारा अपनाई गई थी।
- पहला विश्व नोमैड गेम्स2014 में किर्गिज़स्तान के चोल्पोन-अता में आयोजित किया गया था। इसके बाद किर्गिज़स्तान (2016 और 2018), इज़निक, तुर्किये (2022) और अस्ताना, कज़ाखस्तान (2024) में इनका आयोजन हुआ। इसके बाद 2026 में यह आयोजन पुनः किर्गिज़स्तान में हो रहा है।
- इन खेलों का उद्देश्य पारंपरिक खानाबदोश खेलों और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रचार-प्रसार करना है। इसमें आधुनिकीकरण के कारण विलुप्ति के खतरे में पड़ी स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और परंपराओं को भी शामिल किया गया है।
छठे विश्व नोमैड गेम्स की प्रमुख विशेषताएँ एवं महत्त्व
- खेल: प्रतियोगिता में 43 विधाएँ शामिल हैं। इनमें गोरेश, कुश्ती (कुराश) और मंगोल बुख जैसे पारंपरिक कुश्ती के रूप; कोक बोरू, केकपार और एर एनिश जैसे घुड़सवारी खेल; पारंपरिक तीरंदाजी तथा तोगुज़ कोर्गूल, मंगला, ओवेयर, चुको और ऑर्डो जैसे बौद्धिक/पारंपरिक खेल शामिल हैं। इसके अतिरिक्त रस्साकशी और स्ट्रॉन्गमैन प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं।
- त्रि-आयामी कार्यक्रम: खेलों का आयोजन खेल, संस्कृति और विज्ञान तीन क्षेत्रों के आधार पर किया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रम में यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त “इको ऑफ नोमैड्स” अंतरराष्ट्रीय जातीय गीत महोत्सव, नोमैड फेस्ट, हेरिटेज ऑफ नोमैड्स, आर्ट लैब और एथनो-बाज़ार शामिल हैं। विज्ञान कार्यक्रम में खानाबदोश विरासत, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक संवाद पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- भारत की भागीदारी: भारत ने विश्व खानाबदोश खेलों में अब तक का अपना सबसे बड़ा 87 सदस्यीय दल भेजा है। इसमें 73 खिलाड़ी, 10 सांस्कृतिक प्रतिनिधि और वैज्ञानिक कार्यक्रम के 4 प्रतिभागी शामिल हैं। भारतीय खिलाड़ी पारंपरिक कुश्ती, घुड़सवारी खेलों, तीरंदाजी तथा पारंपरिक बोर्ड/रणनीतिक खेलों में भाग ले रहे हैं।
- महत्त्व: ये खेल अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करते हैं। साथ ही, ये अंतर-सांस्कृतिक संवाद और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देते हैं, जिसमें मध्य एशियाई देशों के साथ भारत का जुड़ाव भी शामिल है।
राष्ट्रीय खेल दिवस 2026
संदर्भ: राष्ट्रीय खेल दिवस प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में उनकी 121वीं जयंती मनाई जा रही है।
राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 की प्रमुख विशेषताएँ
- विषय: “खेलेगा भारत, जीतेगा भारत”, जिसमें विशेष रूप से युवाओं के बीच खेलों में भागीदारी, फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
- तीन दिवसीय अभियान: राष्ट्रीय खेल दिवस 2026 के अवसर पर 28–30 अगस्त तक देशव्यापी तीन दिवसीय अभियान आयोजित किया गया। यह अभियान “Tribute, Play and Move” (श्रद्धांजलि, खेल और सक्रियता) की अवधारणा पर आधारित था। इसका उद्देश्य मेजर ध्यानचंद को श्रद्धांजलि देना, खेलों में भागीदारी को प्रोत्साहित करना और शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देना था।
- “एक घंटा खेल के मैदान में”: इस देशव्यापी पहल के तहत नागरिकों, विशेषकर युवाओं को कम-से-कम एक घंटा खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए समर्पित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। यह पहल फिट इंडिया मूवमेंट को मजबूत करती है।
राष्ट्रीय खेल दिवस के बारे में
- राष्ट्रीय खेल दिवस की शुरुआत 2012 में हुई और इसे प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन मेजर ध्यानचंद (1905–1979) की जयंती है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से “हॉकी के जादूगर” और “द मैजिशियन” के नाम से जाना जाता है।
- ध्यानचंद ने भारत द्वारा लगातार तीन ओलंपिक हॉकी स्वर्ण पदक जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी—1928 (एम्स्टर्डम), 1932 (लॉस एंजिल्स) और 1936 (बर्लिन)। यह भारतीय हॉकी के स्वर्णिम दौर का हिस्सा था।
- भारतीय हॉकी में उनके योगदान के लिए उन्हें 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
- यह दिवस नागरिकों की खेल उपलब्धियों को मान्यता देने तथा खेल, शारीरिक गतिविधि और फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार सहित राष्ट्रीय खेल पुरस्कार पारंपरिक रूप से इसी अवधि से जुड़े होते हैं।
- फिट इंडिया मूवमेंट की शुरुआत 29 अगस्त 2019 को की गई थी, जिससे राष्ट्रीय खेल दिवस का संबंध फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली को बढ़ावा देने से और मजबूत हुआ।
खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल
- खेलो भारत नीति-2025: जुलाई 2025 में शुरू की गई इस नीति का उद्देश्य एक मजबूत, समावेशी और प्रदर्शन-उन्मुख खेल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। इसमें जमीनी स्तर पर खेल भागीदारी, प्रतिभा की पहचान, खेल अवसंरचना, प्रतिस्पर्धात्मक अवसर और शारीरिक साक्षरता को शामिल किया गया है।
- संशोधित खेलो इंडिया योजना: जुलाई 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए बढ़ी हुई सहायता के साथ विस्तारित खेलो इंडिया योजना को मंजूरी दी। इसके लिए 2026–27 से 2030–31 तक कुल ₹36,441 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर खेल भागीदारी और प्रतिभा पहचान से लेकर उच्च प्रदर्शन वाले खेलों तक एक मजबूत मार्ग तैयार करना है।
- KIRTI (खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन): यह 9–18 वर्ष की आयु के बच्चों में खेल प्रतिभा की पहचान और विकास के लिए एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम है। इसमें टैलेंट असेसमेंट सेंटर, मानकीकृत प्रोटोकॉल और प्रौद्योगिकी-सक्षम मूल्यांकन का उपयोग किया जाता है।
- टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (TOPS): यह ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की तैयारी करने वाले चयनित उच्च-स्तरीय खिलाड़ियों को अनुकूलित वित्तीय, प्रशिक्षण और अन्य सहायता प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025: यह खेल प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही, नैतिक प्रथाओं, सुशासन और खिलाड़ियों के कल्याण के लिए वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है। इसके कुछ चयनित प्रावधान 1 जनवरी 2026 से लागू हुए।
तेनजिंग नॉर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2024
संदर्भ: युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने तेनजिंग नॉर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (TNNAA) 2024 की घोषणा की है। इस पुरस्कार के तहत साहसिक गतिविधियों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए चार व्यक्तियों को सम्मानित किया गया है।
तेनजिंग नॉर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (TNNAA) के बारे में
- इसे 1993 में राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार के रूप में स्थापित किया गया था और बाद में तेनजिंग नॉर्गे के नाम पर इसका नामकरण किया गया। यह पुरस्कार साहसिक गतिविधियों में उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता देता है और इसे अर्जुन पुरस्कार के समकक्ष दर्जा प्राप्त है।
- यह पुरस्कार चार श्रेणियों में दिया जाता है: भूमि साहसिक गतिविधि, जल/समुद्री साहसिक गतिविधि, वायु साहसिक गतिविधि, आजीवन उपलब्धि। इसका उद्देश्य युवाओं में साहस, सहनशक्ति, अनुशासन, जोखिम उठाने की क्षमता, टीम भावना तथा त्वरित एवं प्रभावी निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ावा देना है।
- प्रत्येक पुरस्कार विजेता को एक प्रतिमा, प्रमाण-पत्र और ₹15 लाख की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है।
TNNAA 2024: पुरस्कार विजेता एवं प्रमुख विशेषताएँ
- पुरस्कार विजेता:
- बलजीत कौर और स्कालजांग रिगज़िन — भूमि साहसिक गतिविधि
- रिमो साहा — जल साहसिक गतिविधि
- शिव प्रसाद चमोली — आजीवन उपलब्धि
- वर्ष 2024 के लिए वायु साहसिक गतिविधि श्रेणी में किसी पुरस्कार विजेता का चयन नहीं किया गया।
- पुरस्कारों का चयन राष्ट्रीय चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर नामांकनों के मूल्यांकन एवं उचित जाँच-पड़ताल के बाद किया गया।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा ये पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 के साथ प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कार समारोह की तिथि की घोषणा अलग से की जाएगी।
RK-251 — भारत की नई ‘स्मार्ट’ कैंसर दवा
संदर्भ: भारतीय वैज्ञानिकों ने RK-251 नामक एक नई ‘स्मार्ट’ कैंसर दवा के उम्मीदवार को विकसित किया है, जिसे मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं के भीतर सक्रिय होने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे पारंपरिक कीमोथेरेपी से होने वाली स्वस्थ कोशिकाओं की क्षति को संभावित रूप से कम किया जा सकता है।
RK-251: कार्यप्रणाली एवं प्रमुख विशेषताएँ
- विकास: इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक स्वायत्त संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IASST) के डॉ. असीस बाला तथा IIT गुवाहाटी के डॉ. के.पी. भाबक के नेतृत्व में किए गए सहयोगात्मक अनुसंधान के माध्यम से विकसित किया गया है।
- ROS-उत्तरदायी सक्रियण: कैंसर कोशिकाओं में अक्सर रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) का स्तर अधिक होता है। RK-251 को सामान्य ऊतकों में अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहने तथा कैंसर कोशिकाओं के ROS-समृद्ध वातावरण में सक्रिय होने के लिए डिजाइन किया गया है।
- कार्यप्रणाली: ROS, RK-251 को NBDHEX नामक एक शक्तिशाली कैंसर-रोधी यौगिक को मुक्त करने के लिए सक्रिय करता है। NBDHEX उन लक्षित प्रोटीनों को अवरुद्ध करता है, जिनका उपयोग कैंसर कोशिकाएँ जीवित रहने और उपचार के प्रति प्रतिरोध के लिए करती हैं।
- प्री-क्लिनिकल निष्कर्ष: इसने आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (TNBC) कोशिकाओं के विरुद्ध मजबूत प्रभावशीलता दिखाई, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं पर इसका प्रभाव काफी कम रहा। जेब्राफिश भ्रूण (Danio rerio) पर किए गए अध्ययनों में विषाक्तता के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले तथा ROS की उपस्थिति में वांछित प्रतिदीप्ति भी प्रदर्शित हुई।
महत्त्व एवं वर्तमान स्थिति
- लक्षित दृष्टिकोण: मुख्य रूप से कैंसर कोशिकाओं के भीतर सक्रिय होने की क्षमता स्वस्थ ऊतकों को होने वाली अनावश्यक क्षति तथा पारंपरिक कीमोथेरेपी से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों को संभावित रूप से कम कर सकती है।
- संभावित चिकित्सीय महत्त्व: स्तन कैंसर के एक आक्रामक रूप TNBC के विरुद्ध प्रदर्शित प्रभावशीलता इसके आगे विकास की संभावनाओं को रेखांकित करती है।
- प्री-क्लिनिकल चरण: RK-251 अभी तक मानव नैदानिक परीक्षणों में प्रवेश नहीं कर पाया है। रोगियों पर इसका परीक्षण किए जाने से पहले इसके संबंध में आगे अनुसंधान और सत्यापन आवश्यक है। यह शोध ACS जर्नल ऑफ मेडिसिनल केमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है।
चिपफ्लेशन
संदर्भ: वैश्विक AI उछाल के कारण मेमोरी चिप्स की मांग बढ़ने से उनकी कीमतों में वृद्धि हो रही है, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स महंगे हो रहे हैं। इस प्रकार “चिपफ्लेशन” मुद्रास्फीति के एक नए स्रोत के रूप में उभरा है।
चिपफ्लेशन के बारे में
- जून 2026 में मॉर्गन स्टेनली द्वारा गढ़ा गया शब्द “चिपफ्लेशन” मेमोरी चिप्स के महंगा होने और उनकी उपलब्धता कठिन होने को दर्शाता है। यह मेमोरी चिप्स की लंबे समय से चली आ रही कीमतों में गिरावट की प्रवृत्ति को उलट देता है।
- AI डेटा सेंटरों की मांग में तेज वृद्धि के कारण निर्माता अधिक लाभ वाले HBM और सर्वर DRAM को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे स्मार्टफोन, लैपटॉप, रेफ्रिजरेटर, टीवी, ऑटोमोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले DRAM की आपूर्ति सीमित हो रही है।
- भारत में जनवरी से जुलाई 2026 के बीच कई उपभोक्ता-इलेक्ट्रॉनिक्स श्रेणियों की कीमतों में 3–5% की वृद्धि हुई।
इंटिस्मेरान
संदर्भ: मॉडर्ना और मर्क द्वारा विकसित की गई जाँचाधीन व्यक्तिगत mRNA-आधारित कैंसर थेरेपी, इंटिस्मेरान ऑटोजीन ने उच्च जोखिम वाले मेलेनोमा के उपचार में कीट्रूडा (Keytruda) के साथ संयोजन में चरण-3 के परीक्षण में सकारात्मक परिणाम प्रदर्शित किए हैं।
इंटिस्मेरान के बारे में
- इंटिस्मेरान (mRNA-4157/V940) एक व्यक्तिगत mRNA-आधारित नियोएंटीजन थेरेपी है, जिसे रोगी के ट्यूमर में मौजूद उत्परिवर्तनों के अनुरूप तैयार किया जाता है।
- यह 34 ट्यूमर-विशिष्ट नियोएंटीजन को एनकोड करता है, ताकि प्रतिरक्षा प्रणाली को इन उत्परिवर्तनों वाली कैंसर कोशिकाओं की पहचान करने और उन पर हमला करने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।
- चरण-3 के INTerpath-001 परीक्षण में, इसे पेम्ब्रोलिज़ुमैब (कीट्रूडा) के साथ देने पर, केवल पेम्ब्रोलिज़ुमैब की तुलना में उच्च जोखिम वाले मेलेनोमा के रोगियों में कैंसर की पुनरावृत्ति या मृत्यु के जोखिम में 49% तथा दूरस्थ मेटास्टेसिस या मृत्यु के जोखिम में 59% की कमी देखी गई।
- इंटिस्मेरान अभी भी जाँच के अधीन चिकित्सा है।
