संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।
सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: विकसित भारत – रोजगार और आजीविका की गारंटी मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] अधिनियम, 2025 पूरे भारत में 1 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इसने मनरेगा (MGNREGA) का स्थान लिया और अब वैधानिक ग्रामीण रोजगार गारंटी 100 दिनों से बढ़कर 125 दिन हो गई है।

अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ
• वर्धित रोजगार गारंटी: प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार के लिए वैधानिक वेतन रोजगार को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
- मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य है, ऐसा न होने पर श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे।
• वेतन भुगतान और प्रतिपूर्ति: वेतन का भुगतान प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक या डाकघर खातों में किया जाएगा।
- भुगतान साप्ताहिक रूप से या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर किया जाना अनिवार्य है।
- यदि वेतन का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है, तो श्रमिक विलंब प्रतिपूर्ति प्राप्त करने के हकदार होंगे।
• बेरोजगारी भत्ता: यदि निर्धारित अवधि के भीतर रोजगार प्रदान नहीं किया जाता है:
- श्रमिकों को पहले 30 दिनों के लिए मजदूरी दर का कम से कम एक-चौथाई (1/4) हिस्सा मिलेगा।
- शेष अवधि के लिए मजदूरी दर का कम से कम आधा (1/2) हिस्सा दिया जाएगा।
• राष्ट्रीय न्यूनतम पारिश्रमिक का सूत्रपात: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ₹300 प्रति दिन की न्यूनतम मजदूरी अधिसूचित की गई है।
- राष्ट्रीय औसत मजदूरी ₹298.8 प्रति दिन से बढ़कर ₹327.4 प्रति दिन हो गई है।
• राज्य-वार मजदूरी पुनरीक्षण: ऐतिहासिक रूप से कम मजदूरी वाले कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में मजदूरी में उल्लेखनीय वृद्धि (15–25%) की गई है।
- सर्वाधिक अधिसूचित मजदूरी: सिक्किम की चुनिंदा उच्च-तुंगता (high-altitude) ग्राम पंचायतों में ₹450 प्रति दिन, तथा प्रमुख राज्यों में हरियाणा (₹409), गोवा (₹406) और केरल (₹401) में अधिसूचित की गई है।
• निर्बाध संक्रमण: नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ जारी होने तक मौजूदा ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापित जॉब कार्ड मान्य रहेंगे।
- चल रहे कार्य बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे।
• समयबद्ध रोजगार और वेतन भुगतान: मांग के बाद निर्धारित अवधि के भीतर रोजगार प्रदान करना सुनिश्चित किया जाएगा।
- पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-सक्षम वेतन भुगतान।
- अधिक जवाबदेही के लिए फेस-रिकग्निशन (चेहरा पहचान प्रणाली)/मोबाइल-आधारित उपस्थिति की व्यवस्था जारी रहेगी।
• ग्राम पंचायत-केंद्रित कार्यान्वयन: निम्नलिखित पर अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
- प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन
- जल संरक्षण
- कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ
- ग्रामीण अवसंरचना
- स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिला सशक्तिकरण
- प्रमुख ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ अभिसरण
• प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन: VB-G RAM G सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल कार्यान्वयन।
- डिजिटल निगरानी, ई-केवाईसी और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के माध्यम से अधिक पारदर्शिता।
• कृषि-अनुकूल अभिकल्पना: बुवाई और कटाई के दौरान श्रमिकों की कमी से बचने के लिए कृषि के चरम मौसमों की पहचान करने का प्रावधान।
अधिनियम का महत्व
• ग्रामीण आजीविका सुरक्षा को बढ़ाना: वैधानिक रोजगार गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाकर ग्रामीण आजीविका सुरक्षा को मजबूत करता है।
• ग्रामीण आय में वृद्धि: उच्च मजदूरी दरों और ₹300 प्रति दिन के राष्ट्रव्यापी न्यूनतम पारिश्रमिक के माध्यम से ग्रामीण आय में वृद्धि करता है।
• स्थायी ग्रामीण परिसंपत्तियों का सृजन: जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि और ग्रामीण अवसंरचना पर ध्यान केंद्रित करके टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण करता है।
• महिला-नेतृत्व विकास को बढ़ावा: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और आजीविका पहलों के बेहतर एकीकरण के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास को बढ़ावा देता है।
• पारदर्शिता और दक्षता में सुधार: डिजिटल शासन, ई-केवाईसी (e-KYC), सॉफ्टवेयर-आधारित निगरानी और प्रौद्योगिकी-सक्षम कार्यान्वयन के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता में सुधार करता है।
• सतत ग्रामीण विकास का समर्थन: सहभागी योजना और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों के साथ अभिसरण को प्रोत्साहित करके सतत ग्रामीण विकास का समर्थन करता है।
• विकसित भारत @2047 के लक्ष्य में योगदान: आत्मनिर्भर, लचीले और समृद्ध ग्रामीण समुदायों को बढ़ावा देकर ‘विकसित भारत @2047’ के विज़न में योगदान देता है।
