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सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय ।

संदर्भ: लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य लोक परीक्षाएँ (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को और अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि लोक परीक्षाओं में अपनाए जाने वाले अनुचित साधनों के विरुद्ध तेज़, सशक्त एवं प्रभावी प्रवर्तन व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

अन्य संबंधित जानकारी

  • लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026 को लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू होने के बावजूद प्रश्न-पत्र लीक तथा संगठित परीक्षा धोखाधड़ी की लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए प्रस्तुत किया गया है।
  • इसका उद्देश्य अधिक जवाबदेही, मजबूत संस्थागत तंत्र तथा लोक परीक्षाओं से संबंधित अपराधों की त्वरित जाँच एवं अभियोजन के माध्यम से मौजूदा कानूनी ढाँचे को और अधिक सशक्त बनाना है।
  • प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य लोक परीक्षाओं की विश्वसनीयता, पारदर्शिता एवं निष्पक्षता को बनाए रखना तथा योग्य एवं मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना है।

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की समझ

  • यह अधिनियम फरवरी, 2024 में पारित किया गया था तथा 21 जून, 2024 से प्रभावी हुआ। यह निर्दिष्ट लोक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए भारत का पहला समर्पित कानून है।
  • यह अधिनियम अधिसूचित निर्दिष्ट लोक परीक्षाओं पर लागू होता है, जिनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRBs), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), केंद्र सरकार के मंत्रालय/विभाग तथा अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित अन्य प्राधिकरणों द्वारा आयोजित परीक्षाएँ शामिल हैं।
  • यह अधिनियम प्रश्न-पत्र लीक, प्रश्न-पत्र अथवा उत्तर-कुंजी तक अनधिकृत पहुँच, किसी अन्य व्यक्ति का प्रतिरूपण, संगठित नकल, कंप्यूटर प्रणालियों से छेड़छाड़ तथा षड्यंत्र जैसे कृत्यों को अपराध घोषित करता है।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती तथा गैर-समझौता योग्य हैं। साथ ही, संगठित परीक्षा-संबंधी अपराधों से अर्जित संपत्ति के कुर्की एवं जब्ती का भी प्रावधान किया गया है।

संशोधन विधेयक, 2026 के प्रमुख प्रावधान

  • विशेष कार्यबल (Special Task Force-STF): अधिनियम के अंतर्गत होने वाले अपराधों की जाँच के लिए केंद्र सरकार को विशेष कार्यबल (STF) गठित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • विशेष त्वरित न्यायालय (Special Fast Track Courts): प्रत्येक राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश में अधिनियम के अंतर्गत आने वाले मामलों के त्वरित निपटारे के लिए सत्र न्यायालय (Court of Session) को विशेष त्वरित न्यायालय के रूप में नामित किया जाएगा।
    • जहाँ तक संभव हो, मामलों की सुनवाई प्रतिदिन (Day-to-Day Basis) की जाएगी।
  • विशेष लोक अभियोजक: विशेष त्वरित न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है।
  • समयबद्ध जाँच एवं सुनवाई:
    •  जहाँ तक संभव हो, जाँच दो माह के भीतर पूरी की जाएगी।
    • आरोप-पत्र (Charge Sheet) दाखिल होने की तिथि से तीन माह के भीतर मुकदमे का निपटारा किया जाएगा।
  • अपील:
    • विशेष त्वरित न्यायालयों के निर्णय, दंड अथवा आदेश के विरुद्ध अपील उच्च न्यायालय की खंडपीठ में की जाएगी। जमानत संबंधी आदेशों के विरुद्ध अपील भी उच्च न्यायालय में ही की जाएगी।
    • अपील 30 दिनों के भीतर दायर करनी होगी। पर्याप्त कारण होने पर उच्च न्यायालय विलंब को स्वीकार कर सकता है, किंतु यह अवधि 90 दिनों से अधिक नहीं होगी।
    •  जहाँ तक संभव हो, अपील स्वीकार होने की तिथि से तीन माह के भीतर उसका निस्तारण किया जाएगा।
  • दंड संबंधी प्रावधानों को और अधिक कठोर बनाना:

संशोधन का महत्व

  • प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ बनाना: विशेष कार्यबल (STF), विशेष त्वरित न्यायालय तथा विशेष लोक अभियोजकों की व्यवस्था के माध्यम से एक समर्पित प्रवर्तन तंत्र स्थापित किया गया है, जिससे परीक्षा संबंधी अपराधों की त्वरित जाँच, प्रभावी अभियोजन तथा शीघ्र न्यायिक निपटारा सुनिश्चित होगा।
  • दंड की निश्चितता को बढ़ावा: समयबद्ध जाँच, सुनवाई एवं अपीलों के निस्तारण का प्रावधान प्रक्रियागत विलंब को कम करेगा तथा आपराधिक न्याय प्रणाली की प्रभावशीलता एवं विश्वसनीयता को बढ़ाएगा।
  • संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण: सेवा प्रदाताओं के लिए अधिक कठोर दंड तथा लंबी अवधि के लिए प्रतिबंध का प्रावधान किया गया है, जिससे संगठित नकल गिरोहों एवं बड़े स्तर पर प्रश्न-पत्र लीक करने वाले नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी निवारक व्यवस्था स्थापित होगी।
  • योग्यता-आधारित भर्ती की सुरक्षा: यह संशोधन लोक परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं सत्यनिष्ठा (Integrity) को और मजबूत करेगा, जिससे योग्य एवं मेधावी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा होगी तथा भर्ती प्रणाली में जनविश्वास बढ़ेगा।

चुनौतियाँ

  • राज्यों में प्रभावी क्रियान्वयन: सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष त्वरित न्यायालयों की स्थापना, विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति तथा आवश्यक संस्थागत क्षमता का विकास करने के लिए पर्याप्त वित्तीय एवं प्रशासनिक संसाधनों की आवश्यकता होगी।
  • परीक्षा धोखाधड़ी के बदलते स्वरूप: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित नकल, साइबर हमले, डिजिटल प्रतिरूपण तथा एनक्रिप्टेड संचार जैसी नई चुनौतियाँ लगातार उभर रही हैं। इनसे निपटने के लिए निरंतर तकनीकी उन्नयन एवं विशेषीकृत जाँच क्षमता विकसित करना आवश्यक होगा।
  • व्यवस्थित सुधारों की आवश्यकता: केवल कठोर दंड से प्रश्न-पत्र लीक की समस्या समाप्त नहीं होगी। इसके लिए सुदृढ़ परीक्षा सुरक्षा, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना, नियमित लेखा-परीक्षण (ऑडिट) तथा मजबूत संस्थागत सुरक्षा उपायों की भी आवश्यकता होगी।
  • कड़े प्रवर्तन एवं विधिसम्मत प्रक्रिया के बीच संतुलन: कठोर कानूनी प्रवर्तन के साथ-साथ प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए, ताकि कानून का दुरुपयोग न हो तथा निष्पक्ष जाँच, अभियोजन एवं सुनवाई सुनिश्चित की जा सके।

आगे की राह

  • परीक्षा सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाना: परीक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया में आरंभ से अंत तक डिजिटल सुरक्षा, एनक्रिप्शन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी तथा समय-समय पर सुरक्षा लेखा-परीक्षण को अपनाया जाए।
  • संस्थागत क्षमता का विकास: जाँच एजेंसियों, परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं तथा न्यायिक संस्थानों को विशेषीकृत अवसंरचना, तकनीकी विशेषज्ञता एवं पर्याप्त संसाधनों से सशक्त बनाया जाए।
  • समन्वित प्रवर्तन व्यवस्था को सुदृढ़ करना: मानकीकृत कार्य संचालन प्रक्रियाओं (Standard Operating Procedures-SOPs), वास्तविक समय में खुफिया सूचना के आदान-प्रदान तथा समन्वित प्रवर्तन तंत्र के माध्यम से केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
  • निष्पक्ष एवं अनुकूलनशील शासन सुनिश्चित करना: जाँच एवं अभियोजन के दौरान प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का पूर्ण पालन किया जाए तथा परीक्षा धोखाधड़ी के नए स्वरूपों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कानूनी एवं तकनीकी ढाँचों की समय-समय पर समीक्षा की जाए।
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