संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

संदर्भ: हाल ही में, ‘रोगाणुरोधी प्रतिरोध प्रतिक्रिया हेतु एकीकृत गठबंधन’ के समर्थन से AMR पर दावोस कॉम्पैक्ट ने AMR  से होने वाली मौतों में कमी लाने और वर्ष 2050 तक 10 करोड़ से अधिक जीवन बचाने के लिए संधारणीय सार्वजनिक और निजी वित्त जुटाने का लक्ष्य रखा है।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर दावोस कॉम्पैक्ट 2025 के मुख्य बिंदु

  • ‘दावोस कॉम्पैक्ट’ रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के वैश्विक भार के अनुपात में कार्रवाई के विस्तार का आह्वान करता है।
  • इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक जीवाणुजन्य रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Bacterial AMR) से होने वाली मौतों में 10 प्रतिशत की कमी लाना है।
  • इसका व्यापक लक्ष्य वैश्विक स्तर पर AMR से होने वाली मौतों में कमी लाना और वर्ष 2050 तक 10 करोड़ (100 मिलियन) से अधिक जीवन बचाना है।
  • यह ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर बल देता है और मानव, पशु तथा पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एकीकृत करता है।
  • यह संधारणीय वित्तपोषण तंत्र को बढ़ावा देता है, जो सार्वजनिक निधि को निजी निवेश के साथ जोड़ता है।
  • यह प्रारंभिक और अंतिम प्रोत्साहन के माध्यम से रोगाणुरोधी अनुसंधान और विकास (R&D) का समर्थन करता है।
  • यह नवीन एवं मौजूदा एंटीबायोटिक्स नैदानिक परीक्षणों और टीकों तक समतामूलक  और उत्तरदायी पहुंच को प्रोत्साहित करता है।
  • यह स्वास्थ्य देखभाल और खाद्य प्रणालियों में संक्रमण की रोकथाम, नियंत्रण और ‘एंटीमाइक्रोबियल सतर्क प्रबंधन’ पर जोर देता है।

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के बारे में

  • रोगाणुरोधी (Antimicrobials) वे औषधियाँ हैं जिनका उपयोग मनुष्यों, पशुओं और पौधों में संक्रामक रोगों की रोकथाम और उपचार के लिए किया जाता है। इनमें प्रतिजैविक, विषाणु-रोधी, कवक-रोधी और परजीवी-रोधी दवाएं शामिल हैं।
  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) तब उत्पन्न होता है जब जीवाणु, विषाणु, कवक और परजीवी इन रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं।
  • इसके परिणामस्वरूप संक्रमणों का उपचार करना कठिन या असंभव हो जाता है, जिससे रोग के प्रसार, गंभीर बीमारी, विकलांगता और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
  • AMR एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो समय के साथ रोगजनकों में होने वाले आनुवंशिक परिवर्तनों के माध्यम से घटित होती है। हालांकि, मानवीय हस्तक्षेप ने इसके उद्भव और प्रसार की गति को और अधिक तीव्र कर दिया है।
    • उदाहरण के लिए, मल्टी-ड्रग रेजिस्टेंट क्षय रोग (MDR-TB) क्षय रोग का एक ऐसा रूप है जो उन जीवाणुओं के कारण होता है जो आइसोनियाज़िड और रिफैम्पिसिन के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं देते हैं जबकि  ये दोनों क्षय रोग की दो सबसे प्रभावी प्रथम-श्रेणी की दवाएं हैं।

AMR के प्रसार के कारण  

  • रोगाणुरोधी दवाओं का अनुचित उपयोग: मनुष्यों, पशुओं और पौधों में रोगाणुरोधी दवाओं का दुरुपयोग और अत्यधिक उपयोग इसके मुख्य कारक हैं।
  • अस्पतालों में संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण (IPC) के अप्रभावी तरीके: यह प्रतिरोधी जीवाणुओं और अन्य कीटाणुओं के प्रसार के लिए अधिक अवसर प्रदान करते हैं।
  • मौजूदा नियमों के प्रवर्तन और अनुपालन का अभाव: उदाहरण के लिए, अस्पतालों के अनुपयुक्त रूप से उपचारित अपशिष्ट और औद्योगिक बहिःस्राव को छोड़ने से रोगाणुरोधी-प्रतिरोधी जीव निकटवर्ती वातावरण में फैल जाते हैं।
  • कृषि पद्धतियां: कृषि चारे में प्रतिजैविकों को मिलाने की प्रथा AMR की प्रक्रिया को और तीव्र कर देती है।

भारत में AMR से निपटने के लिए किए गए उपाय

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध नियंत्रण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम: देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में AMR के परिमाण और रुझानों को निर्धारित करने के लिए राष्ट्रीय रोगाणुरोधी निगरानी नेटवर्क (NARS-Net) की स्थापना की गई है।
  • राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC): इसने संक्रामक रोगों में रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग हेतु ‘राष्ट्रीय उपचार दिशानिर्देश’ प्रकाशित किए हैं।
  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर रेड लाइनजागरूकता अभियान: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा शुरू किया गया यह अभियान लोगों से आग्रह करता है कि वे डॉक्टर के पर्चे के बिना लाल ऊर्ध्वाधर रेखा वाली दवाओं (जिनमें प्रतिजैविक शामिल हैं) का सेवन न करें।
  • AMR नियंत्रण हेतु राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAP-AMR): यह एक एकीकृत ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर केंद्रित है और इसमें राज्य, राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय शामिल है।
Shares: