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सामान्य अध्ययन-2: सरकारी नीतियाँ और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप, उनके अभिकल्पन और कार्यान्वयन से संबंधित विषय।  

संदर्भ: भारत सरकार ने “राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026” का मसौदा जारी किया है और इसे सार्वजनिक डोमेन में रखा है जिससे सभी हितधारक, विशेषज्ञ और आम नागरिक अपने सुझाव, आपत्तियाँ और फीडबैक विद्युत मंत्रालय को भेज सकते हैं। यह भारत के विद्युत क्षेत्र में परिवर्तन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • नीति को अंतिम रूप मिलने के पश्चात यह 2005 में अधिसूचित मौजूदा राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) का स्थान लेगी।
  • फरवरी 2005 में अधिसूचित पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) ने विद्युत क्षेत्र की मूलभूत चुनौतियों जैसे मांग-आपूर्ति की कमी, बिजली तक सीमित पहुंच और अपर्याप्त बुनियादी ढांचा का समाधान किया था।

NEP 2026की मुख्य विशेषताएँ

  • उद्देश्य:
  • वर्ष 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली की खपत को 2,000 किलोवाट-घंटा (kWh) तक बढ़ाना और 2047 तक इसे 4,000 kWh से अधिक करना।
  • यह नीति भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है, जिसमें 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करना और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना शामिल है। इसके लिए ‘निम्न-कार्बन ऊर्जा उपायों’ को अपनाया जाना आवश्यक है।
  • नोडल मंत्रालय: विद्युत मंत्रालय
  • सुधारों की विस्तृत श्रृंखला: यह नीति संसाधन पर्याप्तता पर केंद्रित है, जो विकेंद्रीकृत अग्रिम योजना को अनिवार्य बनाती है। इसके अंतर्गत वितरण कंपनियों (DISCOMs) और राज्य भार प्रेषण केंद्रों (SLDCs) द्वारा राज्य आयोग के विनियमों के अनुरूप उपयोगिता और राज्य-स्तरीय ‘संसाधन पर्याप्तता योजनाएं’ तैयार की जाएंगी।
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) उपयोगिता और राज्य-स्तरीय संसाधन पर्याप्तता (RA) योजनाओं को एक राष्ट्र-स्तरीय योजना में एकीकृत करेगा, ताकि विद्युत क्षमता की समग्र पर्याप्तता सुनिश्चित की जा सके।
  • नवीकरणीय ऊर्जा (RE) और भंडारण:
  • यह नीति कैप्टिव पावर प्लांट (Captive Power Plants) सहित बाज़ार-आधारित क्षमता वृद्धि पर बल देती है।
  • वितरण लाइसेंसधारियों (DISCOMs) द्वारा छोटे उपभोक्ताओं की ओर से भंडारण प्रणालियों की स्थापना का समर्थन किया गया है, ताकि बड़े पैमाने की लागत (Economies of Scale) का लाभ उठाया जा सके। साथ ही, बड़े (थोक) उपभोक्ताओं को स्वयं की भंडारण प्रणालियां स्थापित करने में सक्षम बनाया जाएगा जिससे वितरित नवीकरणीय ऊर्जा (DRE) को बढ़ावा मिलेगा।
  • यह नीति बाढ़ शमन, सिंचाई, जल सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के समर्थन में भंडारण-आधारित जलविद्युत परियोजनाओं के त्वरित विकास का आह्वान करती  है।
  • तापीय उत्पादन हेतु: ग्रिड सहायता और उच्च नवीकरणीय एकीकरण को सुगम बनाने के लिए भंडारण का एकीकरण और पुराने संयंत्रों का पुनर्प्रयोजन।
  • यह नीति समग्र दक्षता में सुधार हेतु ‘डिस्ट्रिक्ट कूलिंग’ और औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए तापीय संयंत्रों से उत्पन्न भाप के प्रत्यक्ष उपयोग की संभावनाओं को तलाशने का सुझाव देती है।
  • परमाणु ऊर्जा हेतु: यह नीति शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025 के अनुरूप है, जिसमें उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों को अपनाने, मॉड्यूलर और लघु रिएक्टरों (SMRs) के विकास, तथा वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं द्वारा परमाणु ऊर्जा का उपयोग प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट (GW) क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • शांति (SHANTI) अधिनियम, 2025 (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया एक्ट) भारत में एक नया परमाणु ऊर्जा कानून है, जो परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और विस्तार के लिए एक आधुनिक, एकीकृत वैधानिक ढांचे की परिकल्पना करता है।
  • विद्युत बाज़ार सुदृढ़ीकरण: यह नीति सांठगांठ, हेर-फेर और बाज़ार प्रभुत्व की रोकथाम के लिए निगरानी और पर्यवेक्षण हेतु एक सुदृढ़ नियामक ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
  • पारेषण: नीति उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने और ‘मार्ग का अधिकार’ (Right of Way – RoW) संबंधी चुनौतियों के समाधान हेतु भूमि उपयोग के लिए उपयुक्त मुआवजे का प्रस्ताव करती है। वर्ष 2030 तक सभी नई नवीकरणीय ऊर्जा (RE) क्षमता के लिए पारंपरिक बिजली के समान पारेषण शुल्क समानता की परिकल्पना की गई है। इसमें सट्टा-आधारित होल्डिंग को रोकने के लिए पारेषण कनेक्टिविटी आवंटित करने हेतु एक उपयोग-आधारित ढांचे भी प्रस्तावित है।
  • वितरण खंड:
  • इस नीति का लक्ष्य AT&C नुकसानों को सिंगल डिजिट में लाना है। साथ ही यह नीति बुनियादी ढांचे के दोहराव के बिना प्रतिस्पर्धा और दक्षता बढ़ाने के लिए साझा वितरण नेटवर्क को बढ़ावा देती है।
  • नीति एक वितरण प्रणाली संचालक (DSO) की स्थापना का प्रस्ताव करती है, जो नेटवर्क साझाकरण को सक्षम करेगा। यह वितरित नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण और वाहन-से-ग्रिड (V2G) प्रणालियों के एकीकरण में सहायता प्रदान करेगा।
  • 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों को 2032 तक वितरण ट्रांसफार्मर स्तर पर ‘N-1 अतिरेकता (Redundancy) प्राप्त करनी होगी। साथ ही, भीड़भाद वाले इलाकों में विद्युत नेटवर्क को भूमिगत करने का प्रावधान किया गया है।
  • ग्रिड परिचालन के लिए: यह नीति राज्य पारेषण उपयोगिताओं के कार्यात्मक पृथक्करण तथा राज्य भार प्रेषण केंद्र (SLDC) के संचालन एवं पारेषण योजना के लिए स्वतंत्र राज्य-स्तरीय संस्थाओं के गठन की सिफारिश करती है। साथ ही, राज्य ग्रिड कोड को भारतीय विद्युत ग्रिड कोड के अनुरूप संरेखित करना प्रस्तावित है।
  • साइबर सुरक्षा और डेटा गवर्नेंस: नीति एक सुदृढ़ साइबर सुरक्षा ढांचे, भारत के भीतर विद्युत क्षेत्र के डेटा के अनिवार्य भंडारण, संरचित डेटा-साझाकरण तंत्र, और वितरण कंपनियों (DISCOMs) एवं राज्य भार प्रेषण केंद्रों (SLDCs) के लिए वितरित ऊर्जा संसाधनों (DER) की रियल टाइम दृश्यता का प्रस्ताव करती है।
  • प्रौद्योगिकी एवं कौशल विकास: वर्ष 2030 तक स्वदेशी रूप से विकसित स्काडा (SCADA) प्रणाली को अपनाना और विद्युत प्रणाली के सभी महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों के लिए घरेलू सॉफ्टवेयर समाधान विकसित करना।

NEP 2026का महत्त्व

  • 21वीं सदी के विद्युत क्षेत्र का आधार: इस नीति का उद्देश्य देश की दीर्घकालिक आर्थिक संवृद्धि और ऊर्जा संक्रमण में सहायता प्रदान करते हुए सभी के लिए विश्वसनीय, किफायती और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
  • संवहनीयता हेतु रोडमैप: ‘एनईपी 2026′ का मसौदा एक भविष्योन्मुखी, वित्तीय रूप से व्यवहार्य और पर्यावरणीय रूप से संधारणीय विद्युत क्षेत्र के लिए एक व्यापक ब्लूप्रिंट प्रदान करता है, ताकि ‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किफायती दर पर विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराई जा सके।
  • ऊर्जा टोकरी का विस्तार: आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ, यह नीति नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और जलविद्युत के साथ एक संतुलित ऊर्जा मिश्रण को बढ़ावा करती है।
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