संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी राज्य रैंकिंग फ्रेमवर्क का 5वाँ संस्करण (SRF 5.0) भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम और देश भर में उद्यमिता विकास पर इसके प्रभाव का एक व्यापक अवलोकन प्रस्तुत करता है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • इसके अतिरिक्त, यह फ्रेमवर्क एक समर्पित सुधार क्षेत्र और विशिष्ट कार्य बिंदुओं के माध्यम से इंक्यूबेशन अवसंरचना पर अधिक बल देता है।
  • इस अभ्यास के लिए विचाराधीन अवधि 1 जनवरी 2023 से 30 नवंबर 2024 के मध्य थी।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • निजी सहभागियों का समावेशन: SRF 5.0 के अंतर्गत ‘निजी इकोसिस्टम मैपिंग’ को सम्मिलित किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी हस्तक्षेपों से इतर निजी हितधारकों के नेतृत्व में स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास का मूल्यांकन करना है।
  • प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों पर ध्यान: यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने और संबंधित विशिष्ट क्षेत्रों को सुदृढ़ करने पर ध्यान केन्द्रित करती है।
  • सुधार क्षेत्र: दस्तावेजों के मूल्यांकन की प्रक्रिया 6 सुधार क्षेत्रों के इर्दगिर्द केंद्रित है, जिन्हें आगे 19 विभिन्न कार्य बिंदुओं में विभाजित किया गया है।
  • रैंकिंग: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया था:
    • श्रेणी ‘A’ (Category A): इसे पुनः दो उप-श्रेणियों, A1 और A2 में विभाजित किया गया है:
      • श्रेणी A1: इसमें 5 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
      • श्रेणी A2: इसमें 1 करोड़ से अधिक और 5 करोड़ से कम जनसंख्या वाले सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
    • श्रेणी ‘B’: इसमें 1 करोड़ से कम जनसंख्या वाले सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।

रिपोर्ट का महत्त्व

  • सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद: स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (SRF) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को समर्पित स्टार्टअप नीतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। यह वार्षिक रैंकिंग के माध्यम से उनके विकास पर नज़र रखता है, जो ‘सबका साथ, सबका विकास’ की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
  • उद्यमिता इकोसिस्टम: यह देश भर में उद्यमशीलता की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने हेतु केंद्र सरकार (स्टार्टअप इंडिया) तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किए जा रहे सहयोगात्मक प्रयासों को दिशा प्रदान करती है।
  • क्षमता निर्माण: इसमें परिणाम-उन्मुख फीडबैक तंत्र समाहित है, जिसके माध्यम से राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लाभार्थी स्टार्टअप और इनक्यूबेटर, सरकारी सहायता तथा हैंडहोल्डिंग (सतत मार्गदर्शन) के संबंध में के अपने अनुभव साझा करते हैं।
  • सहकर्मी अधिगम/पीयर लर्निंग: यह सर्वोतम अभ्यासों के साझाकरण और मानकीकरण के माध्यम से ज्ञानार्जन एवं उनके अनुकरण हेतु एक सशक्त तंत्र के रूप में कार्य करती है।
Shares: