संदर्भ

हाल ही में, रवींद्रनाथ टैगोर की 163वीं जयंती मनाई गई।

पृष्ठभूमि    

  • रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता में देवेन्द्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के घर हुआ था।  
  • उन्हें ‘गुरुदेव’, ‘ कविगुरु’ और ‘विश्वकवि’ के नाम से भी जाना जाता है। वह संगीत, साहित्य और कला में अपने योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • रवींद्रनाथ टैगोर जयंती, जिसे कोलकाता में पोंचीशे बोइशाख (Poncheeshe Boishakh) के नाम से भी जाना जाता है, रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941) की जयंती के उपलक्ष्य में 7 या 8 मई (बंगाली कैलेंडर के आधार पर) को मनाई जाती है। 

रवीन्द्रनाथ टैगोर 

  • रवीन्द्रनाथ टैगोर (1861-1941) एक बहुज्ञ अर्थात, कवि, उपन्यासकार, संगीतकार, निबंधकार, शिक्षक और समाज सुधारक थे।
  • वे अपने कविता संग्रह, गीतांजलि (गीत प्रस्तुतियाँ) के लिए साहित्य में नोबेल पुरस्कार (1913) प्राप्त करने वाले पहले गैर-यूरोपीय हैं।
  • वर्ष 1915 में ब्रिटिश राज द्वारा उन्हें ‘नाइटहुड‘ की उपाधि से भी सम्मानित किया गया था, जिसे उन्होंने वर्ष 1919 में जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में त्याग दिया था।

योगदान    

साहित्यिक योगदान    

  • उन्होंने जन गण मन...  भारत का राष्ट्रगान और आमार सोनार बांग्ला…, जिसे बाद में बांग्लादेश के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया, की रचना की गई। उनकी रचना ने श्रीलंका के राष्ट्रगान को भी प्रेरित किया। कविता        
  • गीतांजलि
  • सोनार तारी (स्वर्ण नाव)
  • मानसी (आदर्श)
  • नाटक: चित्रा (स्मरण की पेंटिंग), पोस्ट ऑफिस
  • उपन्यास और लघु कथाएँ: बंगाली साहित्य में लघु कथा के रूप में अग्रणी।
  • उपन्यास: चोखेर बाली (बिनोदिनी की आंखें), गोरा (गोरा चेहरा)
  • लघु कथाएँ: हंगरी स्टोन्स और अन्य कहानियाँ, बंगाल जीवन की झलकियाँ।

संगीत    

  • उन्होंने 2,000 से अधिक गीतों (रवीन्द्र संगीत) की रचना की, जिन्हें पूरे बंगाल और उसके बाहर भी सराहा जाता है।
  • उनके संगीत ने भारतीय शास्त्रीय और पश्चिमी परंपराओं के तत्वों को मिलाकर एक अनूठी शैली बनाई।

सामाजिक और राजनीतिक      

  • नाइटहुड (Knighthood) की उपाधि का त्याग: उन्हें वर्ष 1915 में नाइटहुड की उपाधि प्रदान की गई, लेकिन उन्होंने जलियांवाला बाग नरसंहार के विरोध में वर्ष 1919 में नाइटहुड की उपाधि त्याग दी। इस कार्य ने सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को उजागर किया।
  • उन्होंने जातिगत भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों की आलोचना की और महिला सशक्तिकरण की वकालत की।

शिक्षा क्षेत्र 

  • विश्व-भारती विश्वविद्यालय: उन्होंने शांतिनिकेतन की स्थापना की, जो बाद में विश्व-भारती विश्वविद्यालय बन गया, यह समग्र शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाला एक प्रसिद्ध संस्थान है।
  • हाल ही में, शांतिनिकेतन (विश्वभारती विश्वविद्यालय) को यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त हुआ।

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