संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय वैश्विक समूह तथा करार।

सामान्य अध्ययन-3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय। 

संदर्भ: यूरोपीय संघ ने 1 जनवरी से भारत और दो अन्य देशों के लिए एक अधिमान्य योजना के तहत कपड़ा और प्लास्टिक जैसे क्षेत्रों में निर्यात लाभों पर रियायतों को समाप्त कर दिया है। यह कदम 27 देशों के इस गुट को होने वाले भारत के निर्यात को प्रभावित करेगा।

अन्य संबंधित जानकारी

• यूरोपीय संघ के आधिकारिक जर्नल के अनुसार, यूरोपीय आयोग ने 25 सितंबर, 2025 को कुछ GSP लाभार्थी देशों अर्थात भारत, इंडोनेशिया और केन्या को दी गई कुछ शुल्क वरीयताओं के 2026-2028 के लिए निलंबन के संबंध में नियम निर्धारित किए थे।

  • यह निलंबन 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2028 तक प्रभावी रहेगा।

• यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और यूरोपीय संघ द्वारा 27 जनवरी को एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए वार्ता संपन्न होने की घोषणा होने की संभावना है।

• भारतीय वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संशोधित GSP नियम यूरोपीय संघ को होने वाले भारत के कुल निर्यात के केवल 2.7% को प्रभावित करेंगे।

  • वर्ष 2023 में यूरोपीय संघ का भारत से कुल आयात लगभग €62.2 बिलियन था, लेकिन केवल €12.9 बिलियन ही इन अधिमान्य शुल्कों के लिए पात्र था। भारत के 12 प्रमुख उत्पाद श्रेणियों से बाहर होने के कारण, लगभग €1.66 बिलियन का व्यापार अब GSP लाभों के दायरे में नहीं आएगा, जबकि €11.24 बिलियन अभी भी इस योजना के तहत कवर होगा।

घटनाक्रम के मुख्य बिंदु

•शामिल प्रमुख क्षेत्र: यूरोपीय संघ ने खनिज, रसायन, प्लास्टिक और रबर, कपड़ा और परिधान, पत्थर और चीनी मिट्टी, कीमती धातुएं, लोहा और इस्पात, आधार धातुएं, मशीनरी, विद्युत सामान और परिवहन उपकरण जैसे लगभग सभी प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से GSP लाभ समाप्त कर दिए हैं।

• पूर्ववर्ती निष्कासन:

  • 2013: पहली बड़ी कटौती की गई; खनिजों, रसायनों, कपड़ा जैसे सामानों के लिए GSP टैरिफ में छूट दी गई।
  • 2019-2023: यूरोपीय संघ ने GSP से बाहर होने वाले उत्पादों की सूची का विस्तार किया।
  • 2023: निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता के कारण रसायन, प्लास्टिक, चमड़ा, पत्थर और कांच उत्पाद, कीमती धातुएं, आधार धातुएं, मशीनरी और विद्युत उपकरण जैसी श्रेणियों को क्रमिक रूप से अधिमान्य व्यवस्था से बाहर कर दिया गया।
  • 2026: वर्ष 2026 से 2028 तक तीन वर्षों के लिए रियायतों की पूर्ण वापसी।

• विधिक औचित्य: यूरोपीय संघ का यह कदम उसके GSP से बाहर करने के नियमों के अनुरूप है, जिसके तहत यदि किसी उत्पाद समूह में निर्यात लगातार तीन वर्षों तक एक निर्धारित सीमा को पार कर जाता है, तो वरीयताएं वापस ले ली जाती हैं।

  • तदनुसार, सितंबर 2025 में अपनाए गए ‘आयोग कार्यान्वयन विनियमन (EU) 2025/1909’ के अंतर्गत, भारत को वर्ष 2026-2028 के लिए रियायत श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।

GSP निलंबन का भारत पर प्रभाव

• निकट भविष्य में उच्च व्यापार बाधाएं: GSP वरीयताओं का निलंबन यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (CBAM) के कर चरण की शुरुआत के साथ हो रहा है।

• निर्यात पर प्रभाव: थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, 1 जनवरी, 2026 से भारत को यूरोपीय बाजार में एक “बड़ा झटका” लगा है, क्योंकि इसके 87% निर्यात पर अब उच्च आयात शुल्क लगना शुरू हो गया है।

  • कृषि और चमड़े सहित केवल 13% निर्यात को ही इस योजना के तहत लाभों प्राप्त होते रहेंगे।
  • अब अधिकांश उत्पाद पूर्ण MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) शुल्क दरों पर प्रवेश कर रहे हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को पहले मिलने वाला लगभग 20% का शुल्क लाभ समाप्त हो गया है।

• परिधान निर्यातकों के लिए झटका: परिधान निर्यातकों को GSP के तहत 9.6% के बजाय अब पूर्ण 12% शुल्क देना होगा, जिससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता कम होगी और यूरोपीय खरीदार बांग्लादेश और वियतनाम जैसे शुल्क-मुक्त आपूर्तिकर्ताओं की ओर आकर्षित होंगे।

सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली (GSP) के बारे में:

• यूरोपीय संघ की GSP एक एकपक्षीय व्यापार व्यवस्था है जो विकासशील देशों को MFN शुल्कों की तुलना में कम शुल्क पर यूरोपीय संघ को निर्यात करने की अनुमति देती है।

• WTO के अनुरूप: GSP गैर-पारस्परिक है और यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) सिद्धांत के अपवाद के रूप में कार्य करता है।

  • विश्व व्यापार संगठन (WTO) कानून के अंतर्गत इसका स्थायी कानूनी आधार ‘1979 का इनेबलिंग क्लॉज’ (Enabling Clause) है, जो विकसित देशों को विकासशील देशों के प्रति विभेदक और अधिक अनुकूल व्यवहार प्रदान करने की अनुमति देता है।

• विभिन्न प्रकार: यूरोपीय संघ GSP योजना के अंतर्गत विभिन्न व्यापारिक लाभ प्रदान करता है।

  • मानक GSP: भारत जैसे निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों को यूरोपीय बाजार तक आसान पहुंच प्रदान करता है।
  • “GSP+ एक संवर्धित संस्करण है जो अधिक लाभ प्रदान करता है, किंतु यह केवल उन्हीं देशों के लिए है जो श्रम, मानवाधिकार, पर्यावरण और सुशासन से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय नियमों का पालन करते हैं; जबकि ‘एवरीथिंग बट आर्म्स’ (EBA) सबसे निर्धन राष्ट्रों को हथियारों को छोड़कर लगभग सभी वस्तुओं के लिए शुल्क-मुक्त और कोटा-मुक्त पहुँच प्रदान करता है।

• ग्रेजुएशन (रियायतों का निलंबन) क्लॉज: देशों को आय और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, और समय के साथ किसी उत्पाद समूह में निर्यात अधिक होने पर रियायतों की समाप्ति के माध्यम से लाभ वापस ले लिए जाते हैं।

Shares: