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सामान्य अध्ययन-2: स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
संदर्भ: हाल ही में ‘लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2024 में मधुमेह से पीड़ित वयस्क आबादी के मामले में भारत, विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर था।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष
- वर्ष 2024 में भारत में मधुमेह से पीड़ित वयस्कों (20-79 वर्ष) की संख्या 90 मिलियन थी।
- चीन 148 मिलियन पीड़ितों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका 39 मिलियन के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
- ये निष्कर्ष अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ (IDF) के ‘डायबिटीज एटलस’ के 11वें संस्करण पर आधारित हैं।
- यह एटलस वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक अनुमान प्रदान करता है और वर्ष 2050 तक के अनुमानित आंकड़े प्रस्तुत करता है।
- इन अनुमानों में 246 अध्ययनों (2024-2025) के डेटा का उपयोग करके 215 देशों और क्षेत्रों को कवर किया गया था।
- चीन, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और पाकिस्तान जैसे अधिक आबादी वाले देशों की वैश्विक मधुमेह के मामलों में एक बड़ी हिस्सेदारी है।
- अनुमान है कि वर्ष 2050 मधुमेह रोगियों की संख्या के मामले में पाकिस्तान, संयुक्त राज्य अमेरिका से आगे निकल सकता है।
- वैश्विक स्तर पर वर्ष 2024 में, विश्व की 11% से अधिक वयस्क आबादी मधुमेह से पीड़ित थी।
- वर्ष 2050 तक लगभग 13% वयस्कों के इस रोग से प्रभावित होने का अनुमान है।
- वर्ष 2024 में, मधुमेह से पीड़ित 80% से अधिक लोग निम्न और मध्यम आय वाले देशों से थे।
- वर्ष 2050 तक वैश्विक स्तर पर मधुमेह के मामलों में होने वाली कुल वृद्धि में इन देशों की हिस्सेदारी 95% से अधिक होगी।
- 75-79 वर्ष की आयु के वयस्कों में मधुमेह के प्रसार की दर सर्वाधिक अर्थात लगभग 25% रही।
- महिलाओं की तुलना में पुरुषों में और ग्रामीण आबादी की तुलना में शहरी आबादी में मधुमेह के प्रसार की दर उच्च थी।
मधुमेह के मामलों में वृद्धि के मुख्य कारण
- शोधकर्ताओं ने इसके लिए सम्मिलित रूप से निम्नलिखित कारकों को उत्तरदायी ठहराया है:
- जनसंख्या वृद्धि और आयु बढ़ने (वृद्धावस्था) के कारण उन लोगों की संख्या बढ़ रही है जिनके इस रोग से पीड़ित होने का जोखिम अधिक होता है।
- तीव्र शहरीकरण प्रायः ‘गतिहीन जीवनशैली’ से जुड़ा होता है।
- खान-पान की आदतों में बदलाव अर्थात अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करना।
- विशेष रूप से शहरों में, शारीरिक श्रम या व्यायाम में कमी।
- सम्मिलित रूप से, ये कारक अधिकांश विकासशील देशों में मधुमेह के निरंतर प्रसार को बढ़ावा दे रहे हैं।
मधुमेह के बारे में
- डायबिटिज मेलिटस, रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) के स्तर के अपर्याप्त नियंत्रण से होने वाला एक रोग है।
- यह एक जीर्ण रोग है जो तब होता है जब अग्न्याशय पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बनाता है या जब शरीर बनाए गए इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है।
- इंसुलिन एक हार्मोन है जो रक्त शर्करा के स्तर को विनियमित करने में मदद करता है।
- अग्न्याशय में मौजूद लैंगरहैंस द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में मुख्य रूप से दो प्रकार की अंतःस्रावी कोशिकाएं होती हैं:
- बीटा कोशिकाएँ: इंसुलिन का उत्पादन करती हैं, जो रक्त शर्करा के स्तरों को कम करता है।
- एल्फा कोशिकाएँ: ग्लूकागन का स्राव करती हैं, जो रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाता है।
मधुमेह के प्रकार
- टाइप 1 मधुमेह:
- इसे ‘जुवेनाइल मधुमेह’ (Juvenile Diabetes) या ‘इंसुलिन पर निर्भर मधुमेह’ के रूप में जाना जाता है।
- टाइप-1 मधुमेह आजीवन बना रहने वाला स्वप्रतिरक्षित रोग (Autoimmune disease) है। इस रोग में अग्न्याशय, इंसुलिन नहीं बना पाता है।
- इसकी विशेषता बीटा कोशिकाओं की स्वप्रतिरक्षा की क्षति होना है, जिसके परिणामस्वरूप इंसुलिन का उत्पादन बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता है। अतः रोगी को जीवित रहने के लिए प्रतिदिन इंसुलिन के इंजेक्शन की आवश्यकता होती है।
- यह प्रकार मुख्यतः बच्चों या युवाओं में विकसित होता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है।
- इसके लक्षण कुछ सप्ताहों या महीनों के भीतर तेजी से विकसित हो सकते हैं। ये गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकते हैं, जैसे ‘मधुमेह-संबंधित कीटोएसिडोसिस’ (DKA)। DKA में उल्टी, पेट दर्द, सांसों से फलों जैसी गंध आना और सांस लेने में कठिनाई होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
- टाइप 2 मधुमेह:
- टाइप-2 मधुमेह शरीर की उस प्रक्रिया को प्रभावित करता है, जिससे ऊर्जा उत्पादन हेतु रक्त शर्करा का प्रभावी उपयोग बाधित हो जाता है।
- यह अग्न्याशय द्वारा पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन न करने या शरीर द्वारा इंसुलिन का उचित उपयोग न कर पाने (इंसुलिन प्रतिरोध) के कारण हो सकता है।
- यह रोग अक्सर धीरे-धीरे विकसित होता है, जो मुख्य रूप से मोटापा और बढ़ती उम्र जैसे कारकों से प्रभावित होता है।
- हालांकि यह आमतौर पर वृद्ध वयस्कों को प्रभावित करता है, लेकिन वर्तमान में बच्चों और किशोरों में भी यह तेजी से सामान्य होता जा रहा है।
- लक्षण: उच्च रक्त शर्करा के स्तर का पता केवल नियमित रक्त परीक्षणों के माध्यम से ही लगाया जा सकता है। मधुमेह-पूर्व अवस्था का एक संभावित संकेत ‘एकैंथोसिस निग्रिकन्स’ है, जिसके कारण शरीर के विशिष्ट क्षेत्रों, जैसे गर्दन या कांख की त्वचा काली पड़ जाती है।
- एकैंथोसिस निग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans): मधुमेह-पूर्व अवस्था का एक महत्वपूर्ण संकेत ‘एकैंथोसिस निग्रिकन्स’ है। इसमें शरीर के कुछ हिस्सों, जैसे कि गर्दन या कांख की त्वचा काली पड़ जाती है।
- टाइप 1.5 मधुमेह:
- टाइप 1.5 मधुमेह, जिसे LADA (लेटेन्ट ऑटोइम्यून डायबिटिज इन एडल्ट्स) के रूप में भी जाना जाता है, टाइप 1 मधुमेह के समान ही है। इसमें इंसुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं के विरुद्ध प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शामिल होती है, किंतु इसका विकास बहुत धीमी गति से होता है।
- LADA से पीड़ित व्यक्तियों को अक्सर तत्काल इंसुलिन की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन समय के साथ उन्हें इसकी आवश्यकता पड़ सकती है।
- गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes): गर्भावधि मधुमेह गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्त ग्लूकोज की स्थिति है। यह माता और शिशु दोनों के लिए जटिलताओं के जोखिम को बढ़ाती है और भविष्य में उनमें टाइप 2 मधुमेह विकसित होने की संभावना को बढ़ा देती है।
- मधुमेह-पूर्व अवस्था (Prediabetes): यह वह स्थिति है जिसमें रक्त ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना अधिक नहीं कि उसे मधुमेह की श्रेणी में रखा जा सके। यह स्थिति टाइप 2 मधुमेह विकसित होने के जोखिम को बढ़ा देती है।
- मोनोजेनिक मधुमेह (Monogenic Diabetes): यह मधुमेह का एक दुर्लभ रूप है जो किसी एक जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है।
- टाइप 5 मधुमेह:टाइप 5 मधुमेह, मधुमेह का एक नया मान्यता प्राप्त रूप है जो निम्न और मध्यम आय वाले देशों में दुबले-पतले और कुपोषित युवाओं को प्रभावित करता है। इसकी विशेषता अग्न्याशय की बीटा-कोशिकाओं की असामान्य कार्यप्रणाली और इंसुलिन का अपर्याप्त उत्पादन करना है।
