- क्या है?
- भौगोलिक संकेत (GI) टैग, एक ऐसा नाम या चिह्न है, जिसका उपयोग उन विशेष उत्पादों पर किया जाता है जो किसी विशिष्ट भौगोलिक स्थान या मूल से सम्बन्धित होते हैं।
- लाभ:
- GI टैग यह सुनिश्चित करता है कि केवल अधिकृत उपयोगकर्त्ताओं या भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले लोगों को ही लोकप्रिय उत्पाद के नाम का उपयोग करने की अनुमति है।
- भारतीय उत्पादों की प्रतिष्ठा और गुणवत्ता का संरक्षण करता है।
- कानूनी संरक्षण मिलने से नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और मौलिक उत्पादकों की बाज़ार में विश्वसनीयता बढ़ेगी और उत्पादक सशक्त होंगे।
- आर्थिक दृष्टि से, GI टैग से उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
- स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे।
- उत्पादन क्षेत्रों के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- भारतीय स्थिति:
- वैधता: एक पंजीकृत GI टैग 10 वर्षों के लिये वैध होता है।
- नोडल विभाग: वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय के अधीन उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग।
- GI टैग भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा दिया जाता है, इसका मुख्यालय चेन्नई में है।
- राष्ट्रीय स्तर पर GI का विनियमन: ‘वस्तुओं का भौगोलिक सूचक’ (पंजीकरण और सरंक्षण) अधिनियम, 1999 (Geographical Indications of goods ‘Registration and Protection’ act, 1999) के तहत किया जाता है, जो सितंबर 2003 से लागू हुआ।
- भारत में जीआई (GI) का विनियमन वस्तुओं का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम, 1999 तथा वस्तुओं का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) नियम, 2002 के अंतर्गत किया जाता है।
- वर्ष 2004 में ‘दार्जिलिंग की चाय’ जीआई टैग प्राप्त करने वाला पहला भारतीय उत्पाद है।
- जीआई टैग की वर्तमान स्थिति:
- सितंबर 2026 तक भारत में 800 से अधिक GI-पंजीकृत उत्पाद हैं।
- लक्ष्य:
- केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 2030 तक 10,000 भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
- वैश्विक स्थिति:
- जीआई टैग को औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण के लिये पेरिस कन्वेंशन (Paris Convention for the Protection of Industrial Property) के तहत बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के एक घटक के रूप में शामिल किया गया है।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर GI का विनियमन विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधी पहलुओं (Trade-Related Aspects of Intellectual Property Rights-TRIPS) पर समझौते के तहत किया जाता है।
- महत्वपूर्ण भौगोलिक संकेतक (GI) टैग:
- दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश 81 जीआई-टैग प्राप्त उत्पादों के साथ अग्रणी राज्य रहा, जिसके बाद तमिलनाडु (76) और महाराष्ट्र (55) का स्थान है।
- हाल ही में जीआई टैग प्राप्त उत्पाद:
- पोंडुरु खादी — आंध्र प्रदेश
- अंबासमुद्रम चोप्पु समान — तमिलनाडु
- वोरैयूर सूती साड़ी — तमिलनाडु
- नमक्कल मक्कल पत्तिरंगल — तमिलनाडु
- थूयामल्ली चावल — तमिलनाडु
- कविंदापडी नट्टू सक्कराई — तमिलनाडु
- असम बिहू ढोल – असम।
- कसी धनिया – महाराष्ट्र।
- कोरापुट कालाजीरा चावल – ओडिशा।
- उत्तराखंड लाल चावल – उत्तराखंड।
- वारंगल चपाता मिर्च (टमाटर मिर्च), बनगानापल्ली आम और तंदूर लाल चना – तेलंगाना।
- कन्नडिप्पाया (जनजातीय हस्तशिल्प) – केरल।
- बनारस ठंडाई, बनारस मेटल कास्टिंग क्राफ्ट, लखीमपुर खीरी थारू कढ़ाई, बरेली बेंत एवं बाँस शिल्प, बरेली ज़रदोज़ी शिल्प, पिलखुवा हैंड ब्लॉक प्रिंट टेक्सटाइल और काशी की प्रसिद्ध ‘तिरंगी बर्फी’ – उत्तर प्रदेश।
- मध्यप्रदेश के भौगोलिक संकेतक (GI) टैग:
- हस्तशिल्प / हथकरघा:
- अशोकनगर की चंदेरी साड़ियाँ – (मध्यप्रदेश का पहला जीआई टैग, 2005 – 06)
- महेश्वरी साड़ी एवं फैब्रिक्स — खरगोन
- बाघ प्रिंट — धार
- लेदर टॉयज़ — इंदौर
- बेल मेटल वेयर — दतिया एवं टीकमगढ़
- गोंड पेंटिंग — डिंडोरी
- लौह शिल्प — डिंडोरी
- बटिक प्रिंट — उज्जैन
- ग्वालियर हस्तनिर्मित कालीन
- वारासिवनी साड़ी एवं फैब्रिक्स — बालाघाट
- जबलपुर स्टोन क्राफ्ट
- कृषि उत्पाद:
- चिन्नौर चावल — बालाघाट
- सुंदरजा आम — रीवा
- शरबती गेहूँ — विदिशा एवं सीहोर
- रियावन लहसुन — रतलाम
- बुंदेलखंड कठिया गेहूँ — मध्य प्रदेश
- खाद्य पदार्थ:
- रतलामी सेव — रतलाम
- झाबुआ कड़कनाथ — झाबुआ
- मुरैना गजक — मुरैना
- हस्तशिल्प / हथकरघा:

- चुनौतियाँ:

- भारत में GI टैग को बढ़ावा देने के लिए की गई पहलें:
- GI लोगो और टैगलाइन: “अतुल्य भारत के अमूल्य खजाने” टैगलाइन भारत के भौगोलिक संकेतक (GI) की भावना को दर्शाती है।
- GI उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा: APEDA द्वारा GI उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित किया जाता है। उदाहरण के लिए- नागा मिर्च (नागालैंड) और काला चावल (मणिपुर) का निर्यात यूनाइटेड किंगडम तथा असम नींबू का निर्यात इटली को किया जाता है।
- एक जिला एक उत्पाद (ODOP): इसके तहत प्रत्येक जिले के एक प्रमुख उत्पाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उत्पादों को “जिला निर्यात हब” (DEH) और GI-टैग प्राप्त उत्पादों के रूप में पहचाना जाता है।
- ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC): GI-टैग प्राप्त उत्पादों को भारत और वैश्विक खरीदारों से जोड़ता है।

- आगे की राह:

निष्कर्षत: GI टैग भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, कृषि एवं पारंपरिक विरासत की पहचान और संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है। यह स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार, रोजगार एवं आय के अवसर प्रदान करते हुए भारतीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहचान दिलाता है।
