संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित औरअथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।
सामान्य अध्ययन -3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
संदर्भ: भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए वार्ता संपन्न होने की घोषणा की, जो भारत की सबसे रणनीतिक आर्थिक साझेदारियों में से एक में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अन्य संबंधित जानकारी
- वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, अगले 10 से 15 दिनों में पहले दस्तावेज़ की भाषा को व्यवस्थित रूप दिया जाएगा, जिसके पश्चात इसकी “विधिक समीक्षा” होगी। यूरोपीय संसद का अनुसमर्थन मिलने से पूर्व इसका अनुवाद करके यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों को भेजा जाएगा।
- इस ‘महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA)’ के साथ-साथ, भारत एक नई ‘भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा और रक्षा साझेदारी’ तथा ‘गतिशीलता प्रणाली’ में भी प्रवेश कर रहा है, जो यूरोपीय संघ के क्षेत्र में भारतीयों की सुरक्षित और कानूनी आवाजाही को सुलभ बनाएगी।
- दोनों पक्षों ने वर्गीकृत सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाने के लिए ‘सूचना सुरक्षा समझौते’ पर वार्ता शुरू करने का भी स्वागत किया।
समझौते के मुख्य बिंदु
• विकासक्रम
- 2007: भारत-यूरोपीय संघ के मध्य मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता पहली बार प्रारंभ हुई।
- 2013: ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए बाजार पहुंच संबंधी मतभेदों के कारण वार्ता को निलंबित कर दिया गया।
- 2022: दोनों पक्षों के बीच उन मुद्दों को बाहर रखने की सहमति के साथ वार्ता पुनः शुरू हुई, जिन पर पूर्व में समझौता नहीं हो पा रहा था।
- 2026: लगभग दो दशकों की वार्ता के पश्चात, भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया, जिसे “सभी समझौतों की जननी” (Mother of all deals) के रूप में प्रचारित किया गया है।
• शुल्क दरों में कटौती:
- यूरोपीय संघ (EU) भारतीय निर्यात पर 99.5% शुल्कों को समाप्त करेगा।
- भारत ने यूरोपीय संघ से होने वाले 97.5% आयात पर शुल्क रियायतें दी हैं, जिससे यूरोपीय वाइन और लक्जरी कारें सस्ती होने की संभावना है।
• भारत के लिए लाभ: 97% ‘टैरिफ लाइनों’ (शुल्क श्रेणियों) पर शुल्क में कटौती की गई है, जो कुल व्यापार मूल्य के 99.5% को कवर करती है।
- इसमें से, भारत के 90.7% निर्यात पर समझौते के लागू होने के पहले दिन से ही शुल्क पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसमें कपड़ा, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, चाय, कॉफी, मसाले, खेल का सामान, खिलौने, रत्न एवं आभूषण और कुछ समुद्री उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्र शामिल हैं।
- भारत के अन्य 2.9% निर्यात पर तीन से पांच वर्षों में शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा। इसमें कुछ समुद्री उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और हथियार एवं गोला-बारूद शामिल होंगे।
- इसके अतिरिक्त, भारत के 6% निर्यात पर शुल्क दरों में कटौती की जाएगी, जिसमें कुछ पोल्ट्री (कुक्कुट) उत्पाद, संरक्षित सब्जियां और बेकरी उत्पाद आदि शामिल हैं।
• यूरोपीय संघ के लिए भारत का प्रस्ताव: भारत अपनी 92.1% शुल्क श्रेणियों की पेशकश कर रहा है जो यूरोपीय संघ के 97.5% निर्यात को कवर करती हैं, विशेष रूप से:

- 49.6% शुल्क श्रेणियों पर तत्काल शुल्क उन्मूलन होगा।
- 39.5% शुल्क श्रेणियों पर 5, 7 और 10 वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से शुल्क समाप्त किया जाएगा।
- 3% उत्पादों पर चरणबद्ध शुल्क कटौती लागू होगी और कुछ उत्पादों जैसे सेब, नाशपाती, आड़ू और कीवी फल के लिए टैरिफ दर कोटा (TRQ) निर्धारित किया गया है।
• भारत के लिए शुल्क का उन्मूलन: निम्नलिखित क्षेत्र, जिन्हें भारत मुख्य रूप से यूरोपीय संघ (EU) को निर्यात करता है, उनमें शुल्कों को पूर्णतः समाप्त कर दिया जाएगा:
- समुद्री उत्पाद: (वर्तमान शुल्क 26% तक)
- रसायन: (वर्तमान में 12.8%)
- प्लास्टिक और रबर की वस्तुएं: (6.5%)
- चमड़े के जूते (फुटवियर): (17%)
- कपड़ा और परिधान (Textiles and Apparel): (प्रत्येक पर 12%)
- आधार धातुएं (Base Metals): (10%)
- रत्न एवं आभूषण: (4%)
- फर्नीचर और संबद्ध उपभोक्ता वस्तुएं: (10.5%)
- खिलौने और खेल का सामान: (4.7%)
- सेवा क्षेत्र पर: यूरोपीय संघ ने 144 सेवा उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताओं पर सहमति व्यक्त की है, जिनमें आईटी/आईटीईएस (IT/ITeS), पेशेवर सेवाएं, शिक्षा और अन्य व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं।
• कोटा-आधारित प्रणालियाँ: ऑटोमोबाइल और वाइन जैसे कुछ विशिष्ट क्षेत्रों के लिए।
- भारत ₹25 लाख से अधिक मूल्य वाली यूरोपीय कारों को वर्तमान 110% के स्थान पर 10% तक के निम्न सीमा शुल्क पर आयात करने की अनुमति देने हेतु सहमत हुआ है, किंतु यह एक ‘कोटा’ (निश्चित मात्रा) के अधीन होगा।
• संवेदनशील क्षेत्रों के लिए छूट:
- भारत के रणनीतिक कृषि और डेयरी क्षेत्र संरक्षित रहेंगे।
- यूरोपीय संघ (EU) बीफ, चीनी, चावल, चिकन मांस, मिल्क पाउडर, शहद, केला, सॉफ्ट गेहूं, लहसुन और इथेनॉल पर अपने वर्तमान टैरिफ (शुल्क) को यथावत बनाए रखेगा।
- ऊर्जा और कच्चे माल की सरकारी खरीद पर कोई सहमति नहीं बनी है।
• विवादास्पद ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) पर सीमित समझौता: यह समझौता भारत में कार्बन फुटप्रिंट सत्यापनकर्ताओं (Verifiers) के लिए मान्यता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसमें यह भी निर्दिष्ट किया गया है कि यदि यूरोपीय संघ CBAM के अंतर्गत किसी तीसरे देश को रियायतें प्रदान करता है, तो वे रियायतें स्वतः ही भारत पर भी लागू होंगी।
समझौते का महत्त्व
- भू-राजनीतिक महत्व: यह समझौता उन दो अर्थव्यवस्थाओं के मध्य हुआ है जिनकी वैश्विक व्यापार में एक-तिहाई हिस्सेदारी है, विशेषकर अमेरिकी शुल्क व्यवस्था द्वारा उत्पन्न अनिश्चितता के दौर में।
- ‘अब तक का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA)’: यह ऐतिहासिक समझौता भारतीय किसानों और लघु उद्योगों के लिए यूरोपीय बाजार तक पहुंच को सुगम बनाएगा, विनिर्माण क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन करेगा और हमारे सेवा क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करेगा।
- आयात विविधीकरण: यूरोपीय संघ की उच्च तकनीकी वस्तुओं के आयात से भारत के आयात स्रोतों में विविधीकरण आने की संभावना है, जिससे व्यवसायों के लिए आगत लागत कम होगी, उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा और भारतीय व्यवसायों के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत होने का अवसर मिलेगा।
यूरोपीय संघ के बारे में:
- यूरोपीय संघ मुख्य रूप से यूरोप में स्थित 27 सदस्य देशों का एक अधिराष्ट्रीय (Supranational) राजनीतिक और आर्थिक संघ है।
- इसकी स्थापना वर्ष 1993 में मास्ट्रिच संधि (1992) के माध्यम से हुई थी।
- 27 सदस्य देशों में से 19 देश ‘यूरो’ को अपनी आधिकारिक मुद्रा के रूप में उपयोग करते हैं।
- यूरोपीय संघ, भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2024 में दोनों के मध्य €120 बिलियन का वस्तु व्यापार हुआ, जो भारत के कुल व्यापार का 11.5% है।
- भारत, यूरोपीय संघ का 9वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। वर्ष 2024 में यूरोपीय संघ के कुल वस्तु व्यापार में भारत की हिस्सेदारी 2.4% रही, जो कि अमेरिका (17.3%), चीन (14.6%) और यूनाइटेड किंगडम (10.1%) की तुलना में काफी कम है।
