संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-3: पर्यावरण संरक्षण।
सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
संदर्भ : हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने भारत के चीता पुनर्वास कार्यक्रम के हिस्से के रूप में बोत्सवाना से प्राप्त नौ चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पृथकवास बाड़ों में छोड़ा।
अन्य संबंधित जानकारी
- बोत्सवाना से आए छह मादा और तीन नर चीतों के आगमन के साथ, भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 48 हो गई है। इसमें ‘प्रोजेक्ट चीता’ के अंतर्गत अफ्रीकी देशों से स्थानांतरित 20 वयस्क चीते और भारत में जन्मे 28 शावक सम्मिलित हैं।
- स्थानांतरण कार्यक्रम के तहत किसी अफ्रीकी देश से लाए गए चीतों का यह तीसरा बैच है। इससे पूर्व सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीतों का पहला बैच और फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों का दूसरा बैच लाया गया था।
- यह पहल जंगली आवासों में इस प्रजाति का पुनर्वास करने के उद्देश्य से चीतों के विश्व के पहले अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण को दर्शाती है।
- यह स्थानांतरण एक सरकारी समझौते (G2G समझौता) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अगले दशक में भारत में एक आनुवंशिक रूप से विविध और मुक्त-विचरण करने वाली चीता आबादी स्थापित करना है।
चीतों के पुनर्वास के लिए कुनो राष्ट्रीय उद्यान का चयन क्यों किया गया?

- मध्य प्रदेश में स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान ने सर्वेक्षण किए गए स्थलों में उच्चतम रेटिंग प्राप्त की है, जिससे यह इसे भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम के लिए सबसे उपयुक्त स्थल बन जाता है।
- इस उद्यान में श्योपुर-शिवपुरी वन क्षेत्र के भीतर लगभग 6,800 वर्ग किमी में फैला एक विशाल और अविच्छिन्न परिदृश्य है, जो चीता आबादी की गतिशीलता और विस्तार के लिए पर्याप्त है।
- इसकी आवास स्थितियाँ चीतों के लिए अत्यधिक अनुकूल हैं, यहाँ प्रजातियों को जंगली अवस्था में बनाए रखने के लिए आवश्यक उपयुक्त भू-भाग और पर्याप्त शिकार संसाधन उपलब्ध हैं।
- एच. जी. चैंपियन और एस. के. सेठ (1968) के वन वर्गीकरण के अनुसार, यह उद्यान ‘उत्तरी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन’ श्रेणी के अंतर्गत आता है, जो चीतों के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिक वातावरण प्रदान करता है।
- मार्च 2026 तक, कुनो राष्ट्रीय उद्यान के बाद मध्य प्रदेश का गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य, भारत में चीतों का दूसरा आवास बन गया है और वर्तमान में इस अभयारण्य में तीन चीते हैं।
चीता के बारे में
- चीता (Acinonyx jubatus) दुनिया का सबसे तेज़ दौड़ने वाला स्थलीय जीव है और अफ्रीका की सबसे संकटग्रस्त ‘बड़ी बिल्ली’ प्रजाति है।
- यह मात्र तीन सेकंड में 110 किमी/घंटा (लगभग 70 मील प्रति घंटे) से अधिक की चाल से दौड़ सकता है और दौड़ते समय इसकी एक छलांग सात मीटर तक लंबी हो सकती है।
- “चीता” नाम की उत्पत्ति संस्कृत शब्द “चित्र” से हुई है, जिसका अर्थ है “चित्तीदार”।
- चीता महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाता है और इसे सवाना एवं घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र में ‘कीस्टोन प्रजाति’ (Keystone species) और ‘शीर्ष शिकारी’ माना जाता है।
- प्रजातियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 4 दिसंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस’ मनाया जाता है।
- शारीरिक विशेषताएँ:
- नर चीते मादाओं की तुलना में थोड़े बड़े होते हैं और उनके सिर का आकार भी कुछ बड़ा होता है, हालांकि अन्य ‘बड़ी बिल्लियों’ की तुलना में यह अंतर काफी सूक्ष्म होता है।
- इनका शरीर दुबला-पतला, कमर संकरी और छाती गहरी होती है, जिस कारण ये अत्यधिक तीव्र गति से दौड़ने के लिए अनुकूलित होते हैं।
- लंबी टांगों और विशिष्ट पतले शारीरिक ढाँचे के कारण चीते, अन्य बिल्ली प्रजातियों से अलग होते हैं।
- चीता अपने वंश ‘एसिनोनिक्स’ (Acinonyx) का एकमात्र जीवित सदस्य है।
- वैश्विक वितरण:
- चीता (Acinonyx jubatus) की सबसे बड़ी वर्तमान आबादी छह देशों के एक विस्तृत परिदृश्य में पाई जाती है, जिसमें नामीबिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, अंगोला, मोजाम्बिक और ज़ाम्बिया शामिल हैं।
- विश्वभर में नामीबिया में सर्वाधिक चीते पाए जाते हैं और इसे अक्सर “विश्व की चीता राजधानी” के रूप में जाना जाता है।
- संरक्षण स्थिति:
- चीता (Acinonyx jubatus) को IUCN की रेड लिस्ट (लाल सूची) में ‘सुभेद्य’ (Vulnerable) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है।
- यह प्रजाति ‘लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय’ (CITES) के परिशिष्ट-I में सम्मिलित है, जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में संरक्षण का उच्चतम स्तर प्रदान करता है।
- एशियाई चीता (Acinonyx jubatus venaticus), जो कभी पूरे भारत और मध्य पूर्व में व्यापक रूप से पाया जाता था, अब ‘अति संकटापन्न’ श्रेणी में है। यह वर्तमान में केवल ईरान के मध्य रेगिस्तानी क्षेत्रों में जीवित बचा है और भारत में इसे 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था।
भारत में चीता पुनर्वास के प्रयास

- भारत में चीतों के पुनर्वास के औपचारिक प्रयास 1970 के दशक में प्रारंभ हुए थे, जब एशियाई चीतों के स्थानांतरण के लिए ईरान के साथ चर्चा शुरू की गई थी, जिसके बाद केन्या के साथ भी बातचीत हुई।
- वर्ष 2009 में, भारत ने अफ्रीका से चीतों को लाने का प्रस्ताव रखा, जिस पर भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय से स्पष्टीकरण की माँग की गई थी। वर्ष 2020 में, न्यायालय ने एक पायलट पुनर्वास कार्यक्रम के लिए सीमित संख्या में चीतों को भारत लाने की अनुमति प्रदान की।
- इन निर्देशों का पालन करते हुए, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की देखरेख में वर्ष 2022 में आधिकारिक तौर पर ‘प्रोजेक्ट चीता’ का शुभारंभ किया गया और ‘चीता पुनर्वास कार्यक्रम’ इसका मुख्य घटक है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) भारत के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक सांविधिक निकाय है, जिसकी स्थापना बाघ संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 2006 में की गई थी।
- वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए भारत और नामीबिया के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, आठ चीतों का पहला बैच (पांच मादा और तीन नर) 17 सितंबर, 2022 को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया गया था।
- फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 अफ्रीकी चीतों का दूसरा बैच (सात नर और पांच मादा) कुनो राष्ट्रीय उद्यान पहुँचा, जिससे पुनर्वास कार्यक्रम को और अधिक लोकप्रियता मिली।
Source:
PIB
Indian Express
