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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी—विकास तथा अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर उनके प्रभाव; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास; आईटी, अंतरिक्ष एवं कंप्यूटर के क्षेत्र में जागरूकता।
संदर्भ: भारत ने अपना पहला 5.56 किमी फ्री-स्पेस क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) लिंक प्रदर्शित किया है, जिसने वायुमंडल के माध्यम से BISAG-N और IIT गांधीनगर के बीच क्वांटम-सुरक्षित संचार चैनल स्थापित किया।
अन्य संबंधित जानकारी
- फील्ड परीक्षण: 27–28 सितंबर 2026 की रात आयोजित इस परीक्षण में QNu लैब्स की पॉइंटिंग, एक्विजिशन एंड ट्रैकिंग (PAT) प्रणाली का उपयोग करके BISAG-N और IIT गांधीनगर के बीच क्वांटम संचार चैनल स्थापित किया गया।
- प्रदर्शन: इस लिंक ने 5% से कम क्वांटम बिट एरर रेट (QBER) बनाए रखा और 230–260 बिट प्रति सेकंड (bps) की दर से सुरक्षित कुंजियाँ उत्पन्न कीं। फ्री-स्पेस ऑप्टिकल चैनल पर QNu लैब्स के आर्मोस (Armos) क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन उपकरण का उपयोग किया गया।
- एंड-टू-एंड सुरक्षा: जनरेट कुंजियों को BISAG-N के वैदिक कवच (Vedic Kavach) के साथ एकीकृत किया गया, जो पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी-सक्षम प्लेटफॉर्म है। इससे परीक्षण संदेशों के सफल एन्क्रिप्शन, प्रसारण और डिक्रिप्शन को सक्षम बनाया गया। इस आर्किटेक्चर में हार्डवेयर-आधारित क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन के साथ पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (PQC) और क्वांटम रैंडम नंबर जनरेशन (QRNG) को संयोजित किया गया।
- भारत की प्रगति: यह उपलब्धि पहले किए गए स्वदेशी प्रदर्शनों पर आधारित है: इसरो ने 2021 में 300 मीटर की दूरी पर फ्री-स्पेस क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन का प्रदर्शन किया था, जिसके बाद 2022 में एंटैंगलमेंट-आधारित 300 मीटर का प्रदर्शन किया गया।
- 2025 में डीआरडीओ और IIT दिल्ली ने 1 किमी से अधिक दूरी पर एंटैंगलमेंट-आधारित फ्री-स्पेस क्वांटम-सुरक्षित संचार का प्रदर्शन किया।
- वर्तमान प्रदर्शन भारत की प्रदर्शित स्थलीय फ्री-स्पेस सीमा को 5.56 किमी तक विस्तारित करता है।
क्वांटम संचार और क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन के बारे में
- A. क्लासिकल से क्वांटम सूचना तक
- क्लासिकल बिट 0 या 1 को दर्शाता है, जबकि क्यूबिट एक ऐसी क्वांटम प्रणाली है जो अवस्थाओं के सुपरपोजिशन में रह सकती है। क्वांटम प्रौद्योगिकियाँ सुपरपोजिशन, एंटैंगलमेंट और क्वांटम मापन जैसे गुणों का उपयोग करती हैं।
- ये सिद्धांत क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम पदार्थ एवं उपकरणों में अनुप्रयोगों का आधार हैं।
- B. क्वांटम कंप्यूटिंग बनाम क्वांटम संचार
- क्वांटम कंप्यूटिंग सूचना प्रसंस्करण के लिए क्यूबिट का उपयोग करती है, जबकि क्वांटम संचार सुरक्षित कुंजी वितरण और अन्य नेटवर्किंग अनुप्रयोगों के लिए क्वांटम अवस्थाओं—अक्सर फोटॉन—का उपयोग करता है।
- क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन क्वांटम संचार का एक अनुप्रयोग है, न कि क्वांटम कंप्यूटिंग का।
- C. क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन क्या है?
- क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन दो पक्षों को क्वांटम अवस्थाओं का उपयोग करके एक साझा क्रिप्टोग्राफिक कुंजी स्थापित करने में सक्षम बनाता है। इन अवस्थाओं को बीच में रोकने या मापने का प्रयास उनमें परिवर्तन कर सकता है, जिससे जासूसी का पता लगाया जा सकता है।
- नो-क्लोनिंग सिद्धांत किसी अज्ञात क्वांटम अवस्था की हूबहू प्रतिलिपि बनाए जाने को रोकता है, जो क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन का एक मूलभूत आधार प्रदान करता है।
- क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन क्रिप्टोग्राफिक कुंजियों का डिस्ट्रीब्यूशन करता है, न कि सीधे पूरे संचार को एन्क्रिप्ट करता है; जनरेट कुंजियों का उपयोग बाद में एक एन्क्रिप्शन आर्किटेक्चर के अंतर्गत किया जाता है।
- D. फाइबर बनाम फ्री-स्पेस बनाम उपग्रह क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन

क्वांटम संचार में वैश्विक विकास
- चीन — मिकियस (Micius): चीन ने 2016 में मिकियस (QUESS) लॉन्च किया, जिसे दुनिया का पहला क्वांटम संचार उपग्रह माना जाता है। यह लगभग 500 किमी की निम्न पृथ्वी कक्षा में संचालित होता है और इसने उपग्रह-से-भूमि क्वांटम संचार तथा क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन का प्रदर्शन किया।
- चीन — जिनान-1 (Jinan-1): 2022 में लॉन्च किया गया यह छोटा क्वांटम माइक्रोसैटेलाइट अधिक व्यावहारिक उपयोग के लिए तैयार किया गया था, जिसमें पोर्टेबल ग्राउंड स्टेशनों के साथ उपयोग और रियल-टाइम क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन शामिल हैं। परीक्षणों में एकल उपग्रह पास के दौरान 10.7 लाख बिट तक सुरक्षित-कुंजी सामग्री तैयार की गई।
- एकीकृत नेटवर्क: चीन ने उपग्रह लिंक को 2,000 किमी से अधिक लंबे स्थलीय फाइबर-आधारित क्वांटम संचार बैकबोन के साथ जोड़ा है, जिससे एकीकृत अंतरिक्ष–भूमि नेटवर्क की संभावनाओं का प्रदर्शन हुआ है।
- चीन से आगे: यूरोपीय क्वांटम संचार अवसंरचना (EuroQCI) को यूरोपीय संघ-व्यापी प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें स्थलीय फाइबर नेटवर्क को भविष्य के अंतरिक्ष खंड के साथ जोड़ा जाएगा। जापान भी स्थलीय और उपग्रह-आधारित क्वांटम संचार प्रौद्योगिकियों का विकास कर रहा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन और पोर्टेबल ग्राउंड स्टेशनों के बीच सुरक्षित कुंजी साझाकरण प्रदर्शित करने वाले प्रयोग शामिल हैं।
भारत का क्वांटम संचार रोडमैप
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM): अप्रैल 2023 में 2023–24 से 2030–31 तक की अवधि के लिए ₹6,003.65 करोड़ के परिव्यय के साथ स्वीकृत इस मिशन में क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग एवं मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम पदार्थ एवं उपकरण शामिल हैं।
- दीर्घ-दूरी के लक्ष्य: NQM के तहत 2,000 किमी से अधिक दूरी के इंटर-सिटी क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन , भारत के भीतर 2,000 किमी से अधिक दूरी पर ग्राउंड स्टेशनों के बीच उपग्रह-आधारित सुरक्षित क्वांटम संचार, लंबी दूरी का अंतरराष्ट्रीय क्वांटम संचार तथा क्वांटम मेमोरी के साथ मल्टी-नोड क्वांटम नेटवर्क की परिकल्पना की गई है।
- भारतीय नेटवर्क की प्रमुख उपलब्धियाँ: 2025 में NQM समर्थित QNu लैब्स ने मौजूदा ऑप्टिकल-फाइबर अवसंरचना पर 500 किमी के क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का प्रदर्शन किया। अप्रैल 2026 में भारत ने 1,000 किमी के क्वांटम संचार नेटवर्क की जानकारी दी, जिससे मिशन के 2,000 किमी के लक्ष्य की दिशा में प्रगति हुई।
- वृहत पारिस्थितिकी तंत्र: भारत के प्रयास अब फ्री-स्पेस और फाइबर-आधारित क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन तक विस्तृत हो गए हैं। साथ ही, उपग्रह-आधारित क्वांटम संचार की तैयारी भी की जा रही है। वर्तमान 5.56 किमी के प्रदर्शन ने इस उभरते पारिस्थितिकी तंत्र में एक और क्षमता को जोड़ा है।
भारत के लिए इस विकास का महत्व
- क्वांटम-सुरक्षा क्षमता को सुदृढ़ करता है: ओपन-एयर ऑप्टिकल चैनल के माध्यम से क्वांटम-सुरक्षित कुंजियों के वितरण की स्वदेशी क्षमता का प्रदर्शन करता है, जो फाइबर-आधारित प्रणालियों की पूरक है।
- रणनीतिक अनुप्रयोग: फ्री-स्पेस क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन का उपयोग रक्षा, सरकारी संचार, वित्तीय प्रणालियों, महत्वपूर्ण अवसंरचना तथा अन्य संवेदनशील नेटवर्कों में किया जा सकता है।
- लचीला संचार अवसंरचना: जहाँ ऑप्टिकल फाइबर बिछाना कठिन या व्यावहारिक नहीं है, वहाँ यह उपयोगी हो सकता है और फाइबर- तथा उपग्रह-आधारित क्वांटम संचार का पूरक बन सकता है।
- घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करता है: QNu Labs, BISAG-N और IIT गांधीनगर के बीच सहयोग स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए उद्योग, सरकार और शिक्षा जगत को एक साथ लाता है।
- लंबी-दूरी की नेटवर्किंग में सहायक: यह प्रदर्शन NQM के तहत दीर्घ-दूरी और हाइब्रिड क्वांटम संचार नेटवर्क विकसित करने के भारत के व्यापक प्रयासों में एक स्थलीय फ्री-स्पेस क्षमता जोड़ता है।
