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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करा।

संदर्भ: मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेशिया की आधिकारिक यात्रा की।

अन्य संबंधित जानकारी

• इस यात्रा ने भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (CSP) को सुदृढ़ करने और उसका विस्तार करने के लिए दोनों नेताओं की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की। ध्यातव्य है कि इस साझेदारी को अगस्त 2024 में उन्नत किया गया था।

• दोनों नेताओं ने 11 समझौतों/समझौता ज्ञापनों (MoUs) के आदान-प्रदान का अवलोकन किया, जिनका उद्देश्य कई क्षेत्रों में संस्थागत सहयोग में वृद्धि करना है।

• यह यात्रा 2025 में राजनयिक शिथिलता के बाद द्विपक्षीय संबंधों में गति लाने में सहायक रही और इसने आसियान केंद्रीयता तथा भारत-प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराया।

यात्रा के मुख्य बिंदु

• 11 समझौते/समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए जिनमें सेमीकंडक्टर, आपदा प्रबंधन, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना, स्वास्थ्य सेवा, राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यावसायिक शिक्षा (TVET), भारतीय श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, भ्रष्टाचार-विरोध और श्रव्य-दृश्य सह-निर्माण जैसे क्षेत्रों को कवर किया गया।

• सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद की स्पष्ट और कड़ी निंदा की गई। दोनों नेताओं ने “कोई दोहरा मापदंड नहीं, कोई समझौता नहीं” के सिद्धांत पर बल दिया और संयुक्त राष्ट्र एवं वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) में सहयोग करने प्रतिज्ञा ली।

• सेमीकंडक्टर में सहयोग को बढ़ाने पर समझौता हुआ। यह समझौता IIT-मद्रास ग्लोबल और मलेशिया की ‘एडवांस्ड सेमीकंडक्टर एकेडमी’ तथा दोनों पक्षों के उद्योग निकायों के बीच सहयोग पर आधारित है।

• इसके साथ ही, NPCI इंटरनेशनल लिमिटेड और मलेशिया के PayNet के बीच भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के साथ ही भारतीय रुपये और मलेशियाई रिंगित (Ringgit) का उपयोग करके व्यापार में स्थानीय-मुद्रा निपटान पर बल दिया गया।

• द्विपक्षीय व्यापार को 18.6 बिलियन डॉलर से अधिक करने, निवेश में वृद्धि करने और खाद्य, ऊर्जा एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

• भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता, नौवहन की स्वतंत्रता और UNCLOS 1982 के अनुसार विवादों के समाधान पर बल दिया गया।

• ‘आसियान केंद्रीयता’ के लिए समर्थन, आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने और बहुपक्षीय मंचों पर बेहतर समन्वय का आह्वान किया गया।

भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंध: 

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि·         1957 में मलाया संघ के साथ राजनयिक संबंधों की शुरुआत।·         2010 में रणनीतिक साझेदारी को रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया गया।·         भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत एक प्रमुख भागीदार।
आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंध·         मलेशिया, आसियान (ASEAN) में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।·         आसियान-भारत सेवा एवं निवेश समझौता 2015 से प्रभावी हुआ।·         जुलाई 2011 से एक द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (CECA) प्रभावी है।·         मलेशिया को भारत के प्रमुख निर्यातों में पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी, रसायन, अनाज, विद्युत उपकरण और मसाले शामिल हैं।·         मलेशिया से भारत के प्रमुख आयातों में पाम ऑयल, पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रबर और एल्युमीनियम शामिल हैं।·         2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 19.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग·         रक्षा सहयोग 1993 के रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधारित है, जिसे 2023 में संशोधित किया गया था।·         भारत और मलेशिया नियमित रूप से थल सेना, नौसेना और वायु सेना अभ्यास आयोजित करते हैं, जिनमें हरिमऊ शक्ति, समुद्र लक्ष्मण और उदार शक्ति शामिल हैं।·         भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल नियमित रूप से मलेशिया के साथ ‘पोर्ट कॉल’ और समुद्री सहयोग करते हैं।·         भारत ने 2023 में कुआलालंपुर में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के पहले क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया।·         दोनों नेताओं ने ‘आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस’ (ADMM-Plus) ढांचे में भारत की निरंतर भागीदारी की सराहना की और 2024-2027 के कार्यकाल के लिए आतंकवाद विरोधी कार्य समूह की मलेशिया के साथ सह-अध्यक्षता का स्वागत किया। 
शिक्षा एवं कौशल विकास·         दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के देशों में छात्रों की बड़ी संख्या और मलेशियाई तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (MTCP) तथा भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (ITEC) के तहत चल रहे सहयोग का अवलोकन किया।·         प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मलेशियाई छात्रों को ‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत अवसरों का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। 
सतत विकास·         दोनों नेताओं ने जैव विविधता संरक्षण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया और इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के संस्थापक सदस्य के रूप में मलेशिया की भूमिका पर ध्यान दिया।·         दोनों देशों के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (NDMA) के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत सहयोग निरंतर जारी रहेगा।·         नेताओं ने आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) सहित क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहलों को स्वीकार किया। 
भारतीय प्रवासी·         मलेशिया में लगभग 2.75 मिलियन भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) निवास करते हैं, जो अमेरिका के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा PIO समुदाय है।·         मलेशिया में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय (2.9 मिलियन) है। 

भारत के लिए मलेशिया का महत्व

• दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन के रणनीतिक प्रतिकार के रूप में: मलेशिया चीन के बढ़ते आर्थिक और समुद्री प्रभाव के बीच एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक स्थान रखता है।

  • मलेशिया के साथ मजबूत संबंध भारत को आसियान में चीन के प्रभाव को संतुलित करने और एक बहुध्रुवीय हिंद-प्रशांत व्यवस्था को सुदृढ़ करने में सक्षम बनाते हैं।

• समुद्री और भारत-प्रशांत सुरक्षा का आधार: मलक्का जलडमरूमध्य के मुहाने पर स्थित होने के कारण, मलेशिया नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • मलेशिया के साथ सहयोग भारत के ‘सागर’ (SAGAR/MAHASAGAR) विजन को आगे बढ़ाता है, समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCLOS) का समर्थन करता है, और बिना किसी सैन्य टकराव के जबरन समुद्री व्यवहार का विरोध करता है।

• एक्ट ईस्ट’ नीति और आसियान केंद्रीयता का स्तंभ: आसियान के एक प्रमुख सदस्य के रूप में, मलेशिया भारत के ‘एक्ट ईस्ट’ संबंधों को सुदृढ़ करता है और एकतरफा, चीन-केंद्रित क्षेत्रीय संरचनाओं के खिलाफ ‘आसियान केंद्रीयता’ को बनाए रखने में मदद करता है—जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र समावेशी और नियम-आधारित बना रहे।

• ‘चीन-प्लस-वन’ आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण: इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर बैक-एंड विनिर्माण में मलेशिया की शक्ति भारत की डिजाइन और फैब्रिकेशन (निर्माण) संबंधी महत्वाकांक्षाओं की पूरक है। यह लचीली, गैर-चीन आपूर्ति श्रृंखलाओं को सक्षम बनाता है और आर्थिक दबाव के प्रति संवेदनशीलता को कम करता है।

Source :-
PIB
MEA
Business Standard

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