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सामान्य अध्ययन-2: भारत और उसके पड़ोसी संबंध।

सामान्य अध्ययन -3: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ और उनका प्रबंधन – संगठित अपराध का आतंकवाद से संबंध।

संदर्भ:  भारत ने पाक-अधिकृत कश्मीर में स्थित शक्सगाम घाटी में चीन द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों पर कड़ी आपत्ति जताई है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि यह रणनीतिक क्षेत्र उसका अभिन्न हिस्सा है और वहाँ किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि स्वीकार्य नहीं होगी।

अन्य संबंधित जानकारी: 

• भारत की यह टिप्पणी उन रिपोर्ट के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि चीन, शक्सगाम घाटी में एक ‘ऑल-वेदर रोड’ का निर्माण कर रहा है। यह घाटी सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में और भारतीय सेना के लिए रणनीतिक महत्त्व के प्रमुख क्षेत्रों के निकट स्थित है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, चीन द्वारा यहाँ सड़क के लगभग 75 किलोमीटर हिस्से का निर्माण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है, जिसकी चौड़ाई लगभग 10 मीटर होने का अनुमान है, और अभी भी निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है।

• भूटान के डोकलाम में 2017 के गतिरोध के बाद से शक्सगाम में चीन की निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया: 

• भारत ने शक्सगाम घाटी में चीन के बुनियादी ढांचा का आधिकारिक तौर पर विरोध किया है और इस क्षेत्र को भारतीय क्षेत्र कहा है।

• विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को मान्यता नहीं देता है, जो कि उसकी बेल्ट एंड रोड पहल की एक प्रमुख परियोजना है। भारत का कहना है कि यह गलियारा पाकिस्तान के “जबरन और अवैध कब्जे” वाले भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है।

• भारत ने दोहराया कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं, और यह बात पाकिस्तानी और चीनी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बता दी गई थी।

• मंत्रालय ने कहा कि  भारत के पास “अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक उपाय करने का अधिकार है,” जो इस क्षेत्र के घटनाक्रमों पर उसकी निरंतर राजनयिक और रणनीतिक सतर्कता का संकेत भी है।

शक्सगाम घाटी के बारे में 

• शक्सगाम घाटी 5,180 वर्ग किमी. में फैला भारतीय क्षेत्र है जो काराकोरम पर्वतमाला और कुनलुन पर्वत के बीच स्थित है तथा सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र के उत्तर में स्थित है।

• 1947 में जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण के दौरान पाकिस्तान ने इस पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था और 1963 में चीन और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित “सीमा समझौते” के कारण पाकिस्तान ने इसे गैर-कानूनी रूप से चीन को सौंप दिया।

  • इस समझौते के तहत पाकिस्तान और चीन की एक साझा सीमा है, अन्यथा इन दोनों देशों के बीच कोई सीमा नहीं थी।
  • इस समझौते में एक क्लॉज़ यह भी निर्धारित करता है कि पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर विवाद के समाधान के बाद, संप्रभु प्राधिकारी  एक औपचारिक सीमा संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए चीन सरकार के साथ फिर से बातचीत शुरू करेंगे।
  • भारत ने कभी भी इस समझौते को मान्यता नहीं दी है, और उसका तर्क है कि पाकिस्तान के पास इस क्षेत्र को हस्तांतरित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।

चीन के साथ प्रमुख विवादित क्षेत्र 

• अक्साई चिन (पूर्वी लद्दाख): यह भारतीय क्षेत्र है, जिस पर चीन का नियंत्रण है। यह क्षेत्र  G219 राजमार्ग के जरिये तिब्बत को शिनजियांग से जोड़ता है।

• पूर्वी लद्दाख क्षेत्र: वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के स्पष्ट न होने के कारण देपसांग प्लेन्स, डेमचोक, पैंगोंग त्सो आदि में नियमित रूप से सैन्य झडपें होती रहती हैं।

• बाराहोती (चमोली जिला, उत्तराखंड): चीन इस चरागाह पर को अपना क्षेत्र बताता है, और प पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के गश्ती दल अक्सर इस क्षेत्र में प्रवेश करते हैं, झोपड़ियों को नुकसान पहुंचाते हैं, या स्थानीय लोगों को डराते-धमकाते हैं।

• अरुणाचल प्रदेश: चीन इसे “दक्षिण तिब्बत” कहता है और अपने दावों को पुख्ता करने के लिए यहाँ के स्थानों के लिए “मानकीकृत नाम” जारी करता रहता है।

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