संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन-3: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषय।

संदर्भ: हाल ही में, भारत ने ओडिशा तट के निकट चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से परमाणु-सक्षम अग्नि-III बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया।

अन्य संबंधित जानकारी

  • सतह-से-सतह पर मार करने वाली अग्नि-III मिसाइल का प्रक्षेपण सामरिक बल कमान (SFC) द्वारा नियमित उपयोगकर्ता प्रशिक्षण अभ्यास के भाग के रूप में एक ‘रोड-मोबाइल’ लॉन्चर से किया गया।
  • मिसाइल का चयन उत्पादन बैच से यादृच्छिक रूप से किया गया था, जो इसकी परिचालन तत्परता को रेखांकित करता है।
  • स्वचालित प्रक्षेपण कमांड के बाद, दो-चरणीय ठोस-ईंधन वाली इस मिसाइल ने अपने निर्धारित उड़ान पथ का अनुसरण किया और बंगाल की खाड़ी में पूर्व-निर्धारित लक्ष्य क्षेत्र पर सटीक प्रहार किया।
  • परीक्षण ने सभी परिचालन और तकनीकी मापदंडों को प्रमाणित किया, जिससे प्रणाली की विश्वसनीयता और सटीकता की पुष्टि हुई।
  • पूर्वी तट पर स्थित रडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणालियों का उपयोग करके वास्तविक समय में मिसाइल के प्रक्षेपवक्र की निगरानी की गई।
  • प्रभाव बिंदु के निकट तैनात नौसैनिक जहाजों ने उड़ान के अंतिम चरण को रिकॉर्ड किया।
  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अनुसार, मिसाइल ने मिशन  के सभी उद्देश्यों को पूरा किया।

अग्नि-III की प्रमुख विशेषताएँ

  • प्रकार: मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM)।
  • मारक क्षमता: लगभग 3,000 से 3,500 किलोमीटर।
  • प्रणोदन: दो-चरणीय ठोस-ईंधन प्रणाली।
  • पेलोड: 1.5 टन तक, जो पारंपरिक और परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम है।
  • डिज़ाइन: इस मिसाइल की लम्बाई कम किन्तु चौड़ाई अधिक है और यह अग्नि-I और अग्नि-II की तुलना में भारी आयुध ले जाने में सक्षम है।
  • सटीकता एवं मार्गदर्शन: एक उन्नत ‘री-एंट्री व्हीकल’ के माध्यम से उच्च सटीकता प्राप्त की गई है। ‘री-एंट्री व्हीकल’, ‘इमेजिंग इंफ्रा-रेड’ (IIR) या ‘एक्टिव सीकर’ मार्गदर्शन प्रणालियों का उपयोग करता है।
  • प्रक्षेपण: इसे रेल या सड़क-मोबाइल लॉन्चर से प्रक्षेपित किया जा सकता है, जो इसके परिचालन लचीलापन और उत्तरजीविता को बढ़ाता है।
  • सामग्री एवं प्रदर्शन: मिसाइल की बॉडी पर क्रोमियम लेपन कथित तौर पर इसकी रेंज बढ़ाने में योगदान देता है।
  • सेवा में शामिल: यह वर्ष 2011 से सामरिक बल कमानमें सेवा दे रही है।

मिसाइल का महत्व

  • अग्नि-III भारत के ‘विश्वसनीय न्यूनतम निवारण’ के सिद्धांत को मूर्त रूप प्रदान करती है।
  • इसका सफल परीक्षण भारत के सामरिक मिसाइल बलों में विश्वास को सुदृढ़ करता है।
  • यह मिसाइल सामरिक बल कमान की परिचालन तत्परता में योगदान देती है।
  • यह रणनीतिक खतरों के विरुद्ध भारत की लंबी दूरी की मारक क्षमता को बढ़ाती है।
  • सामरिक बल कमान भारत की रणनीतिक हथियार प्रणालियों का प्रभावी प्रबंधन और परिचालन नियंत्रण सुनिश्चित करती है।

Source:
Newsonair
The Hindu
Economic Times

Shares: