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सामान्य अध्ययन-2: भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा करार।
संदर्भ: हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लुला डा सिल्वा ने भारत की आधिकारिक यात्रा की।
अन्य संबंधित जानकारी

• यह ब्राज़ील के राष्ट्रपति की भारत की पाँचवीं यात्रा और जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की ब्राज़ील यात्रा के उपरांत संपन्न हुई दूसरी आधिकारिक यात्रा थी।
• यात्रा के दौरान, ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में भाग लिया और नई दिल्ली में ‘भारत-ब्राज़ील आर्थिक मंच’ को संबोधित किया, जहाँ उन्होंने भारत को “ग्लोबल साउथ का लोकतांत्रिक बंधु” कहा।
• इस यात्रा ने भारत-ब्राज़ील रणनीतिक साझेदारी (2006) की पुष्टि की और राजनीतिक, आर्थिक, डिजिटल तथा बहुपक्षीय क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाया।
यात्रा के मुख्य बिंदु
• व्यापार और आर्थिक सहयोग: ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने द्विपक्षीय व्यापार के लिए 30 बिलियन डॉलर का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जो 2030 के लिए भारत के पूर्ववर्ती 2020 बिलियन डॉलर के लक्ष्य से अधिक है।

- नेताओं ने भारत-मर्कोसुर (MERCOSUR) अधिमान्य व्यापार समझौते के विस्तार, व्यापार बाधाओं को कम करने और निवेश प्रवाह को बढ़ाने पर भी चर्चा की।
• डिजिटल, AI और नवाचार साझेदारी: इस यात्रा ने डिजिटल सहयोग में एक बड़े प्रोत्साहन को चिह्नित किया, जिसमें ‘भविष्य के लिए डिजिटल साझेदारी पर संयुक्त घोषणा’ शामिल है।
- उन्होंने डिजिटल और जलवायु संक्रमणों को जोड़ने वाली ‘ओपन प्लैनेटरी इंटेलिजेंस नेटवर्क’ (OPIN) जैसी पहलों का भी शुभारंभ किया।
• स्वास्थ्य, फार्मा और पारंपरिक औषधियां: दोनों देशों ने निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति व्यक्त की:
- दवाओं और टीकों का संयुक्त उत्पादन।
- ग्लोबल साउथ के लिए किफायती स्वास्थ्य सेवा।
- नियामक संस्थाओं के बीच सहयोग।
- उन्होंने आयुर्वेद और योग जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और दुर्लभ एवं सामाजिक रूप से निर्धारित रोगों पर सहयोग पर भी बल दिया।
• रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग: दोनों पक्षों ने सह-विकास और सह-उत्पादन के माध्यम से रक्षा सहयोग को उन्नत करने पर सहमति जताई, जिसमें पनडुब्बी रखरखाव और उद्योग साझेदारी शामिल है।
- उन्होंने सहयोग का विस्तार साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र तक किया, साथ ही आतंकवाद की कड़ी निंदा की और आतंकवाद-विरोध के लिए किए जा रहे संयुक्त प्रयासों का समर्थन किया।
• ऊर्जा, जलवायु और महत्वपूर्ण खनिज: नेताओं ने ऊर्जा संक्रमण और जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की, जिसमें जैव ईंधन, हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ ईंधन शामिल हैं।
- उन्होंने ब्राज़ील में आयोजित होने वाले COP30 के परिणामों का समर्थन किया और दुर्लभ मृदा तत्वों एवं महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग करने तथा स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करने पर सहमति व्यक्त की।
- ISA (अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन), CDRI (आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी वैश्विक पहलों में सहयोग पर भी विशेष बल दिया गया।
• जन सम्पर्क और सांस्कृतिक कूटनीति: दोनों देशों ने पर्यटक और व्यावसायिक वीज़ा की अवधि बढ़ाकर 10 वर्ष कर दी और शिक्षा, पर्यटन, खेल, सिनेमा तथा युवा आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार किया।
• बहुपक्षीय सहयोग: भारत और ब्राज़ील ने पुनर्संरचित बहुपक्षवाद और वैश्विक संस्थानों में ‘ग्लोबल साउथ’ के मजबूत प्रतिनिधित्व के प्रति अपने समर्थन को दोहराया।
- ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अस्थायी सदस्यता (2028-29) के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया और भारत की आगामी ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता 2026 का भी समर्थन किया।
भारत-ब्राज़ील द्विपक्षीय संबंध
| राजनीतिक संबंध: | · राजनयिक संबंधों की शुरुआत 1948 में हुई थी और दोनों देशों ने उसी वर्ष अपने दूतावास खोले थे।· साझा वैश्विक दृष्टिकोण, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और समावेशी विकास के आधार पर, 2006 में इस संबंध को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किया गया था।· दोनों देश विभिन्न बहुपक्षीय मंचों जैसे— ब्रिक्स (BRICS), इप्सा (IBSA), जी-20 (G20), जी-4 (G4), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA), आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) और संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO), यूनेस्को (UNESCO) तथा विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) जैसे बहुपक्षीय निकायों में सहयोग करते हैं।· संस्थागत तंत्र में निम्नलिखित शामिल हैं:o संयुक्त आयोग की बैठक (विदेश मंत्री स्तर)o रणनीतिक वार्ता (राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार – NSA स्तर)o विदेश कार्यालय परामर्शo व्यापार निगरानी तंत्रo साइबर संवाद |
| रक्षा संबंध: | · 2003 में हस्ताक्षरित (2006 में अनुसमर्थित) एक रक्षा सहयोग समझौते के माध्यम से एक ‘संयुक्त रक्षा समिति’ का गठन किया गया था।· मार्च 2024 में एक ‘2+2 राजनीतिक-सैन्य संवाद’ की शुरुआत हुई।· दिसंबर में ब्राजीलियाई नौसेना, भारतीय नौसेना और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के बीच ‘स्कॉर्पीन-श्रेणी’ की पनडुब्बियों के रखरखाव पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। |
| आर्थिक संबंध: | · द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 15.21 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया (जो 2024 के 12.20 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है)।· भारतीय निर्यात: डीजल, कृषि-रसायन, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स (औषधि), इंजीनियरिंग वस्तुएं, सूत, एल्युमीनियम।· ब्राज़ील के निर्यात: कच्चा तेल, सोयाबीन तेल, सोना, चीनी, कपास, रसायन, लौह अयस्क।· ब्राज़ील में कुल भारतीय निवेश 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जो फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी), तेल एवं गैस और रसायनों जैसे क्षेत्रों में हुआ है।o निवेश सहयोग और सुविधा संधि (ICFT)।o दोहरे कराधान से बचाव समझौते (DTAA) को संशोधित करने वाला प्रोटोकॉल 2025 में लागू हुआ। |
| अंतरिक्ष सहयोग: | · दोनों देशों ने अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए 2004 में एक रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए, साथ ही अंतर-एजेंसी सहयोग को भी बढ़ावा दिया।· भारत ने ब्राज़ील के अमेजोनिया-1 (Amazonia-1) उपग्रह (2021) को प्रक्षेपित किया, जो ब्राज़ील का पहला पूर्णतः स्वदेशी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (है। |
| प्रवासी भारतीय: | · ब्राज़ील में भारतीय समुदाय की संख्या लगभग 5,000 होने का अनुमान है, जिनमें मुख्य रूप से भारत के अप्रवासी या प्रवासी शामिल हैं। |
भारत के लिए ब्राज़ील का महत्व
• प्रमुख आर्थिक और व्यापारिक भागीदार: ब्राज़ील, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, जिसका द्विपक्षीय व्यापार लगभग 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।
• रणनीतिक संसाधन भागीदार: ब्राज़ील के पास नियोबियम, लिथियम और लौह अयस्क जैसे महत्वपूर्ण खनिज हैं जो ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक वाहनों एवं बैटरियों और उन्नत विनिर्माण के लिए आवश्यक हैं। ये संसाधन भारत को अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और संसाधन निर्भरता कम करने में सहायता करते हैं।
• दक्षिण-दक्षिण और बहुपक्षीय संरेखण: प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, भारत और ब्राज़ील ‘दक्षिण-दक्षिण सहयोग’, न्यायसंगत वैश्विक शासन और बौद्धिक संपदा संतुलन को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स (BRICS), इब्सा (IBSA) संवाद मंच, जी-20 और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सहयोग करते हैं।
• अमेरिकी व्यापार दबावों के प्रति प्रतिक्रिया: दोनों देशों ने 50% अमेरिकी टैरिफ और संभावित अग्रिम व्यापारिक कार्रवाइयों का सामना किया है। उनकी व्यापारिक एकपक्षवाद, ऊर्जा नीतियों, प्रतिबंधों और शुल्कों पर साझा चिंताएं हैं, जिससे अमेरिका के साथ प्रभावी वार्ता के लिए समन्वय आवश्यक हो गया है।
• भू-राजनीतिक महत्व: यह सहयोग अमेरिका के व्यापारिक उतार-चढ़ाव, ब्रिक्स के भीतर तनाव और आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्संरेखण के बीच हुआ, जो रणनीतिक स्वायत्तता और गुटनिरपेक्ष कूटनीति में भारत-ब्राज़ील संरेखण को बढ़ावा देता है।
