संदर्भ: बिहार सरकार दो प्रमुख खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी के माध्यम से खनन गतिविधियों की शुरुआत करने की तैयारी कर रही है। इनमें बांका का पिंडारा कॉपर-लेड-जिंक ब्लॉक और जमुई का मजोस-भांटा मैग्नेटाइट ब्लॉक शामिल हैं।

प्रमुख बिंदु

  • ई-नीलामी MSTC लिमिटेड के माध्यम से की जाएगी, जो सरकार का ई-नीलामी मंच है। नीलामी से पहले खनिज ब्लॉक की पहचान, पर्यावरणीय आकलन, भूमि सत्यापन और निविदा दस्तावेज तैयार करने जैसी प्रक्रियाएँ पूरी करनी होंगी।
  • बांका – पिंडारा ब्लॉक: प्रमुख खनिज → कॉपर, लेड और जिंक। इन खनिजों का उपयोग विद्युत तारों, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण, गैल्वनाइजेशन, मिश्रधातु और बैटरी के निर्माण में किया जाता है।
  • जमुई – मजोस-भांटा संयुक्त ब्लॉक: प्रमुख खनिज → मैग्नेटाइट। मैग्नेटाइट एक लौह अयस्क है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से लोहा और इस्पात उत्पादन में किया जाता है।
  • इस ब्लॉक में लगभग 54.89 मिलियन टन मैग्नेटाइट संसाधन होने का अनुमान है। पूर्व आकलन के अनुसार, मजोस भंडार में 48.40 मिलियन टन और भांटा भंडार में लगभग 6.49 मिलियन टन मैग्नेटाइट संसाधन होने का अनुमान लगाया गया था।

बिहार के लिए महत्व

  • औद्योगिक विकास: मैग्नेटाइट से लोहा एवं इस्पात उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता है, जबकि कॉपर, लेड और जिंक विद्युत उपकरण, निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों और विनिर्माण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • राजस्व में वृद्धि: खनिज पट्टों की पारदर्शी नीलामी से बिहार को रॉयल्टी और खनन राजस्व बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
  • रोजगार: अन्वेषण, खनन, परिवहन, प्रसंस्करण और संबंधित सेवाओं से अपेक्षाकृत पिछड़े जिलों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
  • निवेश: बड़े खनिज ब्लॉक निजी पूंजी, आधुनिक तकनीक और खनिज-आधारित डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण उद्योगों को आकर्षित कर सकते हैं।
  • संसाधन विविधीकरण: बिहार पारंपरिक राजस्व स्रोतों पर निर्भरता कम करके व्यापक खनिज-आधारित औद्योगिक आधार विकसित करना चाहता है।

बिहार में पीएम सूर्य घर योजना

संदर्भ: बिहार में पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत 1.22 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो घरेलू रूफटॉप सोलर के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। हालांकि, बैंक ऋण की उपलब्धता अभी भी योजना के क्रियान्वयन में एक बड़ी बाधा बनी हुई है। अब तक केवल 58.8% ऋण आवेदनों को मंजूरी मिली है।

योजना की प्रगति

  • यह योजना परिवारों को रूफटॉप सोलर प्रणाली स्थापित करने और स्वयं बिजली उत्पादन तथा नेट मीटरिंग के माध्यम से बिजली बिल कम करने में सक्षम बनाती है।
  • बिहार में योजना के तहत पहले ही 26,000 से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 71,000 से अधिक आवेदकों ने स्थापना के लिए विक्रेताओं का चयन किया है।
  • अगस्त 2026 के मध्य तक लाभार्थियों को लगभग ₹171.74 करोड़ की सब्सिडी जारी की जा चुकी थी।

पीएम सूर्य घर से संबंधित तथ्य

  • पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना एक केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर प्रणाली स्थापित करना है।
  • यह आवासीय रूफटॉप सोलर के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करती है और लाभार्थी परिवारों के लिए प्रणाली की क्षमता और खपत के आधार पर प्रति माह 300 यूनिट तक बिजली की बचत का लक्ष्य रखती है।
  • परिवार लागू सब्सिडी के अतिरिक्त 3 किलोवाट तक की रूफटॉप सोलर प्रणाली के लिए बिना जमानत के रियायती ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

महत्व

  • रूफटॉप सोलर से घरेलू बिजली बिल कम होते हैं और ग्रिड से मिलने वाली बिजली पर निर्भरता कम होती है।
  • यह विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देता है, अधिकतम मांग को कम करता है और जलवायु लक्ष्यों में योगदान देता है।
  • इससे स्थानीय इंस्टॉलर, इलेक्ट्रीशियन और रखरखाव सेवा प्रदाताओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

स्वदेशी हाइब्रिड पॉपकॉर्न मक्का लॉन्च

संदर्भ: 24 अगस्त 2026 को उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले के मुसुनुरु में भारत के पहले स्वदेशी, गैर-GMO और उच्च-विस्तार क्षमता वाले हाइब्रिड पॉपकॉर्न मक्का के बीजों का शुभारंभ किया।

प्रमुख बिंदु

  • यह लॉन्च गॉरमेट पॉपकॉर्निका की सुविधा में किया गया और इसे कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तथा आयातित पॉपकॉर्न-मक्का हाइब्रिड पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक कदम बताया गया है।
  • गैर-GMO: इसे आनुवंशिक इंजीनियरिंग या विदेशी जीन के समावेशन के बिना पारंपरिक पादप प्रजनन के माध्यम से विकसित किया गया है।
  • हाइब्रिड: वांछनीय गुणों को एक साथ लाने के लिए चयनित मक्का प्रजातियों को क्रॉस करके तैयार किया गया है।
  • उच्च-विस्तार क्षमता: गर्म करने पर इसके दाने काफी फैलते हैं, जिससे ये व्यावसायिक पॉपकॉर्न उत्पादन के लिए उपयुक्त होते हैं।
  • स्वदेशी: इसे भारत में स्थानीय उष्णकटिबंधीय परिस्थितियों, मिट्टी और कृषि वातावरण के अनुकूल विकसित एवं परीक्षण किया गया है।
  • इसके दो हाइब्रिड किस्में “कृष्णा459” और “गोदावरी234” हैं। इन्हें आयातित किस्मों के दाने के आकार और पॉपिंग गुणवत्ता के करीब लाने के साथ-साथ भारतीय किसानों के लिए आवश्यक कम अवधि और स्थानीय उत्पादन परिस्थितियों के प्रति सहनशीलता जैसे गुणों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

इसका महत्व

  • आयात प्रतिस्थापन: भारत प्रीमियम पॉपकॉर्न मक्का के लिए आयातित हाइब्रिड तकनीक पर निर्भर रहा है। स्वदेशी बीज इस निर्भरता को कम कर सकते हैं और भारतीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अधिक मूल्य बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
  • मूल्य संवर्धन: पॉपकॉर्न मक्का सामान्य मक्का की तुलना में एक विशेष और अधिक मूल्य वाली फसल है, क्योंकि इसके दानों को प्रसंस्कृत करके ब्रांडेड खाद्य उत्पाद के रूप में बेचा जाता है।
  • किसानों की भागीदारी: वस्तुतः गॉरमेट पॉपकॉर्निका आठ राज्यों में 17,500 से अधिक किसानों के साथ कार्य करती है, जिससे खेत से प्रसंस्करण तक एक मूल्य शृंखला विकसित होती है।
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