संबंधित पाठ्यक्रम

सामान्य अध्ययन 3: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।

संदर्भ: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों के लिए सख्त ऋण मानदंड लागू किए हैं, जिसके तहत ऋण दावों के दोहराव की समस्या से बचने के लिए बाह्य लेखा परीक्षक से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है।

अन्य संबंधित जानकारी:

  • यह नया निर्देश 19 जनवरी, 2026 को जारी ‘प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण – लक्ष्य और वर्गीकरण पर दिशा-निर्देश’ में RBI द्वारा संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया है।
  • यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि HDFC बैंक और ICICI बैंक ने यह सूचना दी थी कि नियामक को उनके कृषि ऋणों के PSL वर्गीकरण में विसंगतियां मिली थीं।

नए अनुपालन ढांचे के प्रावधान

  • बाह्य लेखा परीक्षक से प्रमाणपत्र: माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs), गैर-बैंकिंग वित्त और आवास वित्त कंपनियों सहित सभी मध्यवर्ती ऋणदाताओं को बाह्य लेखा परीक्षक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। यह प्रमाण पत्र इस बात की पुष्टि करेगा कि किसी भी ऋण पर एक से अधिक बैंक द्वारा प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण का दावा नहीं किया गया है।
  • ऋण के लिए PSL वर्गीकरण: ऋणदाता गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को दिए गए ऋणों के लिए PSL वर्गीकरण का दावा कर सकते हैं, बशर्ते इन ऋणों के माध्यम से वित्तपोषित परिसंपत्तियां PSL-पात्र परिसंपत्तियों की श्रेणी में आती हों।
    • बैंकों द्वारा माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs) को दिए गए ऋणों को कृषि, MSME, सामाजिक बुनियादी ढांचे जैसी संबंधित श्रेणियों के तहत PSL के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, बशर्ते कि MFIs भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का पालन करते हों।
    • व्यक्तिगत आवास इकाइयों की खरीद/निर्माण/पुनर्निर्माण या स्लम निवासियों के पुनर्वास के लिए आवास वित्त कंपनियों को दिया गया बैंक क्रेडिट भी PSL वर्गीकरण के लिए पात्र होगा, जिसके लिए प्रति उधारकर्ता ऋण की सीमा 20 लाख रुपये तक है।
    • NBFC के लिए बैंक ऋण की सीमा पिछले वित्तीय वर्ष के बैंक के कुल PSL का 5% और NBFC-MFIs के लिए 10% होगी।
  • PSL में सम्मिलित निर्यात ऋण: कृषि और MSME क्षेत्रों के लिए निर्यात ऋणों की गणना बैंकों द्वारा PSL ऋण के तहत की जा सकती है, जो श्रेणी-वार कुल सीमाओं के अधीन होगा।
  • NCDC क्रेडिट PSL के लिए पात्र: राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को दिया गया ऋण प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण वगीकरण के लिए पात्र होगा, जिसका उद्देश्य सहकारी समितियों तक ऋण का विस्तार करना है।
  • सह-ऋण का  प्रावधान: बैंकों को PSL लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सह-ऋण व्यवस्था में शामिल होने की भी अनुमति है।
    • सह-ऋण से तात्पर्य उस सहयोगी ऋण सेवा से है जहाँ दो ऋण देने वाले संस्थान संयुक्त रूप से उधारकर्ताओं को ऋण प्रदान करते हैं।
  • सुदृढ़ निगरानी: बैंकों को रिपोर्टिंग अवधि की समाप्ति से क्रमशः 15 दिन और एक महीने के भीतर त्रैमासिक और वार्षिक अंतराल पर PSL डेटा प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
  • सेवा शुल्क का अपवर्जन: RBI ने 50,000 रुपये तक के प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋणों पर सेवा शुल्क पर प्रतिबंध लगा दिया है, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के मामले में यह सीमा प्रति सदस्य लागू होगी।
  • PSL गणना ढांचा: ‘ऑफ-बैलेंस शीट एक्सपोजर’ के क्रेडिट समकक्ष की गणना ‘लार्ज एक्सपोजर फ्रेमवर्क’ और लागू पूंजी पर्याप्तता दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।
    • लार्ज एक्सपोजर फ्रेमवर्क के अनुसार, किसी एक उधारकर्ता के लिए बैंक का कुल एक्सपोजर उसके पात्र पूंजी आधार (टियर 1 पूँजी) के 20% और कॉर्पोरेट समूह के मामले में 25% से अधिक नहीं हो सकता है।
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