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सामान्य अध्ययन-3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
संदर्भ: हाल ही में’कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट’ में प्रकाशित एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का उत्क्रमण पहले के अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक लंबे समय तक हो सकता है।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और भू-चुंबकीय उत्क्रमण के बारे में
- पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र नौवहन में सहायता करता है और चुंबकमंडल का निर्माण करता है। इस प्रकार यह पृथ्वी को हानिकारक सौर पवन और ब्रह्मांडीय विकिरण से बचाता है।
- यह क्षेत्र ‘जियोडायनेमो’ प्रक्रिया के माध्यम से बनता है। जियोडायनेमो प्रक्रिया पृथ्वी के बाहरी कोर (~2,200 किमी मोटी) में पिघले हुए लोहे और निकल की गति के कारण होती है।
- भूगर्भिक अवधि के दौरान, चुंबकीय उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव समय-समय पर आपस में बदल जाते हैं, जिसे भू-चुंबकीय उत्क्रमण के रूप में जाना जाता है।
- पिछले उत्क्रमणों के साक्ष्य चट्टानों और समुद्री अवसादों में मिलते हैं, जहाँ चुंबकीय खनिज (जैसे मैग्नेटाइट क्रिस्टल), जमा होते समय पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से संरेखित हो जाते हैं।
- वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पिछले 17 करोड़ वर्षों में लगभग 540 भू-चुंबकीय उत्क्रमण हुए हैं।
- पिछले अध्ययनों ने सुझाया कि ये उत्क्रमण सामान्यतः 2,000 से 12,000 वर्षों के बीच होते हैं, जिनमें 10,000 वर्ष एक विशिष्ट अवधि मानी जाती थी।
नए अध्ययन के निष्कर्ष
- कोच्चि विश्वविद्यालय के युजी यामामोटो और उटाह विश्वविद्यालय के पीटर लिबर्ट के नेतृत्व में जापान, फ्रांस और अमेरिका के शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने कनाडा के न्यूफ़ाउंडलैंड के पास उत्तरी अटलांटिक से प्राप्त गहरे समुद्र के अवसाद कोर का विश्लेषण किया।
- ये अवसाद ‘इंटीग्रेटेड ओशन ड्रिलिंग प्रोग्राम’ अभियान (2012) के दौरान एकत्र किए गए थे।
- शोधकर्ताओं ने इओसीन युग (~4 करोड़ वर्ष पहले) के अवसाद स्तरों की जांच निम्नलिखित विधियों से की:
- एक्स-रे स्कैनिंग
- चुंबकीय माप
- अवसाद स्तरों की खगोलीय ट्यूनिंग
- उनके विश्लेषण ने दो असामान्य रूप से लंबे भू-चुंबकीय उत्क्रमणों की पहचान की:
- एक लगभग 18,000 वर्षों तक चला।
- दूसरा लगभग 70,000 वर्षों तक चला।
- लंबे समय तक चलने वाले उत्क्रमण ने जटिल व्यवहार प्रदर्शित किया, जिसमें ‘प्रीकर्सर फेज’ (precursor phases) और कई ‘रिबाउंड्स’ शामिल थे, जहाँ चुंबकीय क्षेत्र स्थिर होने से पहले अस्थायी रूप से अपनी दिशा बदलता रहा।
- पृथ्वी के कोर के संख्यात्मक अनुकरण ने सुझाव दिया कि इतने लंबे समय तक चलने वाले उत्क्रमण दुर्लभ हैं, परन्तु ये जियोडायनेमो की गतिकी के स्वाभाविक परिणाम हैं, जो संभावित रूप से 1,30,000 वर्षों तक चल सकते हैं।
पृथ्वी और भविष्य के अनुसंधान के लिए निहितार्थ
- भू-चुंबकीय उत्क्रमण के दौरान, चुंबकीय क्षेत्र काफी कमजोर हो जाता है, जिससे सौर और ब्रह्मांडीय विकिरण से पृथ्वी की सुरक्षा कम हो जाती है।
- लंबे समय तक चलने वाले उत्क्रमणों के परिणामस्वरूप निम्नलिखित स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं:
- विकिरण से अधिक संपर्क
- आनुवंशिक उत्परिवर्तन में वृद्धि
- संभावित वायुमंडलीय क्षरण
- पशु नौवहन में व्यवधान, क्योंकि कई प्रजातियाँ पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर निर्भर करती हैं।
- ऐसी स्थितियों ने प्राचीन पारिस्थितिक तंत्र और विकासवादी प्रक्रियाओं को प्रभावित किया होगा।
- इओसीन काल में जब इन उत्क्रमण की समयावधि लंबी थी, उस समय वैश्विक तापमान और CO₂ का स्तर भी अधिक था, जो इसे भविष्य के ग्लोबल वार्मिंग परिदृश्यों के लिए उपयोगी जलवायु सादृश्य बनाता है।
- वैज्ञानिकों का कहना है कि हाल की मापों में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति प्रति शताब्दी लगभग 5% की दर से कम हुई है, जबकि चुंबकीय उत्तरी ध्रुव, लगातार साइबेरिया की ओर खिसक रहे हैं। इससे यह प्रश्न उठता है कि क्या भविष्य में कोई उत्क्रमण हो सकता है।
- भविष्य के शोध आइसलैंड में लावा अनुक्रमों और अवसाद अभिलेखों में संरक्षित ‘भू-चुंबकीय विचलन’ (geomagnetic excursions) का विश्लेषण करेंगे ताकि चुंबकीय उत्क्रमण के कारणों और अवधि को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
