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सामान्य अध्ययन-2: मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास एवं प्रबंधन से संबंधित विषय; केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ।
संदर्भ: नीति आयोग ने “रीइमैजिनिंग केयर: विकसित भारत@2047 में देखभालकर्ताओं के सशक्तीकरण की रणनीतियाँ” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत में एक संगठित, पेशेवर, सुलभ एवं भविष्य के लिए तैयार देखभाल व्यवस्था के निर्माण हेतु एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
देखभाल व्यवस्था को बेहतर करने की आवश्यकता:
- देखभाल कार्य विकसित भारत@2047 की दिशा में भारत के संक्रमण के लिए एक प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में उभर रहा है, जो सामाजिक कल्याण एवं आर्थिक विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
- रिपोर्ट में देखभालकर्ताओं को देखभाल व्यवस्था के केंद्र में रखते हुए देखभाल कार्य को एक कुशल, गरिमापूर्ण एवं महत्त्वपूर्ण पेशे के रूप में मान्यता देने पर बल दिया गया है।
- रिपोर्ट देखभाल की गुणवत्ता, पेशेवर मान्यता, कार्यबल के कल्याण, संस्थागत सहयोग तथा परिवारों एवं समुदायों को विश्वसनीय एवं किफायती देखभाल सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराने पर जोर देती है।
- भारत में बढ़ती वृद्ध आबादी, बदलती पारिवारिक संरचना, दिव्यांगता की बढ़ती व्यापकता तथा दीर्घकालिक देखभाल की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण अधिक संगठित, पेशेवर एवं समन्वित देखभाल व्यवस्था की आवश्यकता है।
- इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023 के अनुसार:
- 60 वर्ष एवं उससे अधिक आयु की वृद्ध आबादी वर्ष 2022 में 14.9 करोड़ (कुल आबादी का 10.5%) थी।
- इसके बढ़कर वर्ष 2031 तक 19.4 करोड़ तथा वर्ष 2050 तक 34.7 करोड़ (कुल आबादी का 20.8%) होने का अनुमान है।
- जनगणना 2011 के अनुसार, भारत में 2.68 करोड़ दिव्यांगजन (PwDs) हैं, जिससे देखभाल सेवाओं की मांग और बढ़ जाती है।
- इंटरनेशनल एलायंस ऑफ केयरर ऑर्गनाइजेशंस के अनुसार, भारत की लगभग 10% आबादी पारिवारिक देखभालकर्ता है।

देखभाल अर्थव्यवस्था में अवसर:
- भारत अपनी जनसांख्यिकीय लाभांश की स्थिति का लाभ उठाकर अपनी देखभाल व्यवस्था तथा कुशल कार्यबल के विस्तार के लिए विशिष्ट रूप से सक्षम है।
- रिपोर्ट में निम्नलिखित संभावनाओं को रेखांकित किया गया है:
- बढ़ती घरेलू देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करना।
- कुशल रोजगार के अवसर सृजित करना।
- महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना।
- भारत को कुशल देखभाल पेशेवरों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 1.1 करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों की कमी होने का अनुमान है, जो प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मांग को दर्शाता है।
- भारत का देखभाल सेवाओं का बाजार वर्ष 2023 में 29.62 अरब अमेरिकी डॉलर का था और यह 13.76% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से विस्तार कर रहा है। यह औपचारिक रोजगार सृजन, महिला श्रमबल भागीदारी में वृद्धि तथा सतत आर्थिक विकास के लिए उच्च क्षमता वाले क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।
- महिलाएँ प्रतिदिन 299 मिनट अवैतनिक घरेलू एवं देखभाल संबंधी सेवाओं पर व्यतीत करती हैं, जबकि पुरुष 97 मिनट व्यतीत करते हैं। यह देखभाल कार्य की मान्यता एवं औपचारिकीकरण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
सिफारिशें
- नीति एवं संस्थागत ढाँचा: देखभाल कार्य पर राष्ट्रीय नीति तथा संस्थागत नेतृत्व एवं समन्वय के लिए राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद (NCC) की स्थापना की जाए।
- कार्यबल विकास: शिक्षा, प्रशिक्षण, मान्यता एवं प्रमाणन को मानकीकृत करने के लिए राष्ट्रीय देखभालकर्ता योग्यता रूपरेखा विकसित की जाए।
- समर्पित देखभालकर्ता संवर्ग का गठन किया जाए, जिसमें पेशेवर मान्यता, संरचित कैरियर प्रगति एवं विशेषीकृत प्रशिक्षण की व्यवस्था हो।
- देखभालकर्ताओं के लिए सहयोग: देखभालकर्ताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी उपायों का विस्तार किया जाए।
- परिवार एवं समुदाय-आधारित देखभाल व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए तथा अनौपचारिक देखभालकर्ताओं के लिए पूर्व अधिगम की मान्यता (RPL) की व्यवस्था की जाए।
- प्रौद्योगिकी एवं सेवा वितरण: कार्यबल नियोजन एवं सेवा वितरण के लिए राष्ट्रीय देखभालकर्ता रजिस्ट्री तथा डिजिटल मंच विकसित किया जाए।
- प्रौद्योगिकी-सक्षम देखभाल सेवाओं को बढ़ावा दिया जाए तथा देखभालकर्ताओं को देखभाल की आवश्यकता वाले व्यक्तियों से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय डिजिटल देखभाल मंच विकसित किया जाए।
- वैश्विक सहयोग: राज्यों के बीच नवाचार एवं परस्पर सीखने को प्रोत्साहित किया जाए।
- वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी देखभाल कार्यबल तैयार करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी एवं विदेशों में रोजगार-स्थापन तंत्र को सुदृढ़ किया जाए।
