संबंधित पाठ्यक्रम
सामान्य अध्ययन-1: जनसख्या एवं सम्बद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएं और उनके रक्षोपाय।
सामान्य अध्ययन -2: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय ।
संदर्भ: भारत सरकार ने जनगणना 2027 जो विश्व का सबसे बड़ा जनगणना अभ्यास है, के प्रथम चरण की शुरुआत कर दी है। इस बार इसे पहली बार पूर्णतः डिजिटल दृष्टिकोण के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है।
अन्य संबंधित जानकारी
• जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल, 2026 को ‘मकान सूचीकरण और आवास गणना’ (Houselisting and Housing Census – HLO) के साथ शुरू हुआ।

• इस अभ्यास की शुरुआत 15 दिनों की स्व-गणना अवधि के साथ हुई है, जिसके बाद प्रगणकों द्वारा घर-घर जाकर आवास सूचीकरण का कार्य किया जाएगा।
• स्व-गणना का विकल्प चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया गया है, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) तथा दिल्ली छावनी बोर्ड के क्षेत्र शामिल हैं।
• राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्व-गणना पूरी करने वाली पहली नागरिक बनीं, जिससे राष्ट्राध्यक्ष के साथ जनगणना शुरू करने की परिपाटी को जारी रखा गया।
जनगणना 2027 के बारे में
• जनगणना 2027 भारत की 16वीं जनगणना और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
• इसका आयोजन जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत किया जा रहा है।
• इस जनगणना का संचालन दो चरणों में किया जाएगा:
- मकान सूचीकरण और आवास गणना (अप्रैल–सितंबर 2026): इसके अंतर्गत जियो-टैगिंग और विशिष्ट आईडी के साथ सभी भवनों और संरचनाओं की सूची तैयार की जाएगी। इस दौरान 33-प्रश्नों वाली अनुसूची के माध्यम से आवास की स्थिति, सुविधाओं, संपत्तियों और परिवार के प्रमुख संकेतकों (जैसे परिवार का मुखिया, उपभोग पैटर्न और परिवार की संरचना) पर विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा।
- जनसंख्या गणना (फरवरी 2027): इस चरण में जनसांख्यिकीय, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक मापदंडों पर डेटा एकत्र किया जाएगा, जिसमें प्रवास और प्रजनन क्षमता संबंधी विवरण भी शामिल होंगे।
- 1 मार्च, 2027 को देश के अधिकांश हिस्सों के लिए संदर्भ तिथि के रूप में निर्धारित किया गया है।
- लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड जैसे बर्फ़बारी वाले क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 निश्चित की गई है।
• डिजिटल और तकनीकी नवाचार: जनगणना 2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें निम्नलिखित पहल शामिल हैं:
- मोबाइल एप्लिकेशन (Android और iOS): रियल टाइम में डेटा संग्रह के लिए विशेष ऐप का उपयोग।
- जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS): शुरू से अंत तक रियल टाइम निगरानी के लिए एक समर्पित पोर्टल।
- मकान सूचीकरण ब्लॉक (HLB) क्रिएटर वेब मैप एप्लीकेशन: प्रभारी अधिकारियों द्वारा सटीक क्षेत्र निर्धारण के लिए उपयोग किया जाने वाला मानचित्र अनुप्रयोग।
- नागरिकों के लिए स्व-गणना का विकल्प
- डिजिटल संचालन के लिए उच्च स्तरीय डेटा सुरक्षा
- जनगणना-एक-सेवा के रूप में (Census-as-a-Service – CaaS): मंत्रालयों को स्वच्छ, मशीन द्वारा पढ़े जाने योग्य और कार्रवाई योग्य डेटा की सुपुर्दगी।
- बेहतर डेटा प्रसार: ग्राम/वार्ड स्तर तक उपयोगकर्ता के अनुकूल डैशबोर्ड और विज़ुअलाइज़ेशन टूल के साथ आंकड़ों का प्रदर्शन।
• जाति गणना का समावेश: जैसा कि राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति (अप्रैल 2025) द्वारा निर्णय लिया गया है, इस बार की जनगणना में जाति गणना को शामिल किया जाएगा।

- भारत की सामाजिक और जनसांख्यिकीय विविधता को ध्यान में रखते हुए, जनसंख्या प्रगणना चरण के दौरान जाति संबंधी डेटा डिजिटल रूप से एकत्र किया जाएगा।
• कार्यान्वयन रणनीति: मकान सूचीकरण और आवास गणना (HLHC) तथा जनसंख्या प्रगणना (PE) के लिए अलग-अलग प्रश्नावलियों के साथ घर-घर जाकर गणना की जाएगी।
• संबंधित प्रशासनों द्वारा उप-ज़िला, ज़िला और राज्य स्तर पर जनगणना पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
• समावेशी भागीदारी, अंतिम मील तक पहुँच और सटीक जानकारी के प्रसार पर केंद्रित एक राष्ट्रव्यापी प्रचार और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
वर्ष 2019 के विपरीत, सरकार के वर्तमान बयान में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अद्यतन करने के लिए किसी अलग बजटीय आवंटन का उल्लेख नहीं किया गया है।
भारत में जनगणना का ऐतिहासिक सिंहावलोकन
स्वतंत्रता-पूर्व:
• जेम्स प्रिंसेप द्वारा पहली बार इलाहाबाद (1824) और बनारस (1827-28) शहरों में जनगणना आयोजित की गई थी।
• किसी भारतीय शहर की पहली पूर्ण जनगणना 1830 में हेनरी वाल्टर द्वारा ढाका में की गई थी।
• वर्ष 1872 में लॉर्ड मेयो के कार्यकाल में पहली बार राष्ट्रव्यापी जनगणना की गई।
• संपूर्ण ब्रिटिश भारत (कश्मीर को छोड़कर) को कवर करने वाली पहली प्रथम आधुनिक समकालिक जनगणना व्यवस्थित जनगणना 1881 में डब्लू.सी. प्लोडन द्वारा की गई थी। इसी के साथ दशकीय जनगणना की शुरुआत हुई, जो वर्तमान समय तक जारी है।
• 1931 की जनगणना अंतिम थी जिसमें व्यापक जातिगत आंकड़े दर्ज किए गए थे। इन्हीं आंकड़ों का उपयोग मंडल आयोग द्वारा पिछड़ा वर्गों के लिए 27% आरक्षण की सिफारिश करने हेतु किया गया था।
स्वतंत्रता-पश्चात:
• 1951 की जनगणना जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत आयोजित की जाने वाली पहली जनगणना थी। इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को छोड़कर सामान्य जनसंख्या के लिए जातिगत गणना को बाहर रखा गया था। अब मुख्य ध्यान शिक्षा, साक्षरता और रोजगार की स्थिति जैसे सामाजिक-आर्थिक मापदंडों पर केंद्रित हो गया।
• राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) वर्ष 2010 में शुरू किए गए और 2015 में अद्यतन किए गए NPR को सभी सामान्य निवासियों (Usual residents) का एक विस्तृत पहचान डेटाबेस तैयार करने के लिए अभिकल्पित किया गया था।
• सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) 2011 एक एकल अभ्यास था, जिसे मुख्य जनगणना से अलग आयोजित किया गया था।
Sources:
Indian Express
PIB
Indian Express
The Hindu
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