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सामान्य अध्ययन-3: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंम्प्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक सम्पदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

संदर्भ: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत दो नई सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक पर आधारित भारत की पहली व्यावसायिक Mini/Micro-LED डिस्प्ले इकाई और गुजरात में एक सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाई शामिल है। 

परियोजनाओं के बारे में 

• क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड (CML) परियोजना: क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड गुजरात के धोलेरा में ‘कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन’ और ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) के लिए एक एकीकृत सुविधा स्थापित करेगी। 

  • इस परियोजना में लगभग ₹3,068 करोड़ का संचयी निवेश शामिल है। 
  • यह सुविधा गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक पर आधारित Mini/Micro-LED डिस्प्ले मॉड्यूल का विनिर्माण करेगी और 6-इंच के वेफर्स पर ‘एपिटैक्सी’ सहित GaN फाउंड्री सेवाएं प्रदान करेगी। 
  • यह इकाई सालाना 72,000 वर्ग मीटर Mini/Micro-LED डिस्प्ले पैनल और सालाना RGB GaN एपिटैक्सी वेफर्स के 24,000 सेट तैयार करेगी। 
  • इन उत्पादों का उपयोग टीवी और वाणिज्यिक साइनेज के लिए बड़े डिस्प्ले, टैबलेट, स्मार्टफोन और इन-कार सिस्टम के लिए मध्यम आकार के डिस्प्ले, और XR ग्लास व स्मार्टवॉच के लिए माइक्रो-डिस्प्ले में किया जाएगा। 

• सुचि सेमीकन प्राइवेट लिमिटेड (SSPL) परियोजना: सुचि सेमीकन प्राइवेट लिमिटेड गुजरात के सूरत में एक ‘आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट’ (OSAT) सुविधा स्थापित करेगी। 

  • इस परियोजना में लगभग ₹868 करोड़ का निवेश शामिल है। 
  • यह सुविधा ‘डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर्स’ का निर्माण करेगी और ‘लीड फ्रेम’ (lead frame) तथा ‘वायरबॉन्ड’ पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करेगी। 
  • इस सुविधा की कुल उत्पादन क्षमता 1,033.20 मिलियन चिप्स प्रति वर्ष होगी, जिसमें सालाना 673 मिलियन SOIC (स्मॉल आउटलाइन इंटीग्रेटेड सर्किट) इकाइयाँ और 263 मिलियन ‘ट्रांजिस्टर आउटलाइन’ (TO) इकाइयाँ शामिल हैं। 
  • इन सेमीकंडक्टर्स का उपयोग पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एनालॉग इंटीग्रेटेड सर्किट (ICs), औद्योगिक प्रणालियों, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक स्वचालन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी बैटरी प्रबंधन प्रणालियों और सौर इनवर्टर में किया जाएगा। 
  • इन दोनों परियोजनाओं से मिलकर लगभग 2,230 कुशल पेशेवरों के लिए रोजगार उत्पन्न होने की उम्मीद है, जबकि अकेले SSPL परियोजना से लगभग 630 प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन होने की संभावना है। 

परियोजनाओं का महत्व

• भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूती: इन मंजूरियों के साथ, ISM के तहत स्वीकृत परियोजनाओं की कुल संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जिनमें लगभग ₹1.64 लाख करोड़ का संचयी निवेश शामिल है। यह फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और डिस्प्ले प्रौद्योगिकियों में भारत की विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाना है। 

• भारत की पहली व्यावसायिक डिस्प्ले इकाई: CML परियोजना भारत की पहली व्यावसायिक Mini/Micro-LED डिस्प्ले निर्माण सुविधा की स्थापना का प्रतीक है, जो उन्नत डिस्प्ले प्रौद्योगिकियों में आयात पर निर्भरता को कम करेगी। 

• उभरती प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहन: ये परियोजनाएं एक्सटेंडेड रियलिटी (XR), स्मार्ट वियरेबल्स, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक स्वचालन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम उपकरणों जैसी भविष्य की तकनीकों का समर्थन करेंगी। 

• आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और रणनीतिक महत्व: सेमीकंडक्टर विनिर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण है। ये परियोजनाएं ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। 

• डिज़ाइन और विनिर्माण आधार का विस्तार: भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को 315 शैक्षणिक संस्थानों और 104 स्टार्टअप्स को डिज़ाइन इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है। साथ ही, दो स्वीकृत परियोजनाओं ने व्यावसायिक शिपमेंट शुरू कर दिया है और दो अन्य के जल्द ही शिपमेंट शुरू करने की उम्मीद है। 

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन  (ISM) के बारे में

• भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) को 2021 में ₹76,000 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था। 

• इसका उद्देश्य भारत में एक पूर्ण ‘फुल-स्टैक’ सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करना है, जिसमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

  • सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (फैब्स)। 
  • कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स। 
  • सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और टेस्टिंग। 
  • डिस्प्ले विनिर्माण। 
  • चिप डिज़ाइन और नवाचार। 

• यह योजना पात्र सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले विनिर्माण परियोजनाओं के लिए 50% तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। 

• ISM 1.0 की मुख्य विशेषताएं:

  • इसका मुख्य ध्यान सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और पैकेजिंग बुनियादी ढांचे को आकर्षित करने पर रहा। 
  • इसने घरेलू चिप विनिर्माण और असेंबली क्षमताओं को प्रोत्साहित किया। 
  • इसने सेमीकंडक्टर डिज़ाइन इकोसिस्टम और स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान की। 
  • इसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी, जिसमें वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रावधान है। 

• ISM 2.0 का मुख्य फोकस होगा:

  • सेमीकंडक्टर उपकरण और सामग्री विनिर्माण। 
  • स्वदेशी सेमीकंडक्टर बौद्धिक संपदा (IP)। 
  • उन्नत तकनीक नोड्स जैसे कि 3 nm और 2 nm चिप्स। 
  • घरेलू और वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करना। 
  • उद्योग के नेतृत्व वाले अनुसंधान और कौशल विकास केंद्र। 

• क्षेत्रीय परिदृश्य:

  • भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2023 में $38 बिलियन अनुमानित था, जिसके 2030 तक $100–110 बिलियन पहुँचने का अनुमान है। 
  • 2029 तक, भारत का लक्ष्य घरेलू मांग के लगभग 70–75% के लिए आवश्यक चिप्स का डिज़ाइन और निर्माण करना है। 
  • 2035 तक, भारत का लक्ष्य विश्व के अग्रणी सेमीकंडक्टर देशों में शामिल होना है। 

Sources:
PIB
PIB
Indian Express
Economictime

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