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सामान्य अध्यन-3: बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे, इत्यादि.; औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।

संदर्भ: तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) ने मिशन समुद्र मंथन के तहत महानदी अपतटीय बेसिन में पहले मूल्यांकन कुएँ (Appraisal Well) MN-DWN18-1-HD की खुदाई प्रारंभ कर दी है। यह भारत के गहरे समुद्री हाइड्रोकार्बन अन्वेषण कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अन्य संबंधित जानकारी

  • यह मूल्यांकन कुआँ ओडिशा तट से दूर स्थित MN-DWN-2018/1 ब्लॉक में खोदा जा रहा है, ताकि इस क्षेत्र में मिले हाइड्रोकार्बन भंडारों के आकार, गुणवत्ता तथा उनकी वाणिज्यिक व्यवहार्यता का आकलन किया जा सके। यह भारत के सबसे संभावनाशील अपतटीय बेसिनों में से एक है।
  • यह चार नियोजित गहरे समुद्री मूल्यांकन कुओं में पहला है, जिनके माध्यम से उन्नत गहरे समुद्री ड्रिलिंग तकनीकों का उपयोग कर महानदी अपतटीय बेसिन की हाइड्रोकार्बन क्षमता का व्यवस्थित मूल्यांकन किया जाएगा।
  • यह पहल भारत की उस व्यापक रणनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा ऊर्जा आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) के लक्ष्य को साकार करना है।

भारत की हाइड्रोकार्बन अन्वेषण व्यवस्था को समझना

  • मिशन समुद्र मंथन
    • परिचय: मिशन समुद्र मंथन भारत की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य सीमांत (Frontier) अपतटीय अवसादी बेसिनों में गहरे समुद्र तथा अत्यंत गहरे समुद्र के हाइड्रोकार्बन संसाधनों के अन्वेषण में तेजी लाना है।
    • उद्देश्य: इस मिशन का लक्ष्य हाइड्रोकार्बन भंडार (Reserves) में वृद्धि करना, घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाना, अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षमता का दोहन करना, भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना है।  
    • रणनीतिक फोकस: यह मिशन उन्नत गहरे समुद्री अन्वेषण तथा अपतटीय खोजों के मूल्यांकन को बढ़ावा देता है। इसे हाल के नीतिगत सुधारों तथा अपतटीय अन्वेषण ब्लॉकों तक व्यापक पहुँच के माध्यम से समर्थन प्राप्त है।
  • भारत की अन्वेषण नीति का विकास
    • नई अन्वेषण लाइसेंसिंग नीति (NELP), 1997: वर्ष 1997 में लागू की गई। इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धी बोली की व्यवस्था शुरू करके निजी एवं विदेशी कंपनियों की हाइड्रोकार्बन अन्वेषण में भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।
    • हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति (HELP), 2016: इसने वर्ष 2016 में NELP का स्थान लिया। इसका उद्देश्य लाइसेंसिंग व्यवस्था को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना, सीमांत तथा कठिन हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों में अन्वेषण को प्रोत्साहित करना है।
  • HELP (हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति) की प्रमुख विशेषताएँ
    • एकीकृत लाइसेंस: एक ही लाइसेंस के माध्यम से सभी प्रकार के पारंपरिक तथा गैर-पारंपरिक हाइड्रोकार्बनों के अन्वेषण एवं उत्पादन की अनुमति मिलती है।
    • राजस्व साझेदारी मॉडल: लागत-वसूली तंत्र (Cost Recovery Mechanism) के स्थान पर राजस्व साझेदारी मॉडल लागू किया गया। इससे राजकोषीय प्रशासन सरल हुआ तथा विवादों में कमी आई।
    • विपणन एवं मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता: विशेष रूप से कठिन क्षेत्रों से होने वाले उत्पादन के लिए कंपनियों को अधिक परिचालन लचीलापन प्रदान किया गया।
    • ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (OALP): कंपनियाँ वर्ष भर अपनी पसंद के अन्वेषण ब्लॉकों की पहचान कर सकती हैं और उनके लिए आवेदन कर सकती हैं। यह व्यवस्था राष्ट्रीय डेटा भंडार (National Data Repository – NDR) द्वारा समर्थित है, जिसमें भू-वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध कराया जाता है, जिससे अन्वेषण अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनता है।

गहरे समुद्री हाइड्रोकार्बन अन्वेषण का महत्व

  • ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाता है: तेल एवं प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन में वृद्धि से भारत की आयातित हाइड्रोकार्बनों पर निर्भरता कम हो सकती है।  इससे देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा तथा ऊर्जा सहनशीलता मजबूत होती है।
  • सीमांत हाइड्रोकार्बन संसाधनों का दोहन करता है: गहरे समुद्र में अन्वेषण के माध्यम से सीमांत अपतटीय अवसादी बेसिनों में स्थित व्यावसायिक रूप से लाभकारी हाइड्रोकार्बन भंडारों की खोज एवं दोहन संभव होता है। इससे भारत के घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार का विस्तार होता है।
  • तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ बनाता है: यह उन्नत अपतटीय ड्रिलिंग, भूकंपीय प्रतिबिंबन तथा भंडार मूल्यांकन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देता है। साथ ही, भारत की स्वदेशी अन्वेषण क्षमता को भी मजबूत करता है।
  • आर्थिक विकास एवं अपतटीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है: घरेलू उत्पादन बढ़ने से तेल एवं गैस के आयात पर होने वाला व्यय कम किया जा सकता है। इससे निवेश आकर्षित होता है, रोजगार के अवसर बढ़ते हैं तथा भारत के अपतटीय ऊर्जा क्षेत्र का सतत विकास सुनिश्चित होता है।

चुनौतियाँ / सीमाएँ

  • उच्च पूंजीगत लागत: गहरे समुद्र में हाइड्रोकार्बन अन्वेषण के लिए विशेषीकृत ड्रिलिंग रिग, समुद्र तल पर स्थापित अवसंरचना तथा उन्नत तकनीकों में भारी निवेश की आवश्यकता होती है। इससे ऐसी परियोजनाएँ अत्यधिक पूंजी-गहन बन जाती हैं।
  • भू-वैज्ञानिक अनिश्चितता एवं वाणिज्यिक व्यवहार्यता: हाइड्रोकार्बन की खोज होने के बावजूद यह आवश्यक नहीं कि वह व्यावसायिक रूप से लाभकारी भंडार सिद्ध हो। इससे अन्वेषण परियोजनाओं में भू-वैज्ञानिक तथा वित्तीय जोखिम बने रहते हैं।
  • तकनीकी जटिलता: गहरे समुद्र में संचालन के लिए उच्च स्तरीय अभियांत्रिकी, विशेषीकृत उपकरणों तथा उन्नत तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। साथ ही, कई क्षेत्रों में अभी भी विदेशी प्रौद्योगिकी पर निर्भरता बनी हुई है।
  • पर्यावरणीय चिंताएँ: अपतटीय ड्रिलिंग से तेल रिसाव, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को क्षति तथा संचालन संबंधी दुर्घटनाओं का जोखिम रहता है। इसलिए कठोर पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों एवं निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है।

आगे की राह

  • गहरे समुद्री अन्वेषण में तेजी लाना: मिशन समुद्र मंथन के तहत सीमांत अपतटीय बेसिनों में अन्वेषण एवं मूल्यांकन कार्य को तेज़ किया जाए। खोजे गए हाइड्रोकार्बन भंडारों को व्यावसायिक रूप से उत्पादन योग्य भंडारों में परिवर्तित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
  • अन्वेषण तंत्र को सुदृढ़ बनाना: उच्च गुणवत्ता वाले भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षणों का विस्तार किया जाए। भूकंपीय आँकड़ों के संग्रहण में सुधार किया जाए। राष्ट्रीय डेटा भंडार (NDR) का प्रभावी उपयोग कर अन्वेषण संबंधी जोखिम कम किए जाएँ तथा निवेश आकर्षित किया जाए।
  • प्रौद्योगिकी एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना: स्वदेशी गहरे समुद्री ड्रिलिंग क्षमता को विकसित किया जाए। हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं लाइसेंसिंग नीति (HELP) तथा ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम (OALP) के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से निजी एवं वैश्विक ऊर्जा कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए।
  • ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय सततता के बीच संतुलन: अपतटीय सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव आकलन तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाया जाए। गहरे समुद्री हाइड्रोकार्बन संसाधनों का जिम्मेदार, सुरक्षित एवं सतत विकास सुनिश्चित किया जाए।
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