संदर्भ   

वर्तमान में, काँगों लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) अपने सबसे बड़े एमपॉक्स प्रकोप का सामना कर रहा है।   

अन्य संबंधित जानकारी     

  • इस प्रकोप के मुख्य कारण एमपॉक्स (मंकी पॉक्स) विषाणु में संचरण और आनुवंशिक उत्परिवर्तन में वृद्धि है, जिसके कारण मामलों और मृत्यु दर में वृद्धि हुई है।
  • जनवरी से अब तक डीआरसी में 4,500 से ज़्यादा संदिग्ध एमपॉक्स मामले और लगभग 300 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई हैं। यह संख्या विगत वर्ष की तुलना में तीन गुनी से भी अधिक है।  
  • यह प्रकोप काँगों की सीमाओं से बाहर भी फैल चुका है तथा इसके पड़ोसी देशों में भी कई मामले सामने आए हैं।
  • इस प्रकोप की गंभीरता और प्रसार के कारण काँगों ने राष्ट्र व्यापी स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है।
  • काँगों को टीका (वैक्सीन) और उपचार की उपलब्धता संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जापान जैसे दाता देशों से वैक्सीन खरीदने के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन इससे संबंधित कार्यवाही बहुत धीमी है।

यह प्रकोप ऐसे शहर में फैल रहा है, जहाँ निवासियों का वन्यजीवों से बहुत कम संपर्क है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे इस रोग के प्राकृतिक वाहक हैं।

  • इससे “एमपॉक्स के एक नए चरण” का संकेत मिलता है, जिसमें उत्परिवर्तन संभवतः इस क्षेत्र में निरंतर मनुष्य के संचरण से उत्पन्न हो रहे हैं।

एमपॉक्स या मंकीपॉक्स    

एमपॉक्स (Mpox), जिसे मंकीपॉक्स के नाम से भी जाना जाता है, चेचक के समान एक जूनोटिक विषाणुजनित रोग है।    

  • यह सर्वप्रथम वर्ष 1958 में प्रयोगशाला में बंदरों में देखने को मिली थी, इसलिए इसका नाम “मंकीपॉक्स” पड़ा।    
  • यह सामान्यतः मध्य और पश्चिम अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखने को मिला है, लेकिन वर्ष 2022 में, इसका प्रकोप वैश्विक स्तर पर देखने को मिला और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित कई देशों में इसके मामले सामने आए।

प्रसार       

एमपॉक्स मुख्यतः किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क में रहने पर फैलता है।

  • इसमें त्वचा के घावों, शारीरिक तरल पदार्थ, या बिस्तर जैसी दूषित वस्तुओं से सीधा संपर्क शामिल हो सकता है।
  • हाल के प्रकोपों में, यौन संचरण प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है, यह विशेषकर उन पुरुषों में देखने को मिलता है, जो पुरुषों के साथ यौन संबंध (एमएसएम) रखते हैं।

एमपॉक्स या मंकीपॉक्स के प्रकार       

एमपॉक्स क्लेड (प्रकार) दो प्रकार के होते हैं:

  • क्लेड 1 (अधिक गंभीर, 10 प्रतिशत मृत्यु दर) कामुकता श्रेणी के मामलों के लिए जिम्मेदार हो सकता है।
  • क्लेड 2 (99 प्रतिशत से अधिक जीवित रहने की दर) इसका प्रकोप वर्ष 2022 में शुरू हुआ।

लक्षण      

  • एमपॉक्स सामान्यतः बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकान जैसे फ्लू जैसे लक्षणों के रूप में शुरू होता है।
  • कुछ दिनों के बाद, धब्बों और फफोले के साथ दाने देखने को मिलते है, जो अक्सर सबसे पहले चेहरे पर देखने को मिलता है और धीरे-धीरे शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है।
  • इसके लक्षणों की गंभीरता अलग-अलग हो सकती है, लेकिन एमपॉक्स आमतौर पर चेचक की तुलना में हल्के लक्षण वाले होते है।
  • काँगों का प्रकोप के मामले में घाव हल्के होते हैं और मुख्यतः जननांगों पर होते हैं, जिसके कारण इसका निदान अन्य प्रकोपों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

निदान         

  • एमपॉक्स का निदान त्वचा के घाव से तरल पदार्थ के नमूने के पीसीआर (पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन) परीक्षण का उपयोग करके किया जाता है।

उपचार       

  • एमपॉक्स का कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह रोग सामान्यतः कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाती है।
  • दर्द निवारक दवा और तरल पदार्थ जैसी सहायक देखभाल लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकती है।
  • ऐसी एंटीवायरल दवाएँ उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग गंभीर मामलों में किया जा सकता है।

ज़ूनोटिक रोगों के बारे में 

परिभाषा      

  • ज़ूनोटिक रोग, जिन्हें ज़ूनोज़ के रूप में भी जाना जाता है, रोगजनकों (जैसे विषाणुऑन, जीवाणुओं, परजीवी और कवक) के कारण होने वाली बीमारियाँ हैं, जो जानवरों और मनुष्यों के बीच फैल सकती हैं।

प्रसार    

  • संक्रमित जानवरों या उनके शरीर से निकालने वाले तरल पदार्थ (जैसे, लार, रक्त, मूत्र) के साथ सीधा संपर्क होना।
  • दूषित वातावरण, जैसे मृदा, जल या सतहों से अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क होना।
  • संक्रमित कीड़ों या अन्य आर्थ्रोपोड्स के काटने से वेक्टर-जनित संचरण का होना।
  • दूषित भोजन या पानी (खाद्यजनित या जलजनित संचरण) का सेवन करना।
  • संक्रामक एजेंटों (वायुजनित संचरण) वाले हवाई कणों का श्वसन के माध्यम से शरीर में प्रवेश करना।

कारण:

जूनोटिक रोग कई प्रकार के रोगाणुओं के कारण हो सकते हैं तथा मनुष्यों को विभिन्न तरीकों से प्रभावित कर सकते हैं:

  • जीवाणुजनित: इसके उदाहरणों में एंथ्रेक्स, ब्रुसेलोसिस और लाइम रोग शामिल हैं।
  • विषाणुजनित: इसके उदाहरणों में रेबीज़, इबोला वायरस रोग और इन्फ्लूएंजा शामिल हैं।
  • परजीवी: इसके उदाहरणों में मलेरिया, टोक्सोप्लाज़मोसिस और लीशमैनियासिस शामिल हैं।
  • फफूंदजन्य (कवकजन्य): इसके उदाहरणों में हिस्टोप्लास्मोसिस, रिंगवर्म और क्रिप्टोकोकोसिस शामिल हैं।

रोकथाम:

  • उचित स्वच्छता संबंधी आदतें, जैसे जानवरों को छूने के बाद और खाने से पहले हाथ धोना।
  • पशुओं का जूनोटिक रोगों से रोकथम से संबंधित टीकाकरण करना।
  • रोग फैलाने वाले कीटों के प्रसार को कम करने के लिए वेक्टर नियंत्रण।
  • खाद्य सुरक्षा उपाय करना, जिनमें पशु उत्पादों का उचित ढंग से पकाना और भंडारण शामिल है।

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भारत-नाइजीरिया संयुक्त व्यापार समिति

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