संदर्भ: 

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को राष्ट्रीय राजधानी में डेयरी कॉलोनियों में ऑक्सीटोसिन हार्मोन के बड़े पैमाने पर उपयोग के विरुद्ध कार्यवाही करने का आदेश दिया है।

अन्य संबंधित जानकारी 

• कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और एक अन्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने  “डेयरी कॉलोनियों में ऑक्सीटोसिन हार्मोन (जिसे लाल या चांदी के ढक्कन के साथ सफेद प्लास्टिक की बोतलों में पैक किया जाता है)  के बड़े पैमाने पर उपयोग” पर एक याचिका पर सुनवाई की।

  • केंद्र सरकार ने अप्रैल 2018 में ऑक्सीटोसिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था ।
  • न्यायालय ने कहा कि हार्मोन का उपयोग, जिसके परिणामस्वरूप दूध उत्पादन में वृद्धि होती है,इसका उपयोग पशु क्रूरता के समान है और इसलिए यह एक अपराध है। 

• हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग (GNCTD) को साप्ताहिक निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि नकली ऑक्सीटोसिन के उपयोग या जब्ती के सभी मामले पशु क्रूरता निवारण  (PCA) अधिनियम , 1960 की धारा 12 और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री (DC) अधिनियम, 1940 की धारा 18 (A) के तहत पंजीकृत किए जाएं।

  • पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 12:   यह दूध देने वाले पशु के मादा अंग में हवा या किसी पदार्थ को डालने (फूंका या डूम देव) या किसी अन्य ऑपरेशन को करने के लिए दंडित करता है, जिससे उसका दुग्ध-स्राव में सुधार हो। यह पशु के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। 
  • औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 18 (A): निर्माता व अन्य  के नाम का खुलासा – प्रत्येक व्यक्ति जो किसी दवा या कॉस्मेटिक का निर्माता नहीं है या उसके वितरण के लिए उसका एजेंट नहीं है, यदि आवश्यक हो तो निरीक्षक को उस व्यक्ति का नाम पता और अन्य विवरण का खुलासा करना होगा जिससे उसने दवा या कॉस्मेटिक प्राप्त किया है।
  • दिल्ली पुलिस के खुफिया विभाग को उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि वह ऐसे नकली ऑक्सीटोसिन उत्पादन, पैकेजिंग और वितरण के स्रोतों की पहचान करे और कानून के तहत कार्यवाही की जाए।
  • न्यायालय ने निर्देश दिया कि डेयरियों को ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए जहां उचित सीवेज, जल निकासी, बायोगैस संयंत्र, मवेशियों के घूमने के लिए पर्याप्त खुली जगह और पर्याप्त चरागाह हो, क्योंकि यह बताया गया था कि दिल्ली में नौ नामित डेयरी कॉलोनियां ‘खराब’ थीं और डेयरियों को सैनिटरी लैंडफिल साइट्स (SLF) के समीप में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

ऑक्सीटोसिन क्या है?

  • इसे ‘लव हार्मोन'(love hormone) के नाम से भी जाना जाता है 
  • यह स्तनधारियों की पीयूष ग्रंथि द्वारा यौन-क्रिया, प्रसव, स्तनपान या सामाजिक संबंध के दौरान स्रावित होता है।
  • इसे प्रसव के दौरान उपयोग के लिए फार्मा कंपनियों द्वारा रासायनिक रूप से निर्मित और बेचा जा सकता है।
  • इसे इंजेक्शन या नोजल स्प्रे के द्वारा शरीर मे इन्जेक्ट किया जाता है।
  • इसका उपयोग पशु क्रूरता निवारण  अधिनियम, 1960 की धारा 12 के अंतर्गत एक संज्ञेय अपराध है।

ऑक्सीटोसिन पर प्रतिबंध

  • अप्रैल 2018 में केंद्र सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • केंद्र ने केवल एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम “कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (KAPL)” को राष्ट्रीय हित की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऑक्सीटोसिन का उत्पादन करने की अनुमति दी है।
  • ऑक्सीटोसिन पर प्रतिबंध का कारण: दुधारू पशुओं पर इसका दुरुपयोग दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जा रहा था, जिससे न केवल पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था, बल्कि दूध का सेवन करने वाले मनुष्यों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था।

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